घर खरीदारों के लिए बड़ी खुशखबरी, सुप्रीम कोर्ट ने बिल्डरों की मनमानी पर लगाई लगाम व्यापार 2 महीने पहले 75
सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसले में स्पष्ट किया है कि घर मिलने के बाद भी खरीदार पजेशन में देरी के लिए बिल्डर के खिलाफ हर्जाने की मांग कर सकते हैं। यह निर्णय उन लोगों के लिए बड़ी राहत है जो लंबे समय से पजेशन न मिलने की समस्या से जूझ रहे थे।

घर खरीदारों को मिली कानूनी सुरक्षा

देश भर में लाखों लोग अपना आशियाना खरीदने का सपना देखते हैं, लेकिन समय पर पजेशन न मिलना उनके लिए एक बड़ी चुनौती बन जाती है। चाहे दिल्ली-एनसीआर हो या देश के अन्य बड़े मेट्रो शहर, खरीदारों को अपनी मेहनत की कमाई लगाने के बाद भी सालों तक इंतजार करना पड़ता है। ऐसी अनगिनत शिकायतें आज भी रेरा और उपभोक्ता अदालतों में लंबित पड़ी हैं। इस बीच सुप्रीम कोर्ट ने एक बेहद महत्वपूर्ण आदेश जारी कर घर खरीदारों के अधिकारों को मजबूती दी है। शीर्ष अदालत ने साफ किया है कि पजेशन मिल जाने का मतलब यह नहीं है कि खरीदार का कानूनी हक खत्म हो गया है।

देरी पर मुआवजे की मांग का अधिकार

सुप्रीम कोर्ट ने अपने हालिया आदेश में कहा है कि यदि किसी बिल्डर ने मकान का पजेशन देने में देरी की है, तो खरीदार पजेशन मिलने के बाद भी उस अवधि के लिए क्षतिपूर्ति की मांग कर सकता है। कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पजेशन स्वीकार कर लेने मात्र से खरीदार का शिकायत करने का अधिकार समाप्त नहीं हो जाता है। यदि निर्माण कार्य में देरी हुई है या फिर सेवा में किसी प्रकार की कमी रही है, तो खरीदार उपभोक्ता फोरम में जाकर अपनी बात रख सकता है और मुआवजे की मांग कर सकता है।

एनसीडीआरसी (NCDRC) का फैसला पलटा

इस फैसले के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग यानी NCDRC के पुराने रुख को भी पूरी तरह से खारिज कर दिया है। आयोग का पहले यह मानना था कि एक बार यदि खरीदार ने मकान का पजेशन ले लिया, तो उसके बाद वह पजेशन में देरी के आधार पर किसी भी प्रकार की शिकायत या मुआवजे की मांग नहीं कर सकता। सुप्रीम कोर्ट ने इस तर्क को नकारते हुए इसे खरीदारों के हितों के खिलाफ बताया है।

एग्रीमेंट के नाम पर मनमानी नहीं चलेगी

अदालत ने यह भी साफ कर दिया है कि घर खरीदार और बिल्डर के बीच हुआ कोई भी अनुबंध खरीदार के कानूनी अधिकारों को सीमित नहीं कर सकता। अक्सर बिल्डर्स एग्रीमेंट में ऐसी शर्तें जोड़ देते हैं जो भविष्य में खरीदार को शिकायत करने से रोकती हैं। सुप्रीम कोर्ट के इस नए फैसले से अब डेवलपर्स की मनमानी पर लगाम लगेगी और वे समय पर पजेशन देने के लिए अधिक जवाबदेह बनेंगे। यह स्पष्ट है कि घर खरीदारों के हितों को प्राथमिकता देना न्यायिक प्रक्रिया का मुख्य आधार बन गया है।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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