मध्य प्रदेश
एक घंटा पहले
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हाईकोर्ट में दी गई चुनौती
मध्य प्रदेश के जबलपुर में चर्चित 108 करोड़ रुपये के आरटीओ भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग मामले ने नया मोड़ ले लिया है। इस मामले में आरोपी बनाए गए पूर्व आरटीओ कांस्टेबल सौरभ शर्मा ने प्रवर्तन निदेशालय यानी ED की कार्रवाई और विशेष अदालत के संज्ञान लेने के आदेश को जबलपुर हाईकोर्ट में चुनौती दी है।
याचिका में उठाए गए कानूनी सवाल
मामले की सुनवाई बीते सोमवार को जबलपुर हाईकोर्ट के जस्टिस पीके अग्रवाल की सिंगल बेंच के समक्ष हुई। याचिकाकर्ता सौरभ शर्मा की ओर से कानूनी दलील पेश करते हुए सुप्रीम कोर्ट के परविंदर सिंह बनाम ED मामले का हवाला दिया गया। याचिका में तर्क दिया गया कि:
- नए कानून BNSS की धारा 223(1) के अनुसार, किसी भी शिकायत पर संज्ञान लेने से पहले संबंधित आरोपी को अपना पक्ष रखने का मौका देना अनिवार्य है।
- विशेष अदालत ने आरोपी को सुने बिना ही संज्ञान का आदेश जारी कर दिया, जो कि प्राकृतिक न्याय और कानून के सिद्धांतों के खिलाफ है।
- यदि अदालत का प्राथमिक संज्ञान आदेश ही नियमों के विपरीत है, तो उसके आधार पर की जा रही ईडी की आगे की पूरी जांच प्रक्रिया भी कानूनी रूप से त्रुटिपूर्ण हो जाती है।
कोर्ट का अगला कदम
मामले की गंभीरता को समझते हुए हाईकोर्ट ने इस मामले में राज्य सरकार और ED को नोटिस जारी कर उनसे जवाब तलब किया है। अदालत ने सभी पक्षों को अपनी दलीलें और साक्ष्य प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 13 जुलाई को निर्धारित की गई है। इस दिन कोर्ट यह तय करेगा कि विशेष अदालत का आदेश कानूनी प्रावधानों के अनुरूप था या नहीं, जिस पर जांच की आगे की दिशा टिकी है।
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