कानून के उल्लंघन पर फेसबुक को नहीं मिलेगी 'सेफ हार्बर' की सुरक्षा, सरकार ने मेटा को दी सख्त चेतावनी राष्ट्रीय राजनीति 2 घंटे पहले 11
बाल यौन शोषण सामग्री के मुद्दे पर सरकार और मेटा के बीच अहम बैठक हुई है, जिसमें सरकार ने दोटूक शब्दों में कहा है कि नियमों का पालन न करने पर फेसबुक अपनी कानूनी सुरक्षा खो सकता है।

केंद्र सरकार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक की पैरेंट कंपनी मेटा को सख्त हिदायत दी है। बाल यौन शोषण सामग्री (CSAM) के संवेदनशील मुद्दे पर की गई कार्रवाई के बीच, सरकार ने साफ कर दिया है कि अगर देश के कानून का उल्लंघन होता है, तो फेसबुक को मिलने वाला ‘सेफ हार्बर’ यानी कानूनी संरक्षण का अधिकार वापस ले लिया जाएगा। IT मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, सरकार देश में संचालित होने वाले सभी डिजिटल मंचों पर सुरक्षा और कानून व्यवस्था को सर्वोपरि मानती है।

सेंसरशिप नहीं, बल्कि नियमों का पालन है प्राथमिकता

IT मंत्रालय के उच्च पदस्थ सूत्रों ने स्पष्ट किया है कि सरकार का उद्देश्य किसी भी प्रकार की ‘सेंसरशिप’ लागू करना या अभिव्यक्ति की आजादी को रोकना नहीं है। सरकार की असली प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म भारतीय कानूनों और नियामक ढांचों का पूरी तरह से पालन करें। इसके अतिरिक्त, इस कदम का मुख्य उद्देश्य सोशल मीडिया के माध्यम से होने वाले विभिन्न नुकसानों को कम करना और उपयोगकर्ताओं के लिए इंटरनेट को सुरक्षित बनाना है। सरकार का मानना है कि कोई भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म देश के स्थापित कानून से ऊपर नहीं हो सकता है।

मेटा ने दी अपने एल्गोरिदम पर सफाई

इस पूरे घटनाक्रम और चेतावनी के बीच मेटा और सरकार के बीच गहन चर्चा का दौर जारी है। IT मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, मेटा ने सरकार के सामने यह स्पष्ट करना शुरू कर दिया है कि उसके विभिन्न ‘एल्गोरिदम’ और आंतरिक प्रणालियां किस प्रकार काम करती हैं। इस बातचीत के दौरान मुख्य रूप से इस बात पर चर्चा हो रही है कि विभिन्न प्रकार की सामग्रियों और उपयोगकर्ताओं के खातों से जुड़े निर्णय लेने की प्रक्रिया क्या है। सरकार और कंपनी के बीच इन सभी नीतिगत मामलों और निर्णय प्रक्रिया पर विचार-विमर्श अभी भी जारी है।

व्हाट्सऐप यूजरनेम विवाद की भी हो रही जांच

इस बैठक और चर्चा के दौरान ‘व्हाट्सऐप यूजरनेम’ से जुड़े विवाद पर भी बातचीत हुई। IT मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि व्हाट्सऐप के यूजरनेम से जुड़ा मामला बेहद गंभीर है और इसकी गहन जांच की जा रही है। चूंकि यह मामला केवल व्हाट्सऐप तक ही सीमित नहीं है और अन्य मैसेजिंग ऐप्स से भी जुड़ा हुआ है, इसलिए सरकार इस पर बेहद सतर्कता बरत रही है। सरकार का मुख्य ध्यान इस बात पर है कि किसी भी मैसेजिंग ऐप का इस्तेमाल गलत गतिविधियों को बढ़ावा देने या सुरक्षा मानकों के उल्लंघन के लिए न किया जा सके।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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