हिमाचल प्रदेश
5 घंटे पहले
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हिमाचल प्रदेश सरकार ने राज्य में भांग की खेती को वैध बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए इसके लिए नीति लागू कर दी है। इस नीति के तहत औषधीय और औद्योगिक उद्देश्यों के लिए भांग की खेती की अनुमति दी जाएगी। कुल्लू से विधायक सुंदर सिंह ठाकुर ने मीडिया से बातचीत के दौरान इस महत्वपूर्ण नीति के लागू होने की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस फैसले से न केवल राज्य में दवाओं और सौंदर्य प्रसाधनों (कॉस्मेटिक्स) का निर्माण आसान होगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। इस नीति से किसानों को अपनी आय बढ़ाने में मदद मिलेगी, जिससे विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों की आर्थिक स्थिति में बड़ा सुधार देखने को मिल सकता है।
सर्वदलीय समिति ने नीति का किया समर्थन
सरकार द्वारा भांग की खेती के संबंध में एक विशेष समिति का गठन किया गया था। इस समिति में शामिल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायकों ने भी इस नीति का पुरजोर समर्थन किया है। विधायक डॉक्टर जनक राज, डॉक्टर हंसराज, सुरेंद्र शौरी और पूर्ण चंद ठाकुर सहित सर्वदलीय समिति के सदस्यों ने इस फैसले पर अपनी सहमति जताई है। इस व्यापक राजनीतिक सहमति के बाद अब इस नीति को धरातल पर उतारने की तैयारी पूरी कर ली गई है।
दवाइयों और हैंडलूम उत्पादों का होगा निर्माण
सुंदर सिंह ठाकुर ने बताया कि भांग की नियंत्रित खेती से अल्जाइमर, कैंसर और ट्यूमर जैसी गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए जीवन रक्षक दवाइयां तैयार की जा सकेंगी। वर्तमान में इन बीमारियों की कई दवाइयां विदेशों से आयात करनी पड़ती हैं। भारत में इस नीति के आने के बाद बड़ी फार्मा कंपनियां घरेलू स्तर पर दवा निर्माण के लिए अपने प्लांट स्थापित कर सकेंगी, जिससे देश में ही सस्ती दवाएं उपलब्ध होंगी।
चिकित्सीय उपयोग के अलावा भांग के रेशों का इस्तेमाल कई प्रकार के औद्योगिक और हैंडलूम उत्पादों को बनाने में किया जाएगा। इससे कई महत्वपूर्ण सामग्रियां तैयार की जा सकेंगी, जैसे:
- मजबूत रस्सियां
- कपड़े और जूते
- हिमाचली शॉल
- विभिन्न प्रकार के सौंदर्य प्रसाधन (कॉस्मेटिक्स)
खेती के लिए लागू होंगे कड़े सुरक्षा नियम
भांग की खेती को खुले खेतों में करने की अनुमति बिल्कुल नहीं होगी। सरकार ने इसके दुरुपयोग को रोकने के लिए बेहद सख्त सुरक्षा नियम और शर्तें तय की हैं। खेती करने वाले किसानों को निम्नलिखित दिशा-निर्देशों का पालन करना अनिवार्य होगा:
- भांग उगाने के लिए निर्धारित क्षेत्र की चारों तरफ से पूरी तरह से बाड़बंदी (फेंसिंग) करना जरूरी होगा।
- इसकी खेती केवल सुरक्षित और स्वीकृत पॉलीहाउस के भीतर ही की जा सकेगी।
- पॉलीहाउस में आवाजाही के लिए केवल एक ही मुख्य प्रवेश द्वार होगा और बाहर निकलने के लिए एक अलग रास्ता सुनिश्चित करना होगा।
- पॉलीहाउस में प्रवेश करने वाले हर व्यक्ति का पूरा विवरण और रिकॉर्ड रखना अनिवार्य होगा।
- पूरी खेती की कड़ी निगरानी के लिए CCTV कैमरे लगाए जाएंगे और पूरे क्षेत्र की जियो टैगिंग की जाएगी।
लाइसेंस और शुल्क से जुड़े प्रावधान
इस नीति के अंतर्गत भांग उगाने के इच्छुक किसानों को 1000 रुपये प्रति बीघा की दर से शुल्क का भुगतान करना होगा। भांग की खेती के लिए लाइसेंस जारी करने का अधिकार कृषि विभाग के पास होगा। हालांकि, लाइसेंस जारी करने से पहले कृषि विभाग और आबकारी विभाग दोनों की सिफारिश व मंजूरी आवश्यक होगी। यह लाइसेंस शुरुआती तौर पर केवल 1 साल की अवधि के लिए वैध होगा, जिसे नियमों के पालन के आधार पर बाद में रिन्यू (नवीनीकृत) कराया जा सकेगा।
भंडारण और नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई
फसल की कटाई के बाद भांग के भंडारण (स्टोरेज) को लेकर भी बेहद कड़े नियम बनाए गए हैं। उत्पादित भांग को केवल उन्हीं गोदामों या वेयरहाउस में रखा जा सकेगा, जिन्हें सरकार द्वारा लाइसेंस प्राप्त होगा। इन सभी गोदामों में भी चौबीसों घंटे CCTV कैमरों के जरिए कड़ी निगरानी रखी जाएगी। इसके अलावा, उत्पादित भांग की बिक्री के लिए किसानों या उत्पादकों को संबंधित विभाग के अधिकारियों से बकायदा लिखित अनुमति लेनी होगी।
यदि कोई भी उत्पादक तय किए गए नियमों का उल्लंघन करता हुआ पाया जाता है, तो उसके खिलाफ प्रशासन द्वारा अत्यंत सख्त कार्रवाई की जाएगी। नियमों की अनदेखी करने पर उत्पादक का लाइसेंस तुरंत रद्द कर दिया जाएगा और उसके खिलाफ NDPS एक्ट के कड़े कानूनी प्रावधानों के तहत मामला दर्ज कर कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
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