खगड़िया के किसानों की बल्ले-बल्ले, प्लास्टिक मल्चिंग पर सरकार देगी 50 फीसदी सब्सिडी बिहार 4 घंटे पहले 3
बिहार के खगड़िया जिले में खेती को आधुनिक बनाने और लागत घटाने के लिए उद्यान विभाग ने प्लास्टिक मल्चिंग तकनीक पर 50 फीसदी अनुदान देने की घोषणा की है।

खेती की लागत घटाने की नई पहल

बिहार के खगड़िया जिले में कृषि क्षेत्र को नई दिशा देने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। उद्यान विभाग निर्देशालय ने अब जिले के किसानों को प्लास्टिक मल्चिंग तकनीक अपनाने के लिए प्रोत्साहित करने का निर्णय लिया है। इस योजना के माध्यम से किसानों को न केवल अपनी फसल की पैदावार बढ़ाने में मदद मिलेगी, बल्कि कृषि लागत में भी भारी कटौती देखने को मिलेगी।

सब्सिडी का लाभ और सरकारी मदद

एकीकृत बागवानी मिशन के अंतर्गत संरक्षित खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से यह विशेष सब्सिडी योजना शुरू की गई है। इस कार्यक्रम के तहत पात्र किसानों को प्लास्टिक मल्चिंग के लिए सरकार की ओर से 50 प्रतिशत का अनुदान प्रदान किया जाएगा। जिला उद्यान पदाधिकारी के अनुसार, यह तकनीक आधुनिक खेती में एक गेम चेंजर साबित हो सकती है।

प्लास्टिक मल्चिंग के फायदे

प्लास्टिक मल्चिंग एक ऐसी तकनीक है जो खेती को अधिक टिकाऊ और फायदेमंद बनाती है। इसके प्रमुख लाभ निम्नलिखित हैं:

  • पानी की बचत: यह तकनीक मिट्टी की नमी को लंबे समय तक बनाए रखती है, जिससे सिंचाई की जरूरत कम हो जाती है।
  • खरपतवार पर नियंत्रण: प्लास्टिक की परत बिछाने से अनावश्यक घास और खरपतवार नहीं उगते, जिससे फसलों को पूरा पोषण मिलता है।
  • बेहतर उत्पादन: मिट्टी का तापमान नियंत्रित रहने और नमी बने रहने से फसलों की पैदावार में गुणवत्तापूर्ण सुधार आता है।

आवेदन प्रक्रिया और जानकारी

जिले के किसान जो अपनी फसलों को सुरक्षित और अधिक उत्पादक बनाना चाहते हैं, वे उद्यान विभाग के कार्यालय से संपर्क कर सकते हैं। स्थानीय जिला उद्यान पदाधिकारी ने स्पष्ट किया है कि विभाग का मुख्य उद्देश्य किसानों को आधुनिक तकनीकों से जोड़कर उनकी आय में वृद्धि करना है। इच्छुक किसान संबंधित कार्यालय में जाकर इस योजना से जुड़ने और अनुदान प्राप्त करने की पूरी प्रक्रिया की जानकारी ले सकते हैं।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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