जम्मू-कश्मीर में ISI की नई चाल बेनकाब, OGWs को राजनीतिक दलों में घुसपैठ कराने की रणनीति जम्मू-कश्मीर 3 महीने पहले 39
खुफिया जांच में सामने आया है कि पाकिस्तानी एजेंसी ISI जम्मू-कश्मीर के ओवर ग्राउंड वर्कर्स को मुख्यधारा की राजनीतिक पार्टियों में शामिल होने का निर्देश दे रही है, जिससे राजनीतिक हलकों में हलचल मच गई है।

पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (ISI) जम्मू-कश्मीर में एक नई और खतरनाक चाल चल रही है। मिली जानकारी के अनुसार, एजेंसी घाटी में सक्रिय 'ओवर ग्राउंड वर्कर्स' (OGWs) को निर्देश दे रही है कि वे मुख्यधारा की वैध राजनीतिक पार्टियों का हिस्सा बन जाएं। इसके पीछे पाकिस्तान का असल मकसद जम्मू-कश्मीर में अपने जमीनी नेटवर्क को और मजबूत बनाना बताया जा रहा है। इस खुलासे के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है।

आखिर क्या है ISI का असली मकसद?

इस साजिश की परतें तब खुलीं जब जम्मू-कश्मीर पुलिस ने बीते दिनों पकड़े गए कुछ ओवरग्राउंड वर्कर्स से पूछताछ की। जांच के दौरान पता चला कि ISI अपने समर्थकों को राजनीतिक दलों में शामिल होने के लिए उकसा रही है, ताकि वे एक वैध राजनीतिक कार्यकर्ता की पहचान का फायदा उठा सकें।

सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि इसका मकसद राजनीति की आड़ लेकर आतंकवादी गतिविधियों को बढ़ावा देना और जांच एजेंसियों की निगाहों से बचे रहना है। इस रणनीति के जरिए लॉजिस्टिकल ऑपरेटरों को सुरक्षा बलों की कार्रवाई से बचाने और 'कॉर्डन एंड सर्च' ऑपरेशन के दौरान उन्हें राजनीतिक संरक्षण उपलब्ध कराने की कोशिश की जा रही है।

राजनीतिक दलों में भी बेचैनी

पाकिस्तान की इस नई साजिश को लेकर जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक दल भी चिंतित नजर आ रहे हैं। हालांकि नेशनल कॉन्फ्रेंस के वरिष्ठ नेता और संसद सदस्य चौधरी रमजान ने इसे एक अलग नजरिए से देखा।

ये एक अच्छी बात है। अगर पाकिस्तान को इस बात का एहसास हो गया कि हजारों लोगों को मारकर वह कुछ हासिल नहीं कर सका और अब मुख्यधारा में शामिल होने की बात कर रहा है, तो हम इस फैसले का स्वागत करते हैं।

चौधरी रमजान ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान ने नेशनल कॉन्फ्रेंस के 3 हजार से ज्यादा कार्यकर्ताओं और नेताओं को मौत के घाट उतारा है। उन्होंने यह भी कहा कि इन लोगों के खिलाफ कई मामले दर्ज हैं और सुरक्षा एजेंसियों को इस ओर ध्यान देना चाहिए ताकि वे राहत की सांस ले सकें।

'चिंता का विषय' — भाजपा नेता

भाजपा और अपनी पार्टी के नेताओं ने इसे पाकिस्तान की एक बड़ी साजिश करार दिया है। भाजपा नेता अल्ताफ ठाकुर ने कहा कि यह बेहद चिंताजनक और खतरनाक मुद्दा है, क्योंकि सुरक्षा एजेंसियों ने आतंकवाद पर कड़ी नकेल कस दी है। उन्होंने आरोप लगाया कि अब ISI ओवर ग्राउंड वर्कर्स को मुख्यधारा में शामिल कराकर अपने नेटवर्क को मजबूत करना और कश्मीर में लौटी शांति को दोबारा भंग करना चाहती है।

'कश्मीरियों का होता रहा इस्तेमाल' — मुंतजिर मोहिउद्दीन

वहीं अपनी पार्टी के नेता मुंतजिर मोहिउद्दीन ने इस घटनाक्रम पर गहरी नाराजगी जताई।

ये कोई अच्छी खबर नहीं है। बाहर की एजेंसियों ने हमेशा कश्मीरियों का इस्तेमाल किया है। आज अमन है, लोग राहत की सांस लेकर जी रहे हैं। ऐसे समय में पाकिस्तान की ओर से ऐसी खबर आना साफ इशारा करता है कि वे हमें जीने नहीं देंगे। हम हिंदुस्तान का हिस्सा हैं और जो साजिश शुरू हो रही है, वह इस शांति को फिर से तबाह करना चाहती है।

अलर्ट मोड में सुरक्षा एजेंसियां

इन सबके बीच सुरक्षा एजेंसियां अब उन आतंकी संगठनों के नाम दोबारा उभरने पर पैनी नजर रख रही हैं, जिन्होंने 1990 के दशक और 2000 के शुरुआती वर्षों में जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के शुरुआती और खूनी दौर को परिभाषित किया था। इनमें अल-उमर मुजाहिदीन, अल-बद्र और तहरीक-उल-मुजाहिदीन जैसे संगठन शामिल हैं।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

आपकी प्रतिक्रिया?

Comments

https://pabna.in/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!

फेसबुक वार्तालाप