यूनियन मंत्री भगीरथ चौधरी को अपनी ही मंत्रालय की योजना से खीरा फार्म के लिए मिला 99 लाख रुपये का सब्सिडी राजनीति 2 महीने पहले 86
कानूनी रूप से यदि सभी प्रक्रियाएं पूरी की गई हों तो यह अनुचित नहीं माना जाता, लेकिन नैतिकता पर सवाल जरूर उठता है।

नई दिल्ली/जयपुर, 26 जून 2026: भारतीय एक्सप्रेस की जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय में राज्य मंत्री भगीरथ चौधरी को राजस्थान में अपने खीरा फार्म के लिए 99 लाख रुपये (लगभग 1 करोड़ रुपये) की सब्सिडी मंजूर हुई है। यह सब्सिडी उसी योजना के तहत दी गई है, जिसकी बोर्ड की उपाध्यक्षता स्वयं भगीरथ चौधरी करते हैं।

योजना क्या है?

“कमर्शियल हॉर्टिकल्चर का विकास – प्रोडक्शन एवं पोस्ट-हार्वेस्ट मैनेजमेंट ऑफ हॉर्टिकल्चर क्रॉप्स” नाम की यह योजना राष्ट्रीय हॉर्टिकल्चर बोर्ड (एनएचबी) के तहत संचालित होती है। इसका उद्देश्य व्यावसायिक स्तर पर सब्जी, फल एवं फूलों की खेती को बढ़ावा देना है। योजना के तहत परियोजना लागत का 50% तक सब्सिडी दी जा सकती है।

भगीरथ चौधरी राजस्थान के पीप (डीडवाना-कुचामन जिला) स्थित अपने फार्म पर यह परियोजना चला रहे हैं। फार्म पर बड़े पॉलीहाउस, आर्टिफिशियल तालाब, कंटीली तारों की बाड़ और स्टोन वॉल्स हैं। फार्म के मुख्य द्वार पर लगा साइनबोर्ड स्पष्ट रूप से लिखा है – “Assisted by National Horticulture Board, Ministry of Agriculture & Farmers’ Welfare, Govt. of India”।

मंत्री की भूमिका में टकराव

भगीरथ चौधरी केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री के रूप में राष्ट्रीय हॉर्टिकल्चर बोर्ड के पदेन उपाध्यक्ष हैं। बोर्ड ने पिछले साल कुल 467 परियोजनाओं को मंजूरी दी थी, जिनमें से केवल एक ही परियोजना उनके अपने फार्म की थी। उनके सहायक का कहना है कि “सभी विवरण सरकार को उपलब्ध करा दिए जाएंगे”।

परिवार के अन्य सदस्य भी लाभार्थी

जांच में पता चला कि केवल मंत्री जी ही नहीं, बल्कि उनके परिवार के तीन सदस्य भी इस योजना के लाभार्थी हैं:

      • पत्नी
      • बेटा
      • एक सीनियर आईएएस अधिकारी की मां

ये तीनों परिवार के सदस्य राजस्थान में ही योजना का लाभ ले रहे हैं। रिकॉर्ड्स के अनुसार, नरेश पाल गंगवार (1994 बैच के आईएएस अधिकारी, जो मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय के सचिव हैं) के परिवार को भी 1.16 करोड़ रुपये से अधिक की सब्सिडी मिली है।

सब्सिडी कैसे मंजूर हुई?

      1. परियोजना लागत का 50% सब्सिडी (99,60,000 रुपये)।
      2. बोर्ड द्वारा मंजूरी, जिसमें मंत्री स्वयं उपाध्यक्ष हैं।
      3. केवल 467 परियोजनाओं में से एक – मंत्री का प्रोजेक्ट।
      4. सब्सिडी राशि सीधे लाभार्थी के खाते में।

मंत्री का बचाव

भगीरथ चौधरी के कार्यालय ने कहा है कि यह “कमर्शियल फार्मिंग” को बढ़ावा देने वाली योजना है और सभी प्रक्रियाएं पारदर्शी ढंग से पूरी की गई हैं। उन्होंने कहा कि पूरी जानकारी सरकार को दी जाएगी।

विशेषज्ञों की प्रतिक्रिया

कृषि नीति विशेषज्ञों का कहना है कि जब कोई मंत्री स्वयं उस योजना का लाभार्थी बनता है, जिसकी वह अध्यक्षता या उपाध्यक्षता करता है, तो हितों के टकराव (Conflict of Interest) की स्थिति बनती है। हालांकि, कानूनी रूप से यदि सभी प्रक्रियाएं पूरी की गई हों तो यह अनुचित नहीं माना जाता, लेकिन नैतिकता पर सवाल जरूर उठता है।

यह मामला राजस्थान के डीडवाना-कुचामन क्षेत्र में एक बड़े व्यावसायिक हॉर्टिकल्चर फार्म से जुड़ा है, जहां खीरा, टमाटर, कैप्सिकम आदि फसलों की खेती की जा रही है।

नोट: भारतीय एक्सप्रेस की इस जांच रिपोर्ट के अनुसार, पूरी जानकारी सार्वजनिक दस्तावेजों और फील्ड विजिट पर आधारित है। आगे की जांच जारी है।

(यह विस्तृत समाचार रिपोर्ट मूल भारतीय एक्सप्रेस लेख पर आधारित है और पाठकों को पूर्ण जानकारी देने के उद्देश्य से तैयार की गई है।

चेतन शुक्ला
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चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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