हैदराबाद की गगनचुंबी इमारतों के बीच खड़ा सदियों पुराना पत्थर मंडप, देखकर रह जाएंगे हैरान राजस्थान 2 घंटे पहले 3
हैदराबाद के पाटनचेरु इलाके में आधुनिक इमारतों के बीच काकतीय दौर का माना जाने वाला एक प्राचीन पत्थर मंडप आज भी खड़ा है। इतिहास प्रेमी इसकी पुरातात्विक जांच और संरक्षण की मांग कर रहे हैं।

शहरों का तेजी से कंक्रीट के जंगल में तब्दील होना अक्सर हमारी ऐतिहासिक धरोहरों को कहीं न कहीं दबा देता है। ऐसा ही एक नजारा हैदराबाद के बाहरी इलाके पाटनचेरु में देखने को मिलता है, जहां ऊंची-ऊंची बहुमंजिला इमारतों और व्यावसायिक निर्माणों के बीच एक प्राचीन पत्थर का मंडप आज भी अपनी मौजूदगी का अहसास कराता है।

इस ऐतिहासिक संरचना को देखने के बाद जहां स्थानीय लोगों और इतिहास में रुचि रखने वालों की जिज्ञासा बढ़ी है, वहीं इसके भविष्य को लेकर चिंता भी सामने आ रही है। शहर की भागदौड़ और आधुनिक विकास के बीच खड़ा यह मंडप बीते युग की वास्तुकला और शिल्प कौशल की झलक दिखाता है। आसपास का माहौल भले ही तेजी से बदल रहा हो, लेकिन इसकी मजबूत बनावट आज भी लोगों का ध्यान खींच लेती है।

इतिहास से जुड़े लोग मानते हैं कि ऐसी धरोहरें महज पत्थरों का ढांचा नहीं होतीं, बल्कि किसी इलाके की सांस्कृतिक पहचान और विरासत की कहानी भी अपने भीतर समेटे रहती हैं।

प्राचीन वास्तुकला की झलक देता मंडप

शहरी चकाचौंध और संकरी गलियों के बीच छिपे होने के कारण आमतौर पर राहगीरों की नजर इस मंडप पर नहीं पड़ती। हालांकि इसकी नक्काशीदार बनावट, मजबूत खंभे और विशाल काले पत्थर इसके गौरवशाली अतीत की गवाही देते हैं।

इसकी बनावट को देखकर कई इतिहास प्रेमी और जानकार यह मानते हैं कि यह संरचना काकतीय राजवंश के दौर की हो सकती है, जो अपनी बेहतरीन पत्थर कला और स्थापत्य शैली के लिए जाना जाता रहा है। स्थानीय स्तर पर यह धारणा भी है कि यह किसी बड़े प्राचीन मंदिर परिसर का हिस्सा रहा होगा।

माना जाता है कि समय के साथ मुख्य मंदिर तो नष्ट हो गया, लेकिन यह मंडप आज भी सुरक्षित खड़ा है। कुछ लोग इसे श्री राम वसंत मंडपम के नाम से भी जोड़कर देखते हैं।

संरक्षण की मांग ने पकड़ा जोर

इस ऐतिहासिक ढांचे की मौजूदा स्थिति ने एक बार फिर विकास और विरासत संरक्षण के बीच संतुलन को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। इतिहास प्रेमियों का कहना है कि यदि समय रहते इस धरोहर की ओर ध्यान नहीं दिया गया, तो बढ़ते शहरी विस्तार और अतिक्रमण के चलते इसका अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है।

उनका मानना है कि पुरातत्व विभाग को इसकी ऐतिहासिक प्रामाणिकता की जांच करानी चाहिए और इसके असली इतिहास को सामने लाना चाहिए। साथ ही इसे संरक्षित धरोहर घोषित कर इसके रखरखाव और जीर्णोद्धार की दिशा में जरूरी कदम उठाए जाने चाहिए, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी इस विरासत को देख और समझ सकें।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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