उत्तर प्रदेश
एक घंटा पहले
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विचारों
उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में कुम्हार समुदाय के लोग कभी मिट्टी से बर्तन और खिलौने बनाया करते थे, लेकिन वक्त के साथ इस पारंपरिक काम में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। बाजार की बदलती मांग और जरूरतों को ध्यान में रखते हुए अब कुम्हार परिवार प्लास्टर ऑफ पेरिस (POP) से तरह-तरह की सजावटी और काम आने वाली चीजें तैयार कर रहे हैं। इससे जहां उनकी आमदनी में इजाफा हो रहा है, वहीं उनके पुश्तैनी पेशे को भी नया रूप मिल रहा है।
पीओपी से बन रही मूर्तियां और सजावटी सामान
पहले कुम्हारों का मुख्य काम मिट्टी के घड़े, सुराही, कुल्हड़, दीये और दूसरे घरेलू बर्तन बनाना था। मगर प्लास्टिक, स्टील और अन्य आधुनिक उत्पादों के बढ़ते इस्तेमाल के चलते मिट्टी के बर्तनों की मांग लगातार घटती चली गई। ऐसे हालात में कई कुम्हार परिवारों ने नई तकनीक और बाजार की मांग को अपनाते हुए POP से सजावटी वस्तुएं बनाना शुरू कर दिया।
कुम्हार समुदाय के लोग अब POP से भगवान की मूर्तियां, फूलदान, गमले, दीवार सजावट की वस्तुएं, शोपीस, नाम पट्टिकाएं और दूसरे आकर्षक उत्पाद बना रहे हैं। शादियों, त्योहारों और घरों की सजावट में इन उत्पादों की मांग खूब बढ़ रही है। कम लागत में तैयार होने वाला यह सामान बाजार में अच्छे दामों पर बिक जाता है।
नहीं मिल पा रही मिट्टी
योगेंद्र प्रजापति ने बातचीत में बताया कि पिछले 15 वर्षों से वे लगातार मिट्टी के बर्तन तैयार कर रहे हैं, लेकिन अब धीरे-धीरे मिट्टी मिलना मुश्किल हो गया है। मिट्टी न मिल पाने के कारण उन्हें कई दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि कई बार अधिकारियों को भी इस बारे में जानकारी दी, मगर ग्राम प्रधान से लेकर लेखपाल तक की ओर से कोई मदद नहीं मिल रही है। इसी वजह से अब वे प्लास्टर ऑफ पेरिस से बर्तन और खिलौने तैयार कर रहे हैं।
योगेंद्र के मुताबिक खास बात यह है कि इन उत्पादों की डिजाइन अलग होती है और बाजार में इनकी मांग ज्यादा रहती है, जिससे अच्छी कमाई की जा सकती है। उन्होंने बताया कि प्लास्टर ऑफ पेरिस से खिलौने बनाने के लिए उन्होंने पहले प्रशिक्षण लिया और उसके बाद मिट्टी के बर्तनों के साथ-साथ POP से सजावटी सामान बनाना शुरू किया, जिसकी बाजार में अब ज्यादा मांग है और इससे अच्छा-खासा मुनाफा हो जाता है।
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