अमेरिका के नए कदम से बढ़ सकती हैं भारत की मुश्किलें, 54 देशों पर अतिरिक्त टैरिफ की तैयारी व्यापार 3 महीने पहले 43
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि ने भारत समेत 54 देशों पर 12.5% अतिरिक्त आयात शुल्क लगाने का प्रस्ताव रखा है, जिससे भारतीय निर्यातकों के लिए अमेरिकी बाजार में कारोबार महंगा हो सकता है।

भारत और अमेरिका के बीच जारी व्यापारिक बातचीत के बीच एक ताजा विवाद ने सिर उठा लिया है। अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि (USTR) ने भारत समेत कुल 54 देशों पर 12.5% अतिरिक्त आयात शुल्क लगाने का प्रस्ताव सामने रखा है। यदि यह निