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3 घंटे पहले
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लेह: लद्दाख के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम (VVP) योजना के अंतर्गत भारत-चीन सीमा पर बसे चुमुर में प्रदेश के पहले मॉडल बॉर्डर विलेज की नींव रखी। 16 हजार 700 फीट की ऊंचाई पर सीमा के निकट बसे इस गांव में फिलहाल 24 परिवार और 91 लोग रहते हैं, जिनकी आजीविका का मुख्य आधार पश्मीना पालन और उत्पादन है। इस पहल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सशक्त और आत्मनिर्भर सीमावर्ती गांवों के संकल्प को जमीन पर उतारने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
चार बुनियादी स्तंभों पर टिका रहेगा विकास
पहले चरण में चुमुर समेत कुल 10 सीमावर्ती गांवों को मॉडल बॉर्डर विलेज के रूप में संवारा जाएगा। चुमुर मॉडल बॉर्डर विलेज परियोजना मुख्य रूप से चार स्तंभों पर आधारित है—
- बुनियादी ढांचे का विकास
- रोजगार और आजीविका का सृजन
- हर मौसम में कार्यशीलता
- नागरिक और सुरक्षा बलों का एकीकरण
इस योजना का लक्ष्य चुमुर को आत्मनिर्भर, जलवायु-अनुकूल, पर्यटन पर आधारित और आर्थिक रूप से समृद्ध सीमावर्ती बस्ती के रूप में खड़ा करना है।
हर परिवार को मिलेगा आधुनिक घर
योजना के अनुसार गांव के प्रत्येक परिवार को दक्षिण दिशा की ओर बने पैसिव सोलर हाउस दिए जाएंगे। ये घर सर्दियों में सूर्य की अधिकतम ऊर्जा को सहेजेंगे और -35 डिग्री सेल्सियस तक गिरने वाले तापमान में भी सुरक्षा प्रदान करेंगे। हर परिवार को मिलेगा—
- संलग्न शौचालय वाला आवास
- होमस्टे चलाने के लिए एक अतिरिक्त कमरा
- किचन गार्डन के लिए जमीन
- भेड़-बकरियों के लिए शेड
- पशुओं के चारे को रखने की भंडारण सुविधा
मौसम अनुकूल रहने की स्थिति में इन आवासों का निर्माण सितंबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य तय किया गया है।
पर्यटन और पश्मीना उद्योग को मिलेगी रफ्तार
चुमुर को कोरजोक-हनले पर्यटन सर्किट का एक प्रमुख पड़ाव बनाया जाएगा। इसके तहत निम्नलिखित कदम उठाए जाएंगे—
- सामुदायिक कैफे की स्थापना
- स्थानीय हस्तशिल्प को प्रोत्साहन
- पश्मीना आधारित उद्योगों का विस्तार
- वैल्यू एडेड पश्मीना उत्पादों का निर्माण
इन प्रयासों से स्थानीय निवासियों के लिए आमदनी के नए जरिए बनेंगे और सीमावर्ती क्षेत्रों से होने वाले पलायन पर रोक लगाने में मदद मिलेगी।
सालभर सब्जी उगाने के लिए बनेगा आधुनिक ग्रीनहाउस
खाद्य सुरक्षा और रोजगार को मजबूती देने के लिए Defence Institute of High Altitude Research (DIHAR) के सहयोग से 90×27 फीट का व्यावसायिक ग्रीनहाउस तैयार किया जाएगा। यहां पूरे साल सब्जियों की पैदावार होगी, जिसकी आपूर्ति स्थानीय जरूरतों के साथ-साथ भारतीय सेना और Indo-Tibetan Border Police जैसी सुरक्षा एजेंसियों को भी की जाएगी।
हर मौसम में रहने लायक बनेगा गांव
परियोजना के तहत चुमुर को एक पूर्ण रूप से विकसित ऑल-वेदर सेटलमेंट के रूप में ढाला जाएगा, जिसमें ये सुविधाएं शामिल होंगी—
- पूरे साल जल आपूर्ति
- सौर ऊर्जा पर आधारित बिजली व्यवस्था
- आधुनिक स्वच्छता और अपशिष्ट प्रबंधन
- डिजिटल कनेक्टिविटी
कठोर सर्दियों के दौरान भी ग्रामीणों को बेहतर जीवन की सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
गांव में बनेगा केंद्रीय सेवा केंद्र
गांव में एक केंद्रीय सेवा केंद्र विकसित किया जाएगा, जिसमें ये सुविधाएं होंगी—
- स्कूल
- प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC)
- सामुदायिक भवन
- पार्क
- सामुदायिक कैफे
- टूरिस्ट इंटरप्रिटेशन सेंटर (TIC)
सेना और स्थानीय लोगों की अहम भागीदारी
उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने कहा कि यह महज एक विकास परियोजना नहीं, बल्कि सीमावर्ती क्षेत्रों को सशक्त बनाने, राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने और स्थानीय लोगों के जीवन स्तर को ऊपर उठाने वाली एक परिवर्तनकारी पहल है। उन्होंने भारतीय सेना, आईटीबीपी, स्थानीय युवाओं और ग्रामीणों के सहयोग की सराहना करते हुए कहा कि चुमुर मॉडल बॉर्डर विलेज आने वाले समय में देश के अन्य ऊंचाई वाले हिमालयी सीमा क्षेत्रों के लिए भी एक आदर्श उदाहरण बनेगा।
चुमुर मॉडल बॉर्डर विलेज की खास बातें
- लद्दाख का पहला मॉडल बॉर्डर विलेज
- देश के अग्रणी सीमा गांव विकास मॉडलों में शामिल
- स्थायी और जलवायु-अनुकूल सीमावर्ती बस्ती का निर्माण
- पर्यटन और रोजगार के नए अवसर
- आधुनिक आवास और पशुपालन की सुविधाएं
- सामुदायिक कैफे और होमस्टे आधारित पर्यटन
- सौर ऊर्जा पर आधारित बुनियादी ढांचा
- सेना और स्थानीय समुदाय के बीच मजबूत तालमेल
- शिक्षा, स्वास्थ्य और पर्यटन सुविधाओं वाला केंद्रीय सेवा केंद्र
- पलायन रोकने और आत्मनिर्भरता बढ़ाने पर विशेष जोर
इस परियोजना को लद्दाख के सीमावर्ती इलाकों में विकास, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता का नया अध्याय लिखने की दिशा में एक निर्णायक कदम माना जा रहा है।
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