Jio IPO: सेबी से मिली हरी झंडी, 37 हजार करोड़ रुपये का आएगा देश का सबसे बड़ा आईपीओ व्यापार एक घंटा पहले 4
बाजार नियामक सेबी ने रिलायंस जियो के बहुप्रतीक्षित आईपीओ को मंजूरी दे दी है। करीब 37 हजार करोड़ रुपये का यह इश्यू भारतीय शेयर बाजार के इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा पब्लिक ऑफर होगा।

सेबी ने दी मंजूरी

भारतीय शेयर बाजार में एक बड़ी हलचल के संकेत मिल रहे हैं। रिलायंस इंडस्ट्रीज की सहायक कंपनी जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ को बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड यानी सेबी से औपचारिक मंजूरी मिल गई है। कंपनी ने लगभग दो महीने पहले अपना ड्राफ्ट पेपर नियामक के पास जमा किया था। सेबी ने 28 अगस्त को अपनी अंतिम टिप्पणियां जारी करते हुए इस बड़े पब्लिक इश्यू के लिए रास्ता साफ कर दिया है। यह आईपीओ आकार के मामले में भारतीय बाजार का अब तक का सबसे विशाल आईपीओ माना जा रहा है।

सबसे बड़ा पब्लिक ऑफर

जियो प्लेटफॉर्म्स का प्रस्तावित आईपीओ करीब 37,000 करोड़ रुपये का हो सकता है। यदि यह लॉन्च होता है, तो यह हुंडई मोटर इंडिया के 27,870 करोड़ रुपये के आईपीओ को पीछे छोड़ देगा, जो वर्तमान में भारत का सबसे बड़ा पब्लिक ऑफर है। हालांकि, इश्यू का अंतिम आकार बाजार की स्थितियों, इसकी प्राइसिंग और लॉन्च के समय अपनाए जाने वाले स्ट्रक्चर पर निर्भर करेगा। कंपनी ने ड्राफ्ट दस्तावेजों में 27 करोड़ तक के नए इक्विटी शेयर जारी करने का प्रस्ताव रखा है। महत्वपूर्ण बात यह है कि इस इश्यू में ऑफर-फॉर-सेल का कोई हिस्सा नहीं रखा गया है, जिसका सीधा अर्थ यह है कि मौजूदा शेयरधारक इस आईपीओ के जरिए अपनी हिस्सेदारी नहीं बेच रहे हैं।

कर्ज कम करने की रणनीति

जियो के इस आईपीओ के पीछे कंपनी की मुख्य योजना अपने कर्ज को कम करना है। कंपनी ने यह स्पष्ट किया है कि इश्यू से जुटाई जाने वाली कुल राशि में से करीब 27,500 करोड़ रुपये का उपयोग रिलायंस जियो इन्फोकॉम के ऊपर बकाया कर्ज को समय से पहले चुकाने या उसे काफी हद तक कम करने के लिए किया जाएगा। कर्ज का बोझ कम होने से कंपनी की वित्तीय स्थिति और मजबूत होगी। बाकी बची हुई राशि का उपयोग सामान्य कॉर्पोरेट उद्देश्यों और परिचालन संबंधी जरूरतों को पूरा करने के लिए किया जाएगा।

हिस्सेदारी का गणित

रिलायंस इंडस्ट्रीज की यह योजना अपने डिजिटल और दूरसंचार कारोबार से वैल्यू अनलॉक करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। आईपीओ से पहले के आंकड़ों पर नजर डालें तो जियो प्लेटफॉर्म्स में रिलायंस इंडस्ट्रीज की हिस्सेदारी 66.43 फीसदी थी। इसके अलावा वैश्विक स्तर की कई बड़ी कंपनियों ने भी इसमें निवेश किया हुआ है। मेटा प्लेटफॉर्म्स की इसमें 9.98 फीसदी और गूगल की 7.73 फीसदी हिस्सेदारी है। अन्य प्रमुख निवेशकों में सऊदी अरब का पब्लिक इन्वेस्टमेंट फंड 2.31 फीसदी, केकेआर 2.31 फीसदी, विस्टा इक्विटी पार्टनर्स 2.31 फीसदी, सिल्वर लेक 1.88 फीसदी और मुबाडाला की हिस्सेदारी 1.85 फीसदी है।

वैश्विक निवेशकों का भरोसा

यह प्रस्तावित लिस्टिंग रिलायंस समूह द्वारा उठाए गए बड़े कैपिटल मार्केट ट्रांजेक्शन की कड़ी में एक महत्वपूर्ण अध्याय है। वर्ष 2020 में जियो प्लेटफॉर्म्स ने मेटा और गूगल के साथ-साथ कई निजी इक्विटी निवेशकों से अरबों डॉलर की पूंजी जुटाई थी। उस समय की वैश्विक भागीदारी आज कंपनी को बड़े स्तर पर बाजार में उतारने का आत्मविश्वास दे रही है।

अगले कदम क्या होंगे

सेबी की मंजूरी मिलने के बाद अब प्रक्रिया के अगले चरण शुरू होंगे। इसमें फाइनल ऑफर डॉक्यूमेंट्स की फाइलिंग, प्राइस बैंड का निर्धारण और आधिकारिक तौर पर इश्यू की टाइमलाइन की घोषणा शामिल है। निवेशक अब इस बात पर नजर गड़ाए हुए हैं कि कंपनी कब इन औपचारिकताओं को पूरा करती है और कब आम निवेशकों के लिए यह आईपीओ सब्सक्रिप्शन के लिए खुलेगा। रिलायंस के डिजिटल साम्राज्य के विस्तार के लिए यह आईपीओ एक ऐतिहासिक मोड़ साबित हो सकता है, जिससे न केवल कंपनी को पूंजी मिलेगी, बल्कि शेयर बाजार में भी बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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