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एक घंटा पहले
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उत्तराखंड के चमोली जिले में मौसम का मिजाज लगातार बिगड़ा हुआ है। भारी बारिश के कारण पर्वतीय क्षेत्रों में जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। इसी बीच, जोशीमठ क्षेत्र से एक बड़ी खबर सामने आ रही है, जहां पंच केदारों में पांचवें केदार के रूप में पूजनीय प्रसिद्ध कल्पेश्वर महादेव मंदिर के ठीक ऊपर भीषण भूस्खलन हुआ है। पहाड़ी दरकने के कारण मंदिर परिसर में भारी मात्रा में मलबा और बड़े-बड़े बोल्डर जमा हो गए हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में भारी नुकसान की आशंका जताई जा रही है।
कल्पेश्वर महादेव मंदिर परिसर में मलबे का ढेर
मिली जानकारी के अनुसार, देर रात चमोली जिले में मूसलाधार बारिश हुई। इस तेज बारिश के दौरान कल्पेश्वर महादेव मंदिर के ऊपर स्थित पहाड़ी का एक बड़ा हिस्सा अचानक भरभराकर नीचे गिर गया। भूस्खलन की इस भयानक घटना से मंदिर के आसपास के इलाके में भारी नुकसान हुआ है। पहाड़ी से टूटकर गिरे बड़े-बड़े पत्थर और भारी मात्रा में कीचड़ सीधे मंदिर परिसर में आ घुसे।
सुबह होते ही जब स्थानीय निवासियों को इस हादसे की जानकारी मिली, तो वे तुरंत घटनास्थल पर एकत्रित हो गए। स्थानीय लोगों ने अपनी सुरक्षा की परवाह न करते हुए खुद ही मंदिर परिसर में जमा मलबे को हटाने का काम शुरू कर दिया है, ताकि स्थिति को जल्द से जल्द सामान्य किया जा सके। लगातार हो रही बारिश के कारण चमोली जिले के पहाड़ी इलाकों में लैंडस्लाइड की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं, जिससे कल्पेश्वर महादेव मंदिर के पुजारियों, स्थानीय निवासियों और वहां आने वाले श्रद्धालुओं में गहरी चिंता और डर का माहौल बना हुआ है। ग्रामीणों ने शासन और प्रशासन से मांग की है कि मंदिर परिसर और उसके ऊपर की संवेदनशील पहाड़ी का तुरंत भूवैज्ञानिक निरीक्षण कराया जाए और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाएं।
चमोली टनल हादसे में 8 मजदूरों की मौत
चमोली जिला पिछले कुछ दिनों से लगातार प्राकृतिक आपदाओं की मार झेल रहा है। इससे पहले, बीते गुरुवार को भी जिले में एक बेहद दर्दनाक हादसा हुआ था। यहां एक निर्माणाधीन पनबिजली परियोजना की सुरंग के भीतर अचानक हुए भीषण भूस्खलन के कारण भारी मात्रा में पानी और मलबा घुस गया था। इस अप्रत्याशित हादसे में 8 श्रमिकों की असमय मौत हो गई थी। हादसे के बाद वहां हड़कंप मच गया था और बड़े पैमाने पर राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया गया था।
सुरंग में फंसे लोगों को बाहर निकालने के लिए सेना, NDRF (K9 यूनिट के साथ), SDRF, CISF, ITBP और स्थानीय पुलिस के 200 से अधिक जवानों को तैनात किया गया था। इन सभी बचाव दलों ने मिलकर अत्यंत कठिन परिस्थितियों में संयुक्त रूप से राहत कार्य चलाया और कई श्रमिकों की जान बचाने में सफलता हासिल की थी।
लापता श्रमिकों के लिए मंगलवार को भी जारी रहा अभियान
इस टनल हादसे में लापता हुए 2 अन्य श्रमिकों की खोजबीन के लिए चलाया जा रहा राहत और बचाव कार्य मंगलवार को भी जारी रहा। एसडीआरएफ की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, सुरंग के अंदर भारी मात्रा में दलदल और कीचड़ जमा होने के कारण बचाव दल को कदम-कदम पर भारी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। इसके बावजूद, सभी राहत एजेंसियां आपसी तालमेल और बेहतर समन्वय के साथ खोजबीन अभियान को आगे बढ़ा रही हैं।
सुरंग के भीतर जमा पानी को पंपों के जरिए लगातार बाहर निकाला जा रहा है। इसके साथ ही, सुरक्षा के सभी मानकों को ध्यान में रखते हुए अत्याधुनिक उपकरणों और उपलब्ध संसाधनों के सहारे हर संभावित कोने की बारीकी से जांच की जा रही है। राहत की बात यह है कि मलबे के साथ सुरंग के भीतर फंसी कुल 5 जेसीबी मशीनों में से अब तक 3 मशीनों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है। इन भारी मशीनों के हटने से लापता श्रमिकों की तलाश के काम में काफी तेजी आई है और बचाव दल लगातार आगे बढ़ रहे हैं।
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