आरएसएस पर विवादित टिप्पणी के मामले में प्रियांक खरगे और मोहम्मद नलपाड को कोर्ट का समन भारत एक घंटा पहले 2
कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खरगे और कांग्रेस नेता मोहम्मद नलपाड को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के खिलाफ की गई टिप्पणियों के मामले में बेंगलुरु की एक अदालत ने समन भेजा है।

कोर्ट ने जारी किया नोटिस

कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खरगे और यूथ कांग्रेस के नेता मोहम्मद नलपाड के लिए मुश्किलें बढ़ गई हैं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानी आरएसएस के खिलाफ कथित अपमानजनक टिप्पणी करने के चलते बेंगलुरु की एक अदालत ने इन दोनों नेताओं को समन जारी किया है। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए दोनों को 21 जुलाई तक अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। यह कार्रवाई आपराधिक मानहानि के एक मामले में की गई है।

कानूनी कार्रवाई का आधार

एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट संदीप पाटिल ने इस पूरे मामले की सुनवाई करते हुए महत्वपूर्ण टिप्पणी की। मजिस्ट्रेट ने स्पष्ट किया कि भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 356 के तहत प्रियांक खरगे और मोहम्मद नलपाड के खिलाफ आपराधिक मानहानि का मामला बनता है। न्यायालय ने अपने आदेश में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया है कि आरोपी नंबर 1 प्रियांक खरगे और आरोपी नंबर 3 मोहम्मद नलपाड के विरुद्ध अपराध का संज्ञान ले लिया गया है। वहीं, अदालत ने कर्नाटक के एक अन्य नेता दिनेश गुंडू राव के खिलाफ किसी भी तरह की कार्यवाही करने से साफ इनकार कर दिया है।

अक्टूबर 2025 का है पूरा मामला

यह कानूनी विवाद बेंगलुरु निवासी और आरएसएस कार्यकर्ता ए. तेजस द्वारा दायर की गई एक याचिका के बाद शुरू हुआ। याचिका में आरोप लगाया गया है कि अक्टूबर 2025 के दौरान दोनों नेताओं ने संघ और उससे जुड़े सदस्यों के खिलाफ कई आपत्तिजनक बातें कहीं। शिकायत के मुताबिक, प्रियांक खरगे ने मंत्री रहते हुए 4 अक्टूबर, 2025 को कर्नाटक सरकार को एक पत्र लिखा था, जिसमें मांग की गई थी कि आरएसएस को सरकारी स्कूलों, कॉलेजों और खेल के मैदानों का उपयोग करने की अनुमति नहीं मिलनी चाहिए। आरोप है कि इस पत्र को जानबूझकर मीडिया में फैलाया गया और सोशल मीडिया पर शेयर कर संगठन की छवि खराब करने का प्रयास किया गया।

सोशल मीडिया पोस्ट पर भी सवाल

याचिका में सोशल मीडिया पर की गई टिप्पणियों का भी विशेष रूप से उल्लेख किया गया है। शिकायतकर्ता का कहना है कि 13 और 14 अक्टूबर को प्रियांक खरगे ने सोशल मीडिया पर बेहद आपत्तिजनक बातें लिखी थीं। एक पोस्ट में उन्होंने लोगों को आरएसएस सदस्यों से दोस्ती न करने की सलाह दी थी। इसमें यह दावा किया गया था कि आरएसएस से जुड़े लोग परिवार का हिस्सा होने के बावजूद दुर्व्यवहार करने वाले होते हैं। अब इस अदालती आदेश पर प्रियांक खरगे ने कोई भी आधिकारिक प्रतिक्रिया देने से फिलहाल परहेज किया है।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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