उपनाम: भूजल स्तर
बिहार में घर घर शुद्ध पानी का संकल्प, पीएचईडी मंत्री संजय सिंह ने साझा की विभाग की बड़ी योजनाएं
बिहार सरकार के 100 दिन पूरे होने पर पीएचईडी मंत्री संजय सिंह ने राज्य में स्वच्छ पेयजल व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी दी। उन्होंने जल्द ही पानी की शिकायतों के निवारण की समय सीमा को 48 घंटे से घटाकर 24 घंटे करने का लक्ष्य रखा है।
सिर्फ 2 हजार रुपये में सूखा बोरवेल हुआ रिचार्ज, छत्तीसगढ़ के किसान का यह देसी जुगाड़ बन रहा है मिसाल
छत्तीसगढ़ के एक युवा किसान ने बेहद कम लागत में वर्षा जल संचयन और बोरवेल रिचार्ज की तकनीक अपनाकर गिरते भूजल स्तर की समस्या का समाधान निकाला है। इस अनोखे और सस्ते प्रयोग से सूखे पड़े बोरवेल भी अब लंबे समय तक पानी दे रहे हैं।
फरीदाबाद के किसानों के सामने पानी का गंभीर संकट, जानिए क्यों यहां नाकाम साबित हो रहा है पंजाब का 'तालाब मॉडल'
फरीदाबाद के सुनपेड़ गांव में गिरते भूजल और बिजली-पानी की किल्लत से खेती संकट में है, जहां जमीन की कमी के कारण छोटे किसानों के लिए पंजाब की तर्ज पर तालाब बनाना मुमकिन नहीं है।
गरियाबंद के टाइगर रिजर्व में 15 साल में कटे करीब 11 लाख पेड़, इसरो की सैटेलाइट तस्वीरों से खुला राज
छत्तीसगढ़ के उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में बीते 15 साल के दौरान अतिक्रमण के लिए करीब 11 लाख पेड़ काटे जाने का खुलासा इसरो के सैटेलाइट डेटा और ड्रोन सर्वे से हुआ है। वन विभाग ने अब तक 166 अतिक्रमणकारियों की पहचान कर नोटिस जारी किया है।
बारिश का पानी बना किसानों का सहारा! अजमेर के गांवों में बदला जल का परिदृश्य, केंद्रीय योजना से मिली राहत
प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत अजमेर जिले के गांवों में करोड़ों रुपए की लागत से जल संरक्षण और सिंचाई के कार्य हुए हैं, जिससे भूजल स्तर सुधरा और किसानों को सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध हो रहा है।
जल संकट से जूझते गांवों में लौटी खुशहाली, श्रमदान से पुनर्जीवित हुए तालाब भरे पानी से
जयपुर ग्रामीण के कई गांव सामूहिक श्रमदान से जल संरक्षण की मिसाल बन गए हैं। देवला ग्राम पंचायत क्षेत्र में बने तीन बड़े तालाबों से भूजल स्तर करीब 25 फीट तक बढ़ने का दावा किया गया है।
सिंचाई की दिक्कत से जूझ रहे हैं? इन दो आसान तरीकों से बचेगा पानी और घटेगी लागत
गोरखपुर और आसपास के इलाकों में किसानों के लिए जल संकट बड़ी मुसीबत बन गया है। कृषि विशेषज्ञ का कहना है कि ड्राई लैंड एग्रीकल्चर और कुछ खास उपायों से पानी की बचत संभव है।
बांज का पेड़: पहाड़ों का 'जल प्रहरी', जहां ये मौजूद वहां नहीं रहती पानी की किल्लत
उत्तराखंड के पहाड़ों में बांज का पेड़ जल संरक्षण और पर्यावरण की रक्षा का सबसे बड़ा माध्यम माना जाता है। इसकी गहरी जड़ें भूजल को बनाए रखती हैं, जिससे नौले, धारे और गधेरे आज भी जीवित हैं।