राष्ट्रीय राजनीति
2 घंटे पहले
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मुंबई हमलों के मास्टरमाइंड और लश्कर-ए-तैयबा के प्रमुख हाफिज सईद के खिलाफ अब भारत की अदालत में शिकंजा कसना शुरू हो गया है। पाकिस्तान की सरपरस्ती में सुरक्षित बैठे इन आतंकवादियों पर अब भारतीय कानून का शिकंजा कसने वाला है। भारत के इतिहास में पहली बार मुंबई आतंकी हमलों के गुनहगार हाफिज सईद और जकी-उर-रहमान लखवी सहित कुल छह पाकिस्तानी आतंकवादियों पर उनकी अनुपस्थिति में मुकदमा चलाया जा रहा है। विशेष अदालत ने इन सभी आरोपियों को अदालत के समक्ष पेश होने के लिए 18 अगस्त की अंतिम तिथि निर्धारित की है।
नए कानून के तहत शुरू हुई ऐतिहासिक कानूनी प्रक्रिया
इस ऐतिहासिक कानूनी कार्रवाई की सबसे विशेष बात यह है कि यह देश में पहली बार नए कानून भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) के प्रावधानों के तहत चलाई जा रही है। BNSS 2023 के लागू होने के बाद आतंकवाद के किसी बड़े और संवेदनशील मामले में यह पहला ऐसा मुकदमा है, जो आरोपियों की गैर-मौजूदगी में चलाया जा रहा है। पहले के कानूनों में फरार अपराधियों पर उनकी अनुपस्थिति में मुकदमा चलाने को लेकर कई तरह की सीमाएं थीं, लेकिन नए कानून ने इसे और अधिक प्रभावी बना दिया है।
विशेष लोक अभियोजक उज्ज्वल निकम ने इस संदर्भ में महत्वपूर्ण जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि इस मुकदमे को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 356 के तहत चलाया जा रहा है। इस विशेष धारा के अनुसार, यदि कोई आरोपी फरार है और जांच एजेंसियों की पहुंच से बाहर है, तो न्याय प्रक्रिया में अनावश्यक देरी को रोकने के लिए उसकी अनुपस्थिति में भी सुनवाई पूरी की जा सकती है और अदालत उसे दोषी करार देते हुए सजा सुना सकती है।
मुकदमे के दायरे में आए ये छह पाकिस्तानी आतंकी
मुंबई की विशेष अदालत ने जिन आतंकवादियों के खिलाफ यह सुनवाई शुरू की है और जिनके विरुद्ध उद्घोषणा जारी की है, उनमें लश्कर-ए-तैयबा के शीर्ष नेतृत्व से लेकर हमले की साजिश रचने वाले कई बड़े नाम शामिल हैं। इन छह मुख्य आरोपियों की सूची इस प्रकार है:
- हाफिज सईद: मुंबई आतंकी हमलों का मुख्य साजिशकर्ता और लश्कर-ए-तैयबा का संस्थापक।
- जकी-उर-रहमान लखवी: लश्कर का कमांडर, जिसने इस पूरे हमले का संचालन किया और आतंकियों को दिशा-निर्देश दिए।
- साजिद मीर: हमलों की साजिश रचने और पाकिस्तान से आतंकियों को निर्देश देने वाला मुख्य हैंडलर।
- अबू अलकामा: आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने और आतंकियों को प्रशिक्षण देने में शामिल रहा आरोपी।
- असीम उर्फ अबू कहफा: मुंबई हमलों के दौरान कराची के कंट्रोल रूम से सक्रिय रहकर आतंकियों को निर्देश देने वाला आरोपी।
- मेजर अब्दुर रहमान पाशा: पाकिस्तानी सेना का पूर्व अधिकारी जो आतंकियों के साथ मिलकर इस साजिश में शामिल था।
मुंबई के पुलिस आयुक्त की विशेष पहल
इस पूरी कानूनी प्रक्रिया को शुरू करने में मुंबई के पुलिस आयुक्त देवेन भारती ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने विशेष लोक अभियोजक उज्ज्वल निकम को एक पत्र लिखकर इन सभी फरार आरोपियों के खिलाफ उनकी गैर-मौजूदगी में मुकदमा चलाने का औपचारिक अनुरोध किया था।
पुलिस आयुक्त देवेन भारती ने अपने पत्र में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया था कि मुंबई में हुआ 26/11 का आतंकी हमला एक अत्यंत संवेदनशील और देश की संप्रभुता से जुड़ा मामला है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारतीय सुरक्षा और जांच एजेंसियों के पास इन फरार आतंकवादियों के खिलाफ पर्याप्त और अत्यंत पुख्ता सबूत मौजूद हैं। ये लोग भारत के इतिहास के सबसे वीभत्स और जघन्य अपराधों में से एक के मुख्य आरोपी हैं। इसलिए, इन्हें देश के कानून के अनुसार सजा मिलना अत्यंत आवश्यक है। इसी कारण से उन्होंने BNSS की धारा 356 का उपयोग करते हुए जल्द से जल्द इस मुकदमे को गति देने का आग्रह किया था ताकि न्याय में कोई देरी न हो।
अजमल कसाब के बयानों से खुला था साजिश का राज
विशेष लोक अभियोजक उज्ज्वल निकम ने इस मुकदमे के बारे में विस्तार से बताते हुए कहा कि उन्होंने विशेष अदालत में एक याचिका दायर की है। इस याचिका में यह स्पष्ट किया गया है कि ये सभी छह आरोपी मुंबई के आतंकी हमले में सीधे तौर पर वांछित हैं। एकमात्र जीवित पकड़े गए आतंकी अजमल कसाब ने गहन पूछताछ के दौरान इन सभी के नामों का खुलासा किया था। कसाब ने जांच अधिकारियों को बताया था कि इस पूरे हमले की योजना बनाने, प्रशिक्षण देने और उसे मुंबई की धरती पर क्रियान्वित करने में इन सभी आरोपियों की क्या भूमिका थी।
निकम ने यह भी जानकारी दी कि उन्होंने इन फरार आरोपियों के खिलाफ इंटरपोल के माध्यम से भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर घोषणा जारी करने के लिए अदालत में आवेदन किया है। विशेष अदालत ने इन सभी छह पाकिस्तानी आरोपियों के खिलाफ आधिकारिक घोषणा पत्र जारी कर दिया है। इसके तहत उन्हें अदालत के समक्ष उपस्थित होने के लिए 18 अगस्त तक का समय दिया गया है। यदि वे इस तिथि तक भारत की अदालत में उपस्थित नहीं होते हैं, तो कानून के तहत उनकी गैर-मौजूदगी में ही मुकदमा आगे बढ़ाया जाएगा और अदालत उन्हें सजा सुनाएगी।
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