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13 घंटे पहले
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सड़क पर बैठे या घूमते आवारा मवेशी कई बार जानलेवा हादसों की वजह बनते हैं। ऐसे ही हादसों को रोकने के लिए नवसारी जिले के गौ प्रेमी युवाओं ने एक अनोखा और मानवीय रास्ता अपनाया है। उन्होंने आवारा मवेशियों के गले में रेडियम से बनी रिफ्लेक्टिव बेल्ट बांधनी शुरू की है, ताकि रात के अंधेरे में वाहन चालक उन्हें समय रहते देख सकें।
बढ़ते हादसों ने खड़ी की चिंता
कुछ समय पहले कई जिलों में आवारा मवेशियों और कुत्तों का आतंक देखने को मिला था, जिसके कारण कई लोगों की जान चली गई थी। यह मामला हाई कोर्ट तक पहुंचा, लेकिन समस्या आज भी कई इलाकों में बनी हुई है। मानव जीवन की तरह पशुओं का जीवन भी उतना ही कीमती है, मगर हाल के दिनों में सड़क दुर्घटनाओं में लोगों के साथ-साथ पशुओं के हताहत होने की संख्या भी बढ़ी है। इसी को रोकने के लिए गणदेवी तालुका में रहने वाले एक गौ प्रेमी ने नया तरीका अपनाया।
मानसून में बढ़ता खतरा
गणदेवी तालुका में मानसून के मौसम में मवेशियों के ढेर के ऊपर बैठ जाने से दुर्घटनाएं हो रही हैं। इसी को देखते हुए गौ प्रेमी साईलाल कुमावत, बजरंग दल और गौ प्रेमी युवाओं के सहयोग से 500 आवारा मवेशियों के गले में रेडीमेड बेल्ट बांधी गई। युवाओं ने कुल 2000 गायों को बेल्ट से बांधने का संकल्प लिया है।
कैसे काम करती है यह बेल्ट
बरसात की रात में जब वाहनों की हेडलाइट जलती है, तो यह रिफ्लेक्टिव बेल्ट चमक उठती है और चालक को दूर से ही पता चल जाता है कि थोड़ी दूरी पर मवेशी बैठे हैं। इससे किसी भी दुर्घटना की स्थिति में आम लोगों की जान बचाई जा सकती है और साथ ही मवेशियों के साथ होने वाले हादसों को भी रोका जा सकता है।
युवाओं ने जोखिम उठाकर निभाई जिम्मेदारी
गणदेवी-बिलीमोरा में मवेशी दुर्घटनाओं के कारण कई लोगों और जानवरों की मौत हो जाती है। हादसों की बढ़ती संख्या को देखते हुए ही आवारा मवेशियों के लिए रेडीमेड बेल्ट बनाने का यह अभियान शुरू किया गया। इस मानवीय अभियान में साईलाल कुमावत, बजरंग दल और 50 से अधिक गौ प्रेमी युवाओं ने अपनी जान जोखिम में डालकर काम किया।
अनुमान है कि रात के समय अधिक जानवर वाहनों की चपेट में आते हैं, इसलिए अंधेरे में ये परावर्तक बेल्ट बेहद मददगार साबित हो सकती हैं। रेडियम से बनी यह रिफ्लेक्टिव बेल्ट रात में सड़क से गुजरने वाले वाहनों को सीधे दिखाई देती है।
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