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एक घंटा पहले
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भिलाई से दुबई तक फैला सट्टे का जाल
छत्तीसगढ़ के भिलाई का रहने वाला सौरभ चंद्राकर आज महादेव ऑनलाइन बुक के नाम से चर्चित उस सट्टा ऐप मामले का केंद्र बिंदु बन चुका है जिसने जांच एजेंसियों की नींद उड़ा दी है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) के अनुसार, इस पूरे गोरखधंधे को सौरभ चंद्राकर और उसका साथी रवि उप्पल दुबई में बैठकर संचालित कर रहे थे। इस मामले ने तब तूल पकड़ा जब 6 अक्टूबर 2022 को प्रवर्तन निदेशालय ने मनी लॉन्ड्रिंग का एक बड़ा केस दर्ज किया। यह कार्रवाई छत्तीसगढ़ पुलिस द्वारा दर्ज की गई एक पुरानी प्राथमिकी (FIR) के आधार पर शुरू हुई थी। महादेव ऐप का यह नेटवर्क केवल एक प्लेटफॉर्म तक सीमित नहीं था, बल्कि इसमें रेड्डी अन्ना, फेयरप्ले, स्काईएक्सचेंज और लोटस365 जैसे दर्जनों अन्य सट्टा प्लेटफॉर्म भी शामिल थे। ED की जांच का दावा है कि भारत और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में करीब 3,200 पैनल के जरिए यह पूरा काला कारोबार चल रहा था, जहाँ क्रिकेट से लेकर ताश के खेलों तक पर दांव लगाया जाता था।
सट्टे के नेटवर्क की कार्यप्रणाली
इस पूरे सट्टेबाजी तंत्र को चलाने का तरीका बेहद शातिर था। दुबई में बैठे संचालक पैनल चलाने के इच्छुक लोगों को लॉगिन आईडी उपलब्ध कराते थे। इस काम में उतरने के लिए शुरुआत में करीब 15 से 20 लाख रुपये तक की रकम चुकानी पड़ती थी। इसके बाद पैनल संचालक का जिम्मा होता था कि वह स्थानीय स्तर पर बैंक खातों, मोबाइल सिम, इंटरनेट कनेक्टिविटी और कर्मचारियों की व्यवस्था करे। सट्टा खेलने वाले ग्राहकों को मुख्य रूप से व्हाट्सएप और टेलीग्राम के जरिए फंसाया जाता था। शुरुआत में लोगों को लुभाने के लिए बोनस और प्रचार का सहारा लिया जाता था, लेकिन जैसे-जैसे वे फंसते थे, उनके साथ जालसाजी की जाती थी। ED के मुताबिक, अगर कोई ग्राहक बड़ी रकम जीत भी जाता था, तो उसकी यूजर आईडी तुरंत बंद कर दी जाती थी ताकि वह पैसा न निकाल सके। मुनाफे का लगभग 70 से 80 फीसदी हिस्सा दुबई में बैठे मास्टरमाइंड के पास पहुंचता था, जिसका हर हफ्ते हिसाब होता था।
हवाला और फर्जी खातों का मायाजाल
सट्टेबाजी से होने वाली बेहिसाब कमाई को ठिकाने लगाने के लिए अपराधी गिरोह ने एक जटिल व्यवस्था बनाई थी। पैसा सीधे मुख्य संचालकों के पास नहीं जाता था, बल्कि उसे कई स्तरों पर घुमाया जाता था। इसके लिए दूसरों के नाम पर खोले गए बैंक खाते, कमीशन पर भाड़े पर लिए गए खाते और धोखाधड़ी से हासिल किए गए केवाईसी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया जाता था। इस रकम का बड़ा हिस्सा हवाला के माध्यम से विदेश भेजा जाता था, जबकि कुछ पैसा भारतीय शेयर बाजार में विदेशी निवेश के रास्ते वापस आता था। प्रवर्तन निदेशालय का अनुमान है कि महादेव ऑनलाइन बुक और इससे जुड़े अन्य प्लेटफॉर्म ने करीब 88 हजार करोड़ से 94 हजार करोड़ रुपये की अवैध कमाई की है। इसमें अकेले महादेव बुक की हिस्सेदारी 75 हजार से 80 हजार करोड़ रुपये के आसपास आंकी गई है।
जूस की दुकान से लग्जरी जीवन तक का सफर
सौरभ चंद्राकर का शुरुआती जीवन बेहद साधारण था। भिलाई में उसके परिवार की 'जूस फैक्ट्री' नाम से एक दुकान हुआ करती थी, जहां वह खुद काम करता था और उसका मासिक वेतन करीब 15 हजार रुपये था। हालांकि, सट्टा कारोबार की शुरुआत के बाद उसकी आर्थिक स्थिति रातों-रात बदल गई। फरवरी 2022 में भारत छोड़ने के बाद सौरभ ने दुबई को अपना मुख्यालय बनाया। जांच एजेंसियों के पास मौजूद दस्तावेजों के अनुसार, दुबई में विला, महंगे निजी विमान, लग्जरी लाइफस्टाइल और विदेशी दौरों का सिलसिला शुरू हो गया। इन सभी विलासितापूर्ण खर्चों का भुगतान उसी काले धन से किया गया जो भारतीय आम नागरिकों की गाढ़ी कमाई से सट्टे के जरिए वसूला गया था।
