मंडप सिविल अस्पताल की ECG मशीन खराब, नई खरीदने के लिए कांग्रेसी कार्यकर्ता गांववालों से मांग रहे चंदा हिमाचल प्रदेश 9 घंटे पहले 3
मंडी जिले के मंडप सरकारी अस्पताल की ईसीजी मशीन खराब पड़ी है और मरम्मत के लिए बजट न होने पर कांग्रेस कार्यकर्ता ग्रामीणों से चंदे की अपील कर रहे हैं। इस पर युवाओं ने सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं।

हिमाचल प्रदेश इस समय आर्थिक तंगी से जूझ रहा है और इसका सीधा असर आम लोगों की रोजमर्रा की दिक्कतों के रूप में सामने आ रहा है। ऐसा ही एक मामला मंडी जिले से सामने आया है, जहां धर्मपुर की उपतहसील मंडप के सरकारी अस्पताल की ईसीजी मशीन खराब पड़ी है। मशीन को ठीक करवाने के लिए सरकार के पास पैसे नहीं हैं, इसलिए स्थानीय कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने गांव के लोगों से आर्थिक सहयोग की अपील की है।

उल्लेखनीय है कि पिछली भाजपा सरकार के दौरान मंडप के सीएचसी अस्पताल को सिविल अस्पताल का दर्जा दिया गया था और यहां 50 बैड की व्यवस्था तय की गई थी। इसके लिए अलग से भवन का ठेका भी दिया गया था। फिलहाल यह अस्पताल पुरानी इमारत में चल रहा है, जहां सिर्फ दो बैड हैं और ईसीजी मशीन भी खराब है। गर्मियों में मरीजों की संख्या बढ़ रही है, मगर मशीन ठप होने के कारण उन्हें इलाज नहीं मिल पा रहा।

कांग्रेस के व्हाट्सऐप ग्रुप में अपील

मशीन खराब होने के बाद मंडप गांव के एक कांग्रेस कार्यकर्ता ने पार्टी के ही व्हाट्सऐप ग्रुप में संदेश लिखा कि सीएचसी मंडप अस्पताल की ईसीजी मशीन खराब है, जिससे मरीजों को भारी असुविधा झेलनी पड़ रही है। संदेश में कहा गया कि अपने क्षेत्र की स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने में सहयोग देना क्षेत्रवासियों का नैतिक दायित्व है। अपील में लोगों से नई ईसीजी मशीन की खरीद के लिए स्वैच्छिक सहयोग देने को कहा गया।

क्या कहते हैं बीएमओ

संधोल के बीएमओ धर्मपाल का कहना है कि मशीन दो-तीन दिन से खराब है और इसे ठीक करने के लिए टैक्नीशियन को बुलाया गया है। उन्होंने बताया कि एक ईसीजी मशीन की कीमत 40 हजार से डेढ़ लाख रुपये तक होती है और आमतौर पर ऐसी मशीनें लोगों के चंदे और दान से ही खरीदी जाती हैं।

युवाओं ने जताया विरोध

दूसरी ओर, इलाके के कई युवाओं ने इस तरह चंदा जुटाने का विरोध किया है। उनका सवाल है कि क्या सरकार के पास मशीनें खरीदने तक का बजट नहीं है। युवाओं का कहना है कि अगर हर चीज के लिए जनता से ही पैसे मांगे जाएंगे तो फिर सरकार आखिर कर क्या रही है।

विधायक तक पहुंचाई गई थी समस्या

बताया जा रहा है कि अस्पताल को मिलने वाला बजट पिछले दो महीने से नहीं मिला है। हर साल अस्पताल को खर्च चलाने के लिए ढाई लाख रुपये का बजट दिया जाता था, लेकिन इस बार दो महीने बीत जाने के बावजूद यह राशि नहीं मिली। फिलहाल रोजमर्रा के खर्चे एनएचएम के बजट से ही चलाए जा रहे हैं। हाल ही में जब विधायक चंद्रशेखर मंडप रेस्ट हाउस आए थे, तब उन्हें अस्पताल में बैड और मशीनें खरीदने के लिए एप्लीकेशन भी सौंपी गई थी, मगर इसका कोई नतीजा नहीं निकला।

अधूरी पड़ी है नई इमारत

भाजपा सरकार के समय मंडप अस्पताल का दर्जा बढ़ाए जाने के बाद 16 करोड़ रुपये से नए भवन का ठेका दिया गया था। भाजपा शासन में निर्माण कार्य चलता रहा, लेकिन कांग्रेस की सरकार आते ही काम ठप हो गया और ठेकेदार ने बीच में ही काम छोड़ दिया, क्योंकि सरकार की तरफ से अस्पताल के लिए बजट उपलब्ध नहीं है। नतीजतन निर्माणाधीन यह इमारत अब किसी भूत बंगले जैसी नजर आने लगी है।

क्या काम करती है ईसीजी मशीन

ईसीजी यानी इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम मशीन का मुख्य काम दिल की गतिविधि को मापना और रिकॉर्ड करना होता है। इससे हार्ट रेट का पता चलता है और यह जानकारी मिलती है कि दिल ठीक से काम कर रहा है या नहीं। इस मशीन की मदद से दिल का दौरा पड़ने की आशंका, हृदय की मांसपेशियों में क्षति, असामान्य धड़कन या नसों में ब्लॉकेज जैसी समस्याओं का पता लगाया जाता है।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

आपकी प्रतिक्रिया?


आपको यह भी पसंद आ सकता हैं

Comments

https://pabna.in/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!