किसान ध्यान दें: प्री-मानसून की बौछारों में जल्दबाजी न करें, जानिए बुवाई का सही समय मध्य प्रदेश 46 मिनट पहले 2
जून की शुरुआत के साथ ही प्री-मानसून की हलचल तेज हो गई है, लेकिन कृषि विशेषज्ञों की सलाह है कि मानसून के पूरी तरह सक्रिय हुए बिना बुवाई करना नुकसानदेह हो सकता है। जानिए खेतों की तैयारी और बीज बोने का उपयुक्त समय।

जून का महीना शुरू होते ही मानसून के मौसम की आहट सुनाई देने लगी है और इसकी हल्की-फुल्की गतिविधियां दिखने भी लगी हैं। आने वाले दिनों में प्री-मानसून सक्रिय हो जाएगा, जिसके चलते तेज आंधी-तूफान के साथ बारिश और बिजली गिरने जैसी घटनाएं सामने आने लगेंगी। वहीं 20 जून के बाद मानसून भी 10 तक दस्तक दे देगा। लेकिन मानसून सिर्फ आंधी, बारिश और हरियाली ही नहीं लाता, बल्कि किसानों के लिए नई उम्मीद और खुशहाली भी साथ लेकर आता है।

मानसून को ध्यान में रखते हुए किसान अपने खेती-बाड़ी के काम की तैयारियां शुरू कर देते हैं और उन्हें अच्छी बारिश का बेसब्री से इंतजार रहता है। अधिकांश इलाकों में जून महीने के तीसरे और चौथे हफ्ते से ही बुआई का सिलसिला शुरू हो जाता है।

मौसम विभाग का अनुमान

मौसम विभाग से मिली जानकारी के अनुसार सागर समेत बुंदेलखंड में 5-7 जून से प्री-मानसून की अच्छी बारिश देखने को मिल सकती है। हालांकि शुरुआती 10-12 दिनों तक गर्मी और उमस अपने तेवर दिखाती रहेगी। महीने के मध्य से फुहारें इस गर्मी से राहत देंगी। सागर में मानसून आने की औसत तारीख 21 जून है, जो दो-चार दिन आगे-पीछे भी हो सकती है।

प्री-मानसून में बुवाई करें या नहीं

कृषि अधिकारियों का कहना है कि जब तक मिट्टी में कम से कम 3 इंच तक नमी न आ जाए, तब तक बुवाई न करें। हालांकि किसान बुवाई के लिए खाद और बीज पहले से खरीदकर रख लें। खेतों की अच्छी तरह तैयारी कर लें और जुताई पूरी कर लें, ताकि अच्छी बारिश होते ही खाद-बीज खरीदने के लिए इधर-उधर भटकना न पड़े।

विशेषज्ञों के अनुसार प्री-मानसून की बारिश के बाद बुवाई करने से बचें और तब तक रुकें जब तक मानसून पूरी तरह दस्तक न दे दे। कई बार मानसून लेट हो जाता है, जिससे बीजों का अंकुरण नहीं हो पाता और किसानों को नुकसान उठाना पड़ता है। इसलिए अच्छी बारिश का इंतजार करना ही समझदारी है।

132 साल पहले सबसे ज्यादा भीगा था जून

पिछले 100 साल में जून महीने का मिजाज कैसा रहा है, इस पर नजर डालें तो मौसम विभाग के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक जून में कभी गर्मी तो कभी बारिश के रिकॉर्ड बने हैं। 4 जून 2019 को 47 डिग्री के साथ जून का सबसे अधिक तापमान दर्ज किया गया था, जबकि 20 जून 1966 को न्यूनतम तापमान गिरकर 13.1 डिग्री तक पहुंच गया था।

वहीं साल 1894 में जून के दौरान सबसे अधिक 639.1 mm वर्षा रिकॉर्ड की गई थी, जबकि 24 जून 1890 को 24 घंटे में 235.5 मिमी बारिश दर्ज हुई थी।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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