जयपुर की निराली विरासत: जहां शाही श्मशान भी बना पर्यटन का केंद्र, हर साल पहुंचते हैं हजारों सैलानी राजस्थान एक महीने पहले 18
जयपुर की गेटोर की छतरियां कछवाहा राजवंश के राजा-रानियों की स्मृति में बने भव्य स्मारक हैं, जो अपनी कलात्मक नक्काशी और स्थापत्य सौंदर्य के कारण पर्यटकों को आकर्षित करते हैं।

जयपुर को दुनियाभर में उसकी आलीशान हवेलियों, मजबूत किलों और शानदार महलों के लिए पहचाना जाता है। मगर इस शहर में एक ऐसा स्थान भी है जो आम तौर पर शोक से जुड़ा माना जाता है, फिर भी सैलानियों की भीड़ खींच लाता है। यह है यहां का शाही श्मशान घाट, जो आज पर्यटन के बड़े केंद्रों में शुमार हो चुका है।

क्या है गेटोर की छतरियां

गेटोर की छतरियां दरअसल कछवाहा राजवंश के राजा-महाराजाओं और रानियों की याद में बनाए गए भव्य स्मारक हैं। इन्हें इस राजघराने के गौरवपूर्ण अतीत की निशानी के रूप में देखा जाता है। यहां की हर छतरी अपने आप में बीते दौर की कहानी कहती नजर आती है।

अरावली की गोद में बसा शांत स्थल

अरावली पर्वतमाला की पहाड़ियों के बीच बसा यह स्थान अपनी महीन नक्काशी के लिए मशहूर है। यहां राजपूत और मुगल स्थापत्य शैली का बेहद खूबसूरत संगम देखने को मिलता है। शांत और सुकून भरा वातावरण इस जगह को और भी खास बना देता है।

संगमरमर और बलुआ पत्थर की कारीगरी

यहां संगमरमर और बलुआ पत्थर से तराशी गई कलात्मक छतरियां राजघराने के वैभवशाली इतिहास की झलक पेश करती हैं। बारीक कारीगरी और कलाकृतियां देखने वालों को अतीत के उस दौर में ले जाती हैं, जब इन्हें बनवाया गया था।

पर्यटकों के लिए आकर्षण

यहां आने वाले लोग केवल वास्तुकला की सुंदरता को निहारने ही नहीं पहुंचते, बल्कि इस ऐतिहासिक धरोहर की भव्यता का अनुभव करने भी आते हैं। यही वजह है कि यह स्थल आज जयपुर की एक अनूठी विरासत के रूप में अपनी अलग पहचान बना चुका है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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