खंडवा का यह तितली पार्क बना पर्यटकों की पहली पसंद, प्रकृति की रंगीन दुनिया देखने उमड़ रही भीड़ मध्य प्रदेश एक घंटा पहले 2
मध्य प्रदेश के खंडवा में स्थित बटरफ्लाई पार्क मानसून के दौरान पर्यटकों के लिए एक प्रमुख आकर्षण बन गया है। करीब 10 हेक्टेयर में फैले इस पार्क में 150 से अधिक प्रजातियों की तितलियां अपने प्राकृतिक आवास में अठखेलियां करती दिखाई देती हैं।

मानसून में प्रकृति का अनूठा उपहार

बारिश के मौसम में जब चारों तरफ हरियाली छा जाती है, तब हर किसी का मन प्रकृति की गोद में खो जाने का करता है। ऐसे खुशनुमा माहौल में यदि आपको रंग-बिरंगी तितलियों की दुनिया करीब से देखने को मिल जाए, तो यात्रा का आनंद दोगुना हो जाता है। मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में स्थित बटरफ्लाई पार्क इन दिनों सैलानियों और प्रकृति प्रेमियों के लिए एक बेहद आकर्षक ठिकाना बना हुआ है। यह स्थान अपनी शांति, सुंदरता और जीवंत वातावरण के कारण तेजी से एक प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में उभरा है।

विशाल क्षेत्र में फैला तितलियों का बसेरा

खंडवा के चारखेड़ा गांव में इंदिरा सागर जलाशय के बैकवॉटर के किनारे बसा यह बटरफ्लाई पार्क लगभग 10 हेक्टेयर के विशाल क्षेत्रफल में फैला है। चारों ओर फैले घने जंगलों, जल स्रोतों और चारों तरफ फैली प्राकृतिक हरियाली के बीच स्थित यह पार्क मानसून के दौरान मानो जीवंत हो उठता है। यहाँ कदम रखते ही ऐसा आभास होता है जैसे आप प्रकृति के किसी अत्यंत सुंदर और रंगीन संसार में आ गए हों, जो शहर की भागदौड़ भरी जिंदगी से कोसों दूर है।

150 से अधिक प्रजातियों का घर

इस पार्क की सबसे बड़ी खूबी यहाँ पाई जाने वाली तितलियों की विविधता है। यहाँ प्राकृतिक वातावरण में 150 से अधिक प्रजातियों की तितलियां देखी जा सकती हैं। इनमें कई ऐसी प्रजातियां भी मौजूद हैं, जो अत्यंत दुर्लभ हैं और जिन्हें देखना किसी बड़े रोमांच से कम नहीं है। शोधकर्ताओं और सैलानियों के लिए यह तितलियों की जीवनशैली को समझने का एक शानदार स्थान है। यहाँ पाई जाने वाली प्रमुख तितलियों में शामिल हैं:

  • प्लेन टाइगर: इनके पंख नारंगी-भूरे रंग के होते हैं, जिन पर काली बॉर्डर और सफेद धब्बे होते हैं। ये मिल्कवीड पौधों पर आश्रित होती हैं, जिससे इनमें एक प्रकार का जहर विकसित होता है, जो इन्हें शिकारियों से बचाता है।
  • स्ट्रिप्ड टाइगर: ये दिखने में प्लेन टाइगर जैसी लगती हैं, लेकिन इनके पंखों पर धारियां और नसों का पैटर्न अधिक स्पष्ट होता है। ये प्रवासी तितलियां हैं जो जंगलों और खुले मैदानों में आसानी से देखी जा सकती हैं।
  • ब्लू टाइगर: गहरे भूरे या काले पंखों पर नीले-सफेद पैटर्न वाली ये तितलियां समूह में उड़ने के लिए प्रसिद्ध हैं। दक्षिण भारत में इनकी बड़ी संख्या पाई जाती है।
  • कॉमन क्रो: चमकीली काले रंग की ये तितलियां धीमी गति से उड़ती हैं और इनके पंखों पर सफेद धब्बे होते हैं। इनके लार्वा मुख्य रूप से कनेर और अंजीर के पौधों पर पलते हैं।
  • कॉमन रोज: इनके पंखों पर लाल और गुलाबी रंग के धब्बे होते हैं। यह विषैली प्रजाति है जो अपने चटख रंगों से दुश्मनों को चेतावनी देती है।
  • कॉमन मोरमन: ये बड़े आकार की काली तितलियां हैं जिनके पंखों पर हल्के रंग के सुंदर डिजाइन बने होते हैं। ये अपनी तेज उड़ान के लिए जानी जाती हैं।
  • ग्रेट एग फ्लाई: काले पंखों पर नीले और सफेद धब्बों से सजी ये तितलियां अपनी सुंदरता और तीव्र उड़ान कौशल के लिए जानी जाती हैं।

सैलानियों के लिए एक जादुई अनुभव

प्रकृति प्रेमियों के लिए यह स्थान किसी जन्नत से कम नहीं है। यहाँ आने वाले पर्यटक बताते हैं कि बारिश के दिनों में तितलियों की रौनक और भी बढ़ जाती है। पूरा इलाका जैसे रंगों की एक पेंटिंग सा बन जाता है। फूलों पर मंडराती तितलियां और उनकी धीमी उड़ान को करीब से देखना मन को असीम सुकून देता है। कमलेश पटेल, जो एक स्थानीय प्रकृति प्रेमी हैं, के अनुसार वे हर महीने यहाँ समय बिताने आते हैं। उन्होंने बताया कि हर बार उन्हें यहाँ कुछ नया और अद्भुत देखने को मिलता है। कई बार ऐसी दुर्लभ प्रजातियां भी नजर आती हैं, जो देश के अन्य हिस्सों में आसानी से नहीं देखी जा सकतीं, जो इस पार्क को और भी खास बनाती हैं। यदि आप भी बारिश में शांति और सुंदरता की तलाश में किसी बेहतरीन स्थान पर जाना चाहते हैं, तो खंडवा का यह तितली पार्क आपके लिए एक आदर्श विकल्प हो सकता है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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