आम के छिलके फेंकने की गलती न करें, पौधों के लिए घर पर बनाएं जबरदस्त ऑर्गेनिक खाद जीवनशैली एक घंटा पहले 1
गर्मी के मौसम में आम खाने के बाद छिलकों को कचरे में डालने के बजाय उनका उपयोग पौधों की ग्रोथ बढ़ाने के लिए करें। इससे न केवल पौधों को पोषण मिलता है, बल्कि रासायनिक खाद पर खर्च भी बचता है।

आम के छिलकों का जादुई इस्तेमाल

इस समय हर घर में आम खूब खाए जा रहे हैं। आमतौर पर हम आम का गूदा खाने के बाद छिलकों और गुठलियों को बेकार समझकर फेंक देते हैं। हालांकि, बागवानी के शौकीन लोगों के लिए ये छिलके किसी खजाने से कम नहीं हैं। आम के छिलकों में भरपूर मात्रा में पोटैशियम पाया जाता है, जो पौधों में फूलों और फलों के विकास में मदद करता है। इसके इस्तेमाल से मिट्टी की गुणवत्ता सुधरती है और पौधों को रासायनिक खादों की जरूरत नहीं पड़ती।

घर पर कैसे तैयार करें लिक्विड फर्टिलाइजर

आम के छिलकों से खाद बनाना बहुत सरल है। इसे बनाने के लिए नीचे दी गई प्रक्रिया का पालन करें:

  • सबसे पहले आम के छिलकों को इकट्ठा कर लें।
  • एक बाल्टी या बर्तन में पर्याप्त पानी लें और उसमें इन छिलकों को पूरी तरह डुबो दें।
  • बर्तन को ढककर रख दें ताकि दुर्गंध न फैले।
  • इस मिश्रण को 3 से 4 दिन तक ऐसे ही छोड़ दें और बीच-बीच में यानी 1 से 2 दिन के अंतराल पर इसे लकड़ी से चलाते रहें।
  • तय समय बाद जब पानी का रंग गहरा हो जाए, तो इसे छानकर एक बोतल में भर लें।
  • याद रखें, इसे सीधे पौधों में न डालें। पहले इसमें सादा पानी मिलाकर इसे थोड़ा पतला कर लें।

पौधों में कब और कैसे करें खाद का प्रयोग

तैयार किए गए इस नेचुरल लिक्विड फर्टिलाइजर को आप अपनी बालकनी में लगे गमलों में डाल सकते हैं। यह खाद गुलाब, गुड़हल, गेंदा और अन्य मौसमी फूलों वाले पौधों के लिए बेहद गुणकारी है।

  • पौधों की जड़ों के पास की मिट्टी में थोड़ी जगह बनाकर इस खाद को डालें।
  • आप इसका इस्तेमाल हर 20 दिन में 1 बार कर सकते हैं।

यह तरीका न केवल फ्री है, बल्कि पूरी तरह सुरक्षित भी है। इसके नियमित प्रयोग से आपके गमले के पौधे तेजी से हरे-भरे होने लगेंगे और उनमें नई जान आ जाएगी।

डॉ. आलोक मिश्रा पाबना के स्वास्थ्य संवाददाता हैं और चिकित्सा, बीमारियों तथा वेलनेस से जुड़ी खबरों को प्रामाणिक तरीके से पाठकों तक पहुंचाते हैं। नई रिसर्च, इलाज और रोकथाम पर वे विशेषज्ञों के हवाले से सटीक जानकारी देते हैं। उनका जोर भरोसेमंद और जिम्मेदार स्वास्थ्य पत्रकारिता पर है।

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