जम्मू-कश्मीर में पंचायत और DDC चुनावों पर घमासान, नेशनल कॉन्फ्रेंस के रुख से बढ़ी राजनीतिक अनिश्चितता जम्मू-कश्मीर एक घंटा पहले 6
जम्मू-कश्मीर में पंचायत और जिला विकास परिषद (DDC) चुनावों के आयोजन को लेकर सरकार और चुनाव आयोग के बीच खींचतान बढ़ गई है, जहां नेशनल कॉन्फ्रेंस ने इसे राज्य के दर्जे से जोड़ दिया है।

चुनावों पर मंडराया अनिश्चितता का बादल

केंद्रशासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में पंचायत और जिला विकास परिषद (DDC) चुनाव अब एक बड़े राजनीतिक विवाद का केंद्र बन गए हैं। राज्य चुनाव आयोग ने इन चुनावों के आयोजन को लेकर एक स्पष्ट समय-सीमा निर्धारित की है, लेकिन राज्य की सत्ताधारी पार्टी नेशनल कॉन्फ्रेंस ने इस पर फिलहाल चुप्पी साध रखी है। पार्टी का कहना है कि वे इन चुनावों के संबंध में 'सही समय' पर अपनी आधिकारिक प्रतिक्रिया चुनाव आयोग को देंगे। इस स्थिति के चलते प्रदेश में चुनावी भविष्य को लेकर अटकलें और अनिश्चितता का माहौल गहरा गया है।

राज्य चुनाव आयोग की समय-सीमा

राज्य चुनाव आयोग (SEC) ने सरकार के समक्ष एक स्पष्ट संदेश रखा है। आयोग के अनुसार, यदि जम्मू-कश्मीर में इस वर्ष चुनाव कराना है, तो इस प्रक्रिया से जुड़ी सभी औपचारिकताओं को अगस्त 2026 के अंत तक पूरा करना अनिवार्य है। चुनाव आयोग का मानना है कि यदि इस महीने के भीतर फैसला ले लिया जाता है, तो ही चुनावी प्रक्रिया को गति देकर अक्टूबर-नवंबर 2026 में मतदान कराया जाना संभव हो पाएगा। यदि इसमें और अधिक देरी होती है, तो चुनाव मार्च-अप्रैल 2027 तक टलने की संभावना है। आयोग ने इसके पीछे एक प्रमुख कारण यह भी बताया है कि दिसंबर 2026 से प्रदेश में अत्यधिक बर्फबारी और कड़ाके की ठंड का मौसम शुरू हो जाता है, जिससे जमीनी स्तर पर चुनाव कराना बेहद चुनौतीपूर्ण और कठिन हो जाता है।

नेशनल कॉन्फ्रेंस का क्या है रुख

नेशनल कॉन्फ्रेंस के वरिष्ठ नेता और पार्टी प्रवक्ता तनवीर सादिक ने इस मुद्दे पर तल्ख तेवर अपनाए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि चुनावों के आयोजन का समय सीधे तौर पर जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने से जुड़ा हुआ है। तनवीर सादिक ने तंज कसते हुए कहा कि जैसे केंद्र सरकार उन्हें राज्य का दर्जा देने के लिए हमेशा 'सही समय' का इंतजार करने की बात कहती है, ठीक उसी तरह नेशनल कॉन्फ्रेंस भी चुनाव आयोग को जवाब देने के लिए सही समय का चुनाव करेगी। उन्होंने आगे कहा कि जम्मू-कश्मीर में वर्तमान में पूर्ण बहुमत वाली एक चुनी हुई सरकार है। सरकार की केंद्र के समक्ष कई ऐसी प्रमुख मांगें लंबित हैं जिन्हें पूरा नहीं किया गया है। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि जनता से यह वादा किया गया था कि पहले परिसीमन की प्रक्रिया पूरी होगी और उसके बाद राज्य का दर्जा बहाल किया जाएगा, जो अभी तक धरातल पर नहीं उतरा है। उन्होंने यह भी साफ किया कि उन्हें नहीं लगता कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) कभी जम्मू-कश्मीर में सत्ता में आ पाएगी। हाल ही में नेशनल कॉन्फ्रेंस ने दिल्ली में राज्य के दर्जे की मांग को लेकर एक बड़ा विरोध प्रदर्शन भी किया था।

