GST पंजीकरण के लिए सख्त निर्देश: बिना आधार सत्यापन के अब नहीं होगा रजिस्ट्रेशन व्यापार एक घंटा पहले 4
दिल्ली उच्च न्यायालय ने देश भर में फर्जी जीएसटी पंजीकरण पर लगाम लगाने के लिए बड़ा फैसला सुनाया है, जिसके तहत अब आधार का बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन अनिवार्य कर दिया गया है।

जीएसटी पंजीकरण में बड़ा बदलाव

देश भर के करोड़ों व्यापारियों और व्यवसाय शुरू करने की योजना बना रहे लोगों के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण सूचना सामने आई है। अब माल एवं सेवा कर यानी जीएसटी के तहत पंजीकरण प्राप्त करना पहले की तुलना में अधिक कड़ा हो गया है। दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक कड़े निर्देश में स्पष्ट कर दिया है कि भविष्य में बिना आधार के सत्यापन के जीएसटी का रजिस्ट्रेशन संभव नहीं होगा। न्यायालय ने अधिकारियों को आदेश दिया है कि वे तत्काल प्रभाव से इस नई व्यवस्था को सुनिश्चित करें ताकि कर प्रणाली में चल रही धांधली को रोका जा सके।

फर्जी पंजीकरण का बढ़ा खतरा

न्यायमूर्ति अनिल क्षेत्रपाल और न्यायमूर्ति शैल जैन की पीठ ने यह निर्णय उन याचिकाओं की सुनवाई के दौरान लिया, जिनमें गंभीर आरोप लगाए गए थे कि कुछ असामाजिक तत्व दूसरे लोगों के पैन कार्ड और आधार कार्ड का दुरुपयोग कर फर्जी जीएसटी पंजीकरण करवा रहे हैं। कोर्ट ने पाया कि वर्तमान व्यवस्था में खामियों का फायदा उठाकर बड़ी मात्रा में टैक्स चोरी को अंजाम दिया जा रहा है। सरकार द्वारा संसद में साझा किए गए आंकड़ों का हवाला देते हुए पीठ ने बताया कि वर्ष 2023-24 के दौरान 2,800 फर्जी जीएसटी पंजीकरण के मामले उजागर हुए थे, जिससे सरकारी खजाने को 15,085 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। इसके अलावा, वर्ष 2024-25 में भी 1,654 फर्जी पंजीकरण पकड़े गए, जिनमें 13,109 करोड़ रुपये की टैक्स चोरी का पता चला है।

क्यों जरूरी है बायोमेट्रिक सत्यापन

अदालत ने सख्त लहजे में टिप्पणी करते हुए कहा कि सरकार ने पहले इस बात का आश्वासन दिया था कि जीएसटी पंजीकरण के लिए आधार आधारित बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन को अनिवार्य किया जाएगा, लेकिन इस व्यवस्था को धरातल पर लाने में देरी की गई। इस ढिलाई का परिणाम यह रहा कि निष्क्रिय या चोरी किए गए आधार और पैन डेटा का उपयोग करके लगातार अवैध पंजीकरण होते रहे। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अब और अधिक लापरवाही की गुंजाइश नहीं है क्योंकि इससे न केवल राजस्व का भारी नुकसान हो रहा है, बल्कि निर्दोष आम नागरिकों को भी कानूनी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है जिनके नाम का गलत इस्तेमाल किया गया है।

अदालत का स्पष्ट निर्देश

न्यायालय ने देशभर के संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे अब से बायोमेट्रिक आधार ऑथेंटिकेशन के बिना किसी भी आवेदन को स्वीकार न करें और न ही पंजीकरण की अनुमति दें। कोर्ट ने प्रशासन से अपेक्षा की है कि वे इस मामले की गंभीरता को समझते हुए सरकारी राजस्व की सुरक्षा और नागरिकों की सुरक्षा के लिए उचित कदम उठाएं। अब पंजीकरण की प्रक्रिया केवल उसी आधार के माध्यम से पूरी होगी, जिसमें दर्ज मोबाइल नंबर के जरिए ओटीपी या बायोमेट्रिक सत्यापन की पुष्टि की जा सकेगी।

22 सितंबर तक का समय

अदालत ने इस प्रक्रिया के क्रियान्वयन में आने वाली किसी भी व्यावहारिक कठिनाई के लिए अधिकारियों को आपत्ति दर्ज कराने की छूट भी दी है। इस पूरे मामले पर अगली सुनवाई 22 सितंबर को निर्धारित की गई है। तब तक अधिकारी अपनी समस्याएं या सुझाव न्यायालय के समक्ष रख सकते हैं। अदालत ने अफसोस जताते हुए कहा कि जीएसटी लागू होने के करीब 9 साल बीत जाने के बाद भी अधिकारी आधार सत्यापन जैसी बुनियादी सुरक्षा व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू करने में विफल रहे हैं, जिसका सीधा असर खजाने और आम जनता पर पड़ रहा है।

वर्तमान व्यवस्था में बदलाव

अभी तक जीएसटी कानून के अंतर्गत पंजीकरण के लिए आधार वेरिफिकेशन का विकल्प तो मौजूद था, लेकिन उसे अनिवार्य नहीं किया गया था। इसी लचीलेपन का लाभ उठाकर फर्जीवाड़े की घटनाएं लगातार बढ़ रही थीं। अब न्यायालय के आदेश के बाद यह नियम अनिवार्य हो जाएगा, जिससे पंजीकरण के समय ही आवेदक की वास्तविक पहचान सुनिश्चित की जा सकेगी। यह कदम देश की कर व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने की दिशा में एक अहम मोड़ माना जा रहा है।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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