विप्रो में सीईओ की कमाई चेयरमैन से 7 गुना ज्‍यादा, शीर्ष अधिकारियों को मिला करोड़ों का भुगतान व्यापार 3 महीने पहले 36
देश की चौथी सबसे बड़ी आईटी कंपनी विप्रो ने वित्‍तवर्ष 2025-26 में सीईओ श्रीनिवास पालिया को 49.6 करोड़ रुपये और चेयरमैन ऋषद प्रेमजी को 7.3 करोड़ रुपये का भुगतान किया, जो चेयरमैन के लिए पिछले साल से करीब 50 फीसदी कम है।

आईटी क्षेत्र की प्रमुख कंपनी विप्रो ने वित्‍तवर्ष 2025-26 में अपने शीर्ष अधिकारियों को दिए गए भुगतान का ब्‍योरा सार्वजनिक किया है। देश की चौथी सबसे बड़ी इस आईटी कंपनी के आंकड़ों में सबसे दिलचस्‍प पहलू यह रहा कि बीते वित्‍तवर्ष में सीईओ को मिला कुल भुगतान कंपनी के चेयरमैन की तुलना में करीब 7 गुना अधिक रहा।

कंपनी के अनुसार, बीते वित्‍तवर्ष में विप्रो के मुख्‍य कार्यकारी अधिकारी एवं प्रबंध निदेशक श्रीनिवास पालिया को कुल 49.6 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। इससे पहले के वित्‍तवर्ष में उन्‍हें कुल 53.6 करोड़ रुपये दिए गए थे। आंकड़ों में मामूली गिरावट के बावजूद उनका कुल भुगतान कार्यकारी चेयरमैन ऋषद प्रेमजी की तुलना में करीब 7 गुना ज्‍यादा बना रहा।

सीईओ के भुगतान में गिरावट की वजह

विप्रो की ओर से बताया गया कि पालिया के भुगतान में कमी इसलिए दर्ज की गई, क्‍योंकि प्रदर्शन के आधार पर मिलने वाले वैरिएबल और कमीशन में करीब 5 करोड़ रुपये की कमी आई। वित्‍तवर्ष 2026 में उन्‍हें इस मद में 9.9 करोड़ रुपये का भुगतान हुआ, जबकि इससे पहले के वित्‍तवर्ष में यह राशि 14.5 करोड़ रुपये थी। दूसरी ओर, बीते वित्‍तवर्ष में उनकी सैलरी और अलाउंस के मद में 15.5 करोड़ रुपये दिए गए, जो पिछले वित्‍तवर्ष में 14.6 करोड़ रुपये था।

चेयरमैन को कितना मिला

पालिया एक बार फिर विप्रो में सर्वाधिक भुगतान पाने वाले कार्यकारी अधिकारी रहे। उनका कुल भुगतान एग्‍जीक्‍यूटिव चेयरमैन ऋषद प्रेमजी से करीब 7 गुना अधिक रहा। ऋषद को बीते वित्‍तवर्ष में 7.3 करोड़ रुपये का भुगतान मिला, जबकि इससे पहले के वित्‍तवर्ष में उन्‍हें 13.8 करोड़ रुपये दिए गए थे। इस तरह उनके कुल भुगतान में करीब 50 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई।

चेयरमैन के वैरिएबल में बड़ी कटौती

ऋषद प्रेमजी के कुल भुगतान में आई गिरावट का सबसे बड़ा कारण उनके कमीशन और वैरिएबल में हुई कमी रही। वित्‍तवर्ष 2025 में जहां उन्‍हें इस मद में 7 करोड़ रुपये मिले थे, वहीं वित्‍तवर्ष 2026 में यह घटकर महज 2.2 करोड़ रुपये रह गई।

इसकी तुलना में पालिया को सैलरी और अलाउंस के रूप में 15.5 करोड़ रुपये तथा कमीशन और वैरिएबल के मद में 9.9 करोड़ रुपये मिले। इसके अतिरिक्‍त उन्‍हें अन्‍य कम्‍पेंसेशन के तौर पर 23.3 करोड़ रुपये और अतिरिक्‍त अलाउंस के रूप में 1 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया।

एक साल पहले अधिक था भुगतान

वित्‍तवर्ष 2025 में पालिया को सैलरी और अलाउंस के मद में कुल 14.6 करोड़ रुपये मिले थे। साथ ही कमीशन और वैरिएबल के तौर पर 14.5 करोड़ रुपये तथा अन्‍य कम्‍पेंसेशन के लिए 23.9 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया था। उसी वित्‍तवर्ष में उन्‍हें अतिरिक्‍त कम्‍पेंसेशन के रूप में 60 लाख रुपये भी दिए गए थे।

इसके मुकाबले प्रेमजी को सैलरी और अलाउंस के तौर पर 6.3 करोड़ रुपये तथा कमीशन और वैरिएबल के रूप में 2.2 करोड़ रुपये मिले। इसके अलावा अन्‍य कम्‍पेंसेशन के तौर पर 1 करोड़ रुपये का भुगतान भी किया गया।

मुनाफे में दोनों को बराबर हिस्‍सा

विप्रो की सालाना रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी ने प्रेमजी और पालिया दोनों को कुल शुद्ध मुनाफे में 0.35 फीसदी का हिस्‍सा दिया है। इसके बावजूद दोनों के भुगतान में अंतर इसलिए दिखता है, क्‍योंकि अन्‍य मदों में दी गई राशि काफी अधिक है।

पालिया ने अप्रैल 2024 में विप्रो के सीईओ का पदभार संभाला था। उनसे पहले कंपनी की कमान थियरे डेलापोर्टे के हाथ में थी, जिनके कार्यकाल में राजस्‍व घटने के बावजूद कम्‍पेंसेशन बढ़ाने का दबाव था और इसी कारण उन्‍होंने अपने पद से इस्‍तीफा दे दिया था।

राजीव खन्ना पाबना के व्यापार संवाददाता हैं और कंपनियों, बाजार तथा अर्थव्यवस्था की खबरों को सरल भाषा में समझाते हैं। कारोबार जगत के बड़े फैसलों, नीतिगत बदलावों और उनके आम आदमी पर असर को वे गहराई से कवर करते हैं। उनका मकसद जटिल आर्थिक खबरों को हर पाठक के लिए आसान बनाना है।

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