छत्तीसगढ़
2 घंटे पहले
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37 दिन के लंबे इंतजार के बाद केके रेलमार्ग पर सेवा बहाल
छत्तीसगढ़ के बस्तर इलाके की लाइफलाइन माने जाने वाले केके रेलमार्ग पर करीब 37 दिनों की लंबी बाधा के बाद आखिरकार यात्री ट्रेनों की आवाजाही फिर से शुरू हो गई है। भीषण प्राकृतिक आपदा के कारण इस रेलमार्ग पर ट्रेनों का संचालन पूरी तरह से रोकना पड़ा था। रेलवे प्रशासन की निरंतर मेहनत के बाद ट्रैक को दुरुस्त कर लिया गया है, जिससे इस रेल खंड पर जिंदगी एक बार फिर पटरी पर लौट आई है।
रेल परिचालन बहाल होते ही समलेश्वरी एक्सप्रेस और हीराखंड एक्सप्रेस आज से जगदलपुर पहुंचने लगी हैं। इन दो प्रमुख ट्रेनों की शुरुआत होने से बस्तर क्षेत्र के लोगों ने राहत की सांस ली है। लंबी दूरी की यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए यह एक बहुत बड़ी राहत है, क्योंकि वे पिछले एक महीने से भी अधिक समय से आवागमन की गंभीर समस्या से जूझ रहे थे।
4 नवंबर से पटरी पर लौटेंगी 3 और प्रमुख यात्री ट्रेनें
रेलवे की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, सुरक्षा जांच और ट्रैक की मजबूती को ध्यान में रखते हुए शुरुआती चरण में 2 ट्रेनों का परिचालन शुरू किया गया है। इसके बाद आगामी 4 नवंबर से बस्तर को देश के अन्य हिस्सों से जोड़ने वाली 3 अन्य यात्री ट्रेनों की सेवाएं भी पूरी तरह से बहाल कर दी जाएंगी।
जिन ट्रेनों का संचालन 4 नवंबर से दोबारा शुरू किया जा रहा है, उनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
- जगदलपुर-विशाखापत्तनम एक्सप्रेस
- राउरकेला एक्सप्रेस
- नाइट एक्सप्रेस
इन सभी ट्रेनों के शुरू होने के साथ ही इस रेल मार्ग पर बंद पड़ी कुल 5 यात्री ट्रेनों का परिचालन पहले की तरह सामान्य हो जाएगा।
सितंबर की बाढ़ और भूस्खलन से उखड़ गया था 3 किलोमीटर लंबा ट्रैक
बस्तर और आसपास के इलाकों में बीते 23 और 24 सितंबर को आई भीषण बाढ़ और मूसलाधार बारिश ने भारी तबाही मचाई थी। इस प्राकृतिक आपदा की वजह से ओडिशा के रायगढ़ा रेल मंडल के अंतर्गत आने वाले नल्लीगुड़ा और क्षत्रिपुट स्टेशनों के बीच भीषण भूस्खलन हुआ था।
यह भूस्खलन इतना भयावह था कि इस इलाके में करीब 3 किलोमीटर तक का रेलवे ट्रैक पूरी तरह से उखड़ गया था। हालात इस कदर खराब थे कि पटरियों के नीचे लगभग 40 फीट गहरी खाई बन गई थी। पटरियों का आधार नष्ट हो जाने के कारण सुरक्षा के लिहाज से ट्रेनों का संचालन तत्काल प्रभाव से रोक दिया गया था। जगदलपुर को दूसरे राज्यों और प्रमुख शहरों से जोड़ने वाले मुख्य रेलमार्ग के बंद हो जाने से स्थानीय निवासियों का संपर्क बाहरी दुनिया से काफी हद तक कट गया था।
दिन-रात चला युद्धस्तर पर मरम्मत कार्य
इतने बड़े पैमाने पर हुए नुकसान के बाद इस रेलमार्ग को फिर से चालू करना रेलवे के लिए एक अत्यंत चुनौतीपूर्ण कार्य था। इस मुश्किल परिस्थिति से निपटने के लिए पूर्व तट रेलवे के विभिन्न विभागों ने एकजुट होकर मोर्चा संभाला।
रेलवे ट्रैक की मरम्मत के लिए निम्नलिखित विभागों की टीमों को तैनात किया गया था:
- इंजीनियरिंग विभाग
- विद्युत विभाग
- सिग्नल और दूरसंचार विभाग
इन सभी विभागों के अधिकारियों और कर्मचारियों ने दिन-रात एक करके युद्धस्तर पर काम किया। 40 फीट गहरी खाई को भरने, मिट्टी के कटाव को रोकने और 3 किलोमीटर के क्षतिग्रस्त ट्रैक को नए सिरे से तैयार करने का काम पूरा किया गया। मरम्मत कार्य पूरा होने के बाद, सबसे पहले सुरक्षा जांच के लिए मालगाड़ियों को चलाकर देखा गया। मालगाड़ियों का सफल संचालन और सुरक्षा मानकों की पुष्टि होने के बाद ही यात्री ट्रेनों को हरी झंडी दी गई।
यात्रियों को मिली बड़ी राहत, व्यापार को मिलेगी रफ्तार
पूरे 37 दिनों तक रेल सेवाएं बंद रहने के कारण बस्तर के यात्रियों, आम जनता और व्यापारियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था। आपातकालीन यात्राओं या अन्य राज्यों में जाने के लिए लोगों को सड़क मार्ग पर निर्भर होना पड़ रहा था, जिससे समय और धन दोनों का अतिरिक्त व्यय हो रहा था।
अब यात्री ट्रेनों की बहाली से जगदलपुर का रेल संपर्क फिर से मजबूत हो गया है। इससे न केवल आम यात्रियों का सफर आसान होगा, बल्कि क्षेत्र की व्यापारिक गतिविधियों और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी फिर से नई गति मिलेगी।
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