अब पेट्रोल नहीं, 100% एथेनॉल पर दौड़ेंगी गाड़ियां! E100 ईंधन को भारत में मिली कानूनी हरी झंडी व्यापार एक महीने पहले 26
केंद्र सरकार ने 100 प्रतिशत एथेनॉल यानी E100 को वाहन ईंधन के रूप में कानूनी मान्यता दे दी है। इस कदम से तेल आयात पर निर्भरता घटने के साथ-साथ किसानों, ऑटो उद्योग और पर्यावरण को बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है।

क्या आने वाले वर्षों में आपकी कार पेट्रोल के बजाय पूरी तरह एथेनॉल के दम पर सड़कों पर दौड़ेगी? भारत ने इस दिशा में निर्णायक कदम उठाते हुए E100 ईंधन को कानूनी मंजूरी देने की प्रक्रिया पूरी कर ली है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने 100 प्रतिशत एथेनॉल यानी E100 को वाहन ईंधन के तौर पर मान्यता देने वाले नियमों पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। इसे देश की तेल आयात निर्भरता घटाने और स्वच्छ ईंधन को बढ़ावा देने की दिशा में अहम पड़ाव माना जा रहा है।

इस फैसले के साथ ही देश में फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों और जैव ईंधन आधारित परिवहन व्यवस्था के लिए एक नया रास्ता खुल गया है। विशेषज्ञ इसे भारत के ऊर्जा और परिवहन क्षेत्र में ऐतिहासिक बदलाव की शुरुआत मान रहे हैं।

E100 को मिली आधिकारिक मान्यता

केंद्र सरकार लंबे समय से एथेनॉल आधारित ईंधन के इस्तेमाल को प्रोत्साहित करने में जुटी हुई है। अब तक देश में पेट्रोल के साथ एथेनॉल मिलाकर इसका उपयोग किया जाता रहा है, लेकिन अब 100 प्रतिशत एथेनॉल को भी वाहन ईंधन के रूप में कानूनी मान्यता हासिल हो गई है। इस फैसले के बाद E100 के व्यावसायिक उपयोग और इसके लिए जरूरी मानकों को लागू करने का मार्ग साफ हो गया है। जानकारों का मानना है कि यह कदम देश के ऊर्जा क्षेत्र में एक नई क्रांति की नींव रख सकता है।

ऑटो कंपनियों के लिए नए अवसर

E100 को मंजूरी मिलने के बाद वाहन निर्माताओं को ऐसे इंजन तैयार करने पर ज्यादा ध्यान देना होगा जो पूरी तरह एथेनॉल पर चल सकें। कई घरेलू और विदेशी कंपनियां पहले ही फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक वाले वाहनों के प्रोटोटाइप पेश कर चुकी हैं। अब कानूनी स्पष्टता मिलने के बाद ऐसे वाहनों का बड़े पैमाने पर उत्पादन और उन्हें बाजार में उतारना आसान हो जाएगा। माना जा रहा है कि आने वाले समय में भारतीय सड़कों पर ऐसे वाहन नजर आएंगे जो पेट्रोल की जगह पूरी तरह जैव ईंधन का उपयोग करेंगे।

किसानों और कृषि क्षेत्र को बड़ा सहारा

इस नीति का सबसे बड़ा फायदा कृषि क्षेत्र को मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। देश में गन्ना, मक्का और अन्य कृषि उत्पादों का बड़ा हिस्सा एथेनॉल उत्पादन में काम आ सकेगा। इससे किसानों को अपनी उपज के लिए अतिरिक्त बाजार मिलेगा और कृषि आधारित उद्योगों को भी बढ़ावा मिलेगा।

विशेषज्ञों का कहना है कि जैव ईंधन उद्योग के विस्तार से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ताकत मिल सकती है। साथ ही अतिरिक्त कृषि उत्पादन का बेहतर इस्तेमाल भी संभव हो सकेगा।

तेल आयात में कमी, पर्यावरण को राहत

भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयातित कच्चे तेल से पूरा करता है। इस पर देश को भारी विदेशी मुद्रा खर्च करनी पड़ती है और वैश्विक तेल कीमतों के उतार-चढ़ाव का असर भी झेलना पड़ता है। E100 के बढ़ते इस्तेमाल से तेल आयात पर निर्भरता घट सकती है।

इसके अलावा एथेनॉल को अपेक्षाकृत स्वच्छ ईंधन माना जाता है, जिससे वाहनों से निकलने वाले प्रदूषण में भी कमी आने की उम्मीद है। सरकार का मानना है कि यह कदम कार्बन उत्सर्जन घटाने और पर्यावरणीय लक्ष्यों को पाने में मददगार साबित होगा।

अब इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने की चुनौती

नियमों को मंजूरी मिलने के बाद अब सबसे बड़ी चुनौती E100 ईंधन के लिए जरूरी ढांचा खड़ा करने की है। पेट्रोल पंपों पर विशेष भंडारण सुविधाएं, वितरण प्रणाली और ईंधन आपूर्ति नेटवर्क विकसित करना होगा। एथेनॉल की कुछ विशेषताएं ऐसी हैं जिनके चलते स्टोरेज टैंक और पाइपलाइन में तकनीकी बदलाव की जरूरत पड़ सकती है। तेल विपणन कंपनियां और संबंधित मंत्रालय इस दिशा में चरणबद्ध तरीके से काम करने की तैयारी में जुटे हैं।

भारत के ऊर्जा भविष्य की नई दिशा

E100 को कानूनी मंजूरी मिलने से यह स्पष्ट संकेत मिल गया है कि भारत पारंपरिक ईंधनों पर निर्भरता घटाकर वैकल्पिक और स्वदेशी ऊर्जा स्रोतों की ओर तेजी से बढ़ रहा है। यदि यह योजना सफल रहती है तो इससे न सिर्फ किसानों और उद्योगों को लाभ होगा, बल्कि आम उपभोक्ताओं को भी लंबे समय में अधिक किफायती और पर्यावरण अनुकूल विकल्प मिल सकते हैं। आने वाले वर्षों में E100 भारत के परिवहन क्षेत्र की पूरी तस्वीर बदलने में अहम भूमिका निभा सकता है।

राजीव खन्ना पाबना के व्यापार संवाददाता हैं और कंपनियों, बाजार तथा अर्थव्यवस्था की खबरों को सरल भाषा में समझाते हैं। कारोबार जगत के बड़े फैसलों, नीतिगत बदलावों और उनके आम आदमी पर असर को वे गहराई से कवर करते हैं। उनका मकसद जटिल आर्थिक खबरों को हर पाठक के लिए आसान बनाना है।

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