स्थानीय संस्थाओं के खाली पद

जम्मू-कश्मीर में जमीनी स्तर पर लोकतांत्रिक ढांचे को लेकर स्थिति काफी चिंताजनक बनी हुई है क्योंकि कई संस्थाओं का कार्यकाल पहले ही समाप्त हो चुका है। इन चुनावों की महत्ता को इस बात से समझा जा सकता है कि इससे पहले पंचायती राज व्यवस्था के तीनों स्तरों पर पहली बार एक साथ संस्थाएं गठित की गई थीं। विभिन्न निकायों का कार्यकाल इस प्रकार समाप्त हुआ है:

  • पंचायतों का कार्यकाल 9 जनवरी 2024 को पूरा हो गया।
  • ब्लॉक विकास परिषदों (BDCs) का कार्यकाल भी समाप्त हो चुका है।
  • नगर निकायों का कार्यकाल अक्टूबर-नवंबर 2023 में ही समाप्त हो गया था।
  • DDC का पांच साल का कार्यकाल 24 फरवरी 2026 को समाप्त हो गया है।

इन संस्थाओं के रिक्त होने के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्य बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं, जिसके कारण चुनाव कराना स्थानीय लोगों के लिए एक बड़ी आवश्यकता बन गया है।

भाजपा का तीखा प्रहार

भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने नेशनल कॉन्फ्रेंस के रवैये की कड़ी आलोचना की है। वरिष्ठ भाजपा नेता अल्ताफ ठाकुर ने आरोप लगाया कि नेशनल कॉन्फ्रेंस महज राज्य के दर्जे का बहाना बनाकर प्रदेश के विकास को रोकने का काम कर रही है। उन्होंने तर्क दिया कि पंचायत राज संस्थाओं के न होने से ग्रामीण इलाकों में विकास कार्यों के लिए आने वाला फंड नहीं आ पा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में आम जनता को पानी, बिजली और अन्य बुनियादी सुविधाओं की तत्काल आवश्यकता है, जिसे चुनी हुई संस्थाओं के अभाव में पूरा करना कठिन हो रहा है। अल्ताफ ठाकुर ने कहा कि राज्य के दर्जे का मुद्दा विकास की राह में बाधा नहीं बनना चाहिए।

पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) की मांग

पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) ने भी नेशनल कॉन्फ्रेंस सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं। PDP नेता गुलाम नबी हंजूरा का कहना है कि किसी भी स्वस्थ लोकतंत्र के संचालन के लिए पंचायत चुनाव अनिवार्य हैं। उन्होंने निराशा व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य चुनाव आयोग द्वारा बार-बार संकेत दिए जाने के बावजूद सरकार ने अभी तक कोई ठोस फैसला नहीं लिया है। गुलाम नबी हंजूरा ने यह भी पूछा कि आखिर वह 'सही समय' कब आएगा जिसका जिक्र मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला बार-बार कर रहे हैं। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि वे चाहते हैं कि ये चुनाव जल्द से जल्द आयोजित हों ताकि प्रदेश में जमीनी स्तर पर लोकतंत्र फिर से बहाल हो सके।

भविष्य की चुनौतियां

राज्य चुनाव आयोग द्वारा तय की गई अगस्त की समय-सीमा अब तेजी से समाप्त हो रही है। सरकार के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वह क्या फैसला लेती है। यह निर्णय तय करेगा कि जम्मू-कश्मीर में लंबे समय से प्रतीक्षित पंचायत और DDC चुनाव इस सर्दी से पहले आयोजित होंगे या फिर उन्हें अगले वर्ष तक के लिए टाल दिया जाएगा। वर्तमान राजनीतिक गतिरोध ने इस पूरे मामले में अनिश्चितता की परतें और बढ़ा दी हैं, जिससे आम जनता और राजनीतिक विश्लेषक दोनों ही भविष्य की दिशा को लेकर चिंतित हैं।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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