200 करोड़ की शाही शादी और सितारों का जमावड़ा
सौरभ चंद्राकर की शादी चर्चा का केंद्र बनी। फरवरी 2023 में UAE के रास अल खैमाह स्थित वाल्डोर्फ एस्टोरिया होटल में हुई उसकी शादी पर कथित तौर पर 200 करोड़ रुपये नकद खर्च किए गए। इस दौरान नागपुर से मेहमानों को लाने के लिए तीन चार्टर्ड विमानों का इंतजाम किया गया था। जांच के दौरान इवेंट मैनेजमेंट कंपनियों, होटल रिकॉर्ड और ट्रैवल एजेंटों के दस्तावेजों से पता चला कि लगभग 112 करोड़ रुपये केवल इवेंट पर खर्च हुए, 42 करोड़ रुपये होटल के लिए दिए गए और 37 करोड़ रुपये मेहमानों की यात्रा और वीजा पर खर्च किए गए। इसके अलावा विमान किराये पर भी करीब 7 करोड़ रुपये लुटाए गए। शादी में कई नामचीन फिल्मी सितारों की मौजूदगी भी जांच के दायरे में रही। ED ने इस संबंध में रणबीर कपूर, कपिल शर्मा, हुमा कुरैशी, हिना खान और श्रद्धा कपूर जैसे कलाकारों को समन जारी कर पूछताछ की थी।
परिवार और सहयोगियों की भूमिका
सौरभ चंद्राकर का बड़ा भाई गितेश चंद्राकर भी इस पूरे मामले में एक अहम कड़ी बनकर उभरा है। गितेश के दुबई में रहने और महादेव बुक समेत रेड्डी अन्ना और लेजर बुक जैसे प्लेटफॉर्म्स को संभालने के आरोप हैं। पूछताछ में शामिल न होने पर उसकी 59.5 लाख रुपये की संपत्ति को कुर्क कर दिया गया। इसके अलावा रवि उप्पल, विकास छपरिया, शुभम सोनी और अतुल अग्रवाल जैसे नाम भी इस नेटवर्क के मुख्य संचालकों में शामिल हैं। ये लोग मुख्य रूप से वित्तीय प्रबंधन और पैसों के हेरफेर का काम देखते थे।
राजनीतिक संरक्षण और छापेमारी का दौर
जांच का एक बड़ा हिस्सा राजनीतिक कनेक्शन और पुलिस अधिकारियों को दी गई 'लायजनिंग मनी' पर केंद्रित है। प्रवर्तन निदेशालय ने आरोप लगाया है कि सट्टे के इस कारोबार को निर्बाध चलाने के लिए सरकारी तंत्र को प्रभावित किया गया। 2 नवंबर 2023 को रायपुर में असिम दास के पास से 5.39 करोड़ रुपये मिलने के बाद यह मामला और गंभीर हो गया। असिम दास ने अपने बयान में तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का उल्लेख किया था। इन आरोपों के बाद मामले की जांच प्रवर्तन निदेशालय से होते हुए ईओडब्ल्यू और बाद में सीबीआई तक पहुंची। अगस्त 2023 से जुलाई 2026 के बीच देश के सात राज्यों में 190 से अधिक ठिकानों पर छापेमारी की गई है। एजेंसी का दावा है कि कुल 2,014 करोड़ रुपये की नकदी, सोना और संपत्तियां फ्रीज की गई हैं, जिनकी वर्तमान बाजार कीमत 3,500 करोड़ रुपये के पार जाती है।
शेयर बाजार में निवेश और कंपनियों की खरीद
महादेव ऐप का पैसा केवल विलासिता तक सीमित नहीं रहा, बल्कि शेयर बाजार और बड़ी कंपनियों में भी लगाया गया। स्काईएक्सचेंज के संचालक हरि शंकर तिबरेवाल के जरिए करीब 766 करोड़ रुपये की रकम अमेरिकी कंपनी Ebix Inc. को खरीदने के लिए निवेश की गई। इस पूरे खेल में शामिल विकास गर्ग को 14 जुलाई 2026 को गिरफ्तार किया गया। कुल मिलाकर, इस मामले में 14 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है और 116 आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र दायर किए गए हैं। हालांकि, कई आरोपी जमानत पर बाहर हैं, लेकिन जांच एजेंसियां अभी भी नेटवर्क के बाकी हिस्सों और विदेशों में फैली संपत्तियों को खंगाल रही हैं। सौरभ चंद्राकर के खिलाफ इंटरपोल रेड नोटिस जारी है और उसे भारत वापस लाकर कानून के दायरे में खड़ा करने की प्रक्रिया जारी है।
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