धर्म
13 घंटे पहले
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विचारों
हिंदू धर्म में एकादशी तिथि का व्रत सबसे महत्वपूर्ण दिनों में गिना जाता है और भगवान विष्णु के सभी भक्त इसे श्रद्धापूर्वक मनाते हैं। यह व्रत हर महीने दो बार—कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष में—रखा जाता है। इस दिन भक्त सूर्योदय से लेकर अगले दिन द्वादशी तिथि तक उपवास रखते हैं और भगवान नारायण तथा माता लक्ष्मी की आराधना करते हैं। मान्यता है कि एकादशी का व्रत करने से सभी ग्रहों का शुभ फल मिलता है और हर कार्य में सफलता प्राप्त होती है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, एकादशी व्रत रखने से जीवन के सारे संकट दूर हो जाते हैं और वाजपेय यज्ञ के समान पुण्य फल की प्राप्ति होती है। शास्त्रों में कहा गया है कि यह व्रत करने वाला व्यक्ति जन्म-मरण के बंधन से मुक्त होकर बैकुंठ धाम को प्राप्त करता है। इस बार जून माह में दो एकादशी तिथि का व्रत किया जाएगा—परमा एकादशी और निर्जला एकादशी।
जून 2026 में एकादशी: तारीख और समय
परमा एकादशी 2026
- एकादशी तिथि प्रारंभ – 10 जून, मध्यरात्रि 12 बजकर 57 मिनट से
- एकादशी तिथि समाप्त – 11 जून, रात 10 बजकर 36 मिनट तक
- परमा एकादशी का व्रत – 11 जून 2026, दिन गुरुवार
- पारण का समय – 12 जून, सुबह 5 बजकर 23 मिनट से सुबह 8 बजकर 10 मिनट तक
निर्जला एकादशी 2026
- एकादशी तिथि प्रारंभ – 24 जून, शाम 6 बजकर 12 मिनट से
- एकादशी तिथि समापन – 25 जून, शाम 8 बजकर 9 मिनट तक
- निर्जला एकादशी का व्रत – 25 जून 2026, दिन गुरुवार
- पारण का समय – 26 जून, सुबह 5 बजकर 25 मिनट से 8 बजकर 13 मिनट तक
जून 2026 में एकादशी का महत्व
हिंदू धर्म में एकादशी तिथि का बहुत गहरा धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है। यह दिन पूरी तरह भगवान विष्णु की उपासना को समर्पित होता है, जब भक्त ब्रह्मांड के रक्षक के प्रति अपनी कृतज्ञता प्रकट करते हैं। धार्मिक और आध्यात्मिक कार्यों के लिए इसे सबसे पवित्र दिन माना जाता है।
मान्यता है कि जो लोग सच्ची श्रद्धा और पवित्रता के साथ एकादशी का व्रत रखते हैं, उन्हें मृत्यु के बाद मोक्ष की प्राप्ति होती है। यह व्रत मन, शरीर और आत्मा को शुद्ध करता है। यदि कोई इसे नियमित रूप से रखता है तो वह भगवान से दिव्य संबंध आसानी से स्थापित कर सकता है।
जून 2026 में एकादशी पूजा विधि
- ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें।
- घर और विशेष रूप से पूजा स्थान की सफाई करें।
- लकड़ी की चौकी पर भगवान विष्णु की मूर्ति और श्री यंत्र (मां लक्ष्मी का प्रतीक) स्थापित करें।
- मूर्ति के सामने देसी घी का दीपक प्रज्वलित करें।
- पवित्रता और श्रद्धा के साथ व्रत रखने का संकल्प लें।
- भगवान को तुलसी पत्र, फल और पंचामृत अर्पित करें।
- श्री कृष्ण महामंत्र का 108 बार जाप करें।
- शाम को फिर से भगवान की पूजा करें, एकादशी की कथा पढ़ें और भगवान विष्णु की आरती करें।
- एकादशी के दिन तुलसी पत्र न तोड़ें।
- इस दिन फल और दूध से बनी चीजें ली जा सकती हैं, लेकिन निर्जला एकादशी पर कुछ भी ग्रहण न करें।
- यदि स्वास्थ्य कारणों से निर्जला व्रत संभव न हो तो सामान्य व्रत रखा जा सकता है।
- व्रत का पारण अगले दिन द्वादशी तिथि पर निर्धारित पारण समय में किया जाता है।
एकादशी व्रत मंत्र 2026
- ॐ नमो भगवते वासुदेवाय।
- अच्युतम केशवम कृष्ण दामोदरम राम नारायणम जानकी वल्लभम।
- राम राम रामेति रमे रामे मनोरमे सहस्रनाम त्तुल्यं राम नाम वरानने।
- हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे, हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे।
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