'वंदे मातरम' के गायन पर बीजेपी और कांग्रेस में छिड़ी जंग, मल्लिकार्जुन खरगे का पलटवार- हमें देशभक्ति मत सिखाएं भारत 2 घंटे पहले 10
राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' के गायन को लेकर कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के बीच राजनीतिक तकरार तेज हो गई है, जिसमें मल्लिकार्जुन खरगे ने बीजेपी को आड़े हाथों लिया है।

राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' के गायन को लेकर कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के बीच शुरू हुआ राजनीतिक घमासान अब और भी तेज हो गया है। इस पूरे विवाद के बीच कांग्रेस पार्टी ने एक बड़ा फैसला लिया है। पार्टी के नए फैसले के अनुसार, अब कांग्रेस के संगठनात्मक कार्यक्रमों में इस गीत के कुल 6 अंतरा (स्टैंजा) में से केवल 2 ही गाए जाएंगे। हालांकि, जिन राज्यों में कांग्रेस की सरकार है, वहां के सरकारी कार्यक्रमों में पूरे 6 अंतरा का गायन किया जाएगा। इस फैसले के बाद से ही दोनों प्रमुख राजनीतिक दल एक-दूसरे के आमने-सामने आ गए हैं।

गोवा के कांग्रेस कार्यक्रम में मचा बवाल

इस विवाद को हवा तब मिली जब हाल ही में स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर कांग्रेस मुख्यालय में राष्ट्रीय गीत के कथित अपमान के आरोप लगे। इसके ठीक बाद गोवा कांग्रेस के एक कार्यक्रम में भी इसी तरह का विवाद खड़ा हो गया। इस कार्यक्रम में खुद कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे मौजूद थे। आरोप है कि उनके सामने ही वंदे मातरम के 6 अंतरा में से केवल 2 अंतरा का ही गायन किया गया, जिसे लेकर विरोधी दल हमलावर हो गए हैं।

बीजेपी का तीखा हमला, कहा- माफी मांगे कांग्रेस

कांग्रेस के इस रुख पर भारतीय जनता पार्टी ने बेहद कड़ा ऐतराज जताया है। बीजेपी के वरिष्ठ नेता और सांसद रविशंकर प्रसाद ने कांग्रेस पर सीधा निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जो पार्टी खुद को देश के स्वतंत्रता संग्राम का नेतृत्व करने वाली बताती है, उसका आज का शीर्ष नेतृत्व राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम का इस तरह तिरस्कार कर रहा है। रविशंकर प्रसाद ने इसे एक अत्यंत घृणित कृत्य करार दिया और कहा कि कांग्रेस पार्टी को इसके लिए बिना किसी बहानेबाजी के देश से तुरंत माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस तरह के कृत्य का कोई भी तर्क स्वीकार्य नहीं हो सकता।

खरगे का अमित शाह पर करारा पलटवार

इससे पहले, 15 अगस्त के मौके पर दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में राष्ट्रीय गीत के गायन के दौरान एक और विवाद सामने आया था। जब कार्यक्रम में वंदे मातरम का पूरा गायन चल रहा था, तब सोनिया गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे कथित तौर पर हाथ के इशारे से उसे रोकने का संकेत करते दिखे थे। बीजेपी ने इस वीडियो को मुद्दा बनाते हुए इसे राष्ट्रीय गीत का घोर अपमान बताया था।

इस पर देश के केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस और सोनिया गांधी से देश की जनता के सामने माफी मांगने की मांग की थी। गृह मंत्री के इसी बयान पर पलटवार करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने बीजेपी को तीखा जवाब दिया। खरगे ने कहा, "जब मैं देश में पहली बार विधायक चुना गया था, तब अमित शाह राजनीति में बच्चे थे। आज वे लोग हमें देशभक्ति सिखाने की कोशिश कर रहे हैं।" खरगे ने आगे हमला बोलते हुए कहा कि बीजेपी के पुरखों ने कभी देश की आजादी की लड़ाई में हिस्सा नहीं लिया, इसलिए उन्हें कांग्रेस को राष्ट्रवाद और देशभक्ति का पाठ पढ़ाने की कोई जरूरत नहीं है।

बंकिम चंद्र चटर्जी के वंशज ने सोनिया गांधी को लिखा पत्र

इस पूरे विवाद पर वंदे मातरम के मूल रचयिता बंकिम चंद्र चटर्जी के वंशज सुमित्रो चटर्जी ने गहरी चिंता और दुख व्यक्त किया है। उन्होंने कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी को एक पत्र लिखकर अपना दर्द बयां किया। सुमित्रो चटर्जी ने लिखा, "15 अगस्त 2026 को भारत की स्वतंत्रता की 80वीं वर्षगांठ की पावन सुबह पर, जब पूरा देश अपनी मातृभूमि को नमन कर रहा था, तब ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी के मुख्यालय में जो कुछ भी हुआ, वह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। यह एक ऐतिहासिक भूल को बेहद बेशर्मी के साथ दोहराने जैसा है। जब कांग्रेस के कार्यकर्ता युगऋषि बंकिम चंद्र चटर्जी की इस अमर कृति का पूरा संस्करण गा रहे थे, तब उन्हें बार-बार रोकने की कोशिशों और वहां पैदा हुई असहजता ने मुझे बहुत आहत किया है।"

लाल किले पर रचा गया इतिहास

दिलचस्प बात यह है कि शनिवार को दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किले पर आयोजित स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान पहली बार वंदे मातरम का पूरा संस्करण बजाया गया। यह देश के आधिकारिक राष्ट्रीय आयोजनों के इतिहास में एक बेहद महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक क्षण था। समारोह की शुरुआत में पहले राष्ट्रीय गीत का गायन किया गया और उसके तुरंत बाद राष्ट्रगान बजाया गया। इस ऐतिहासिक शुरुआत के बाद देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से राष्ट्र को संबोधित किया था।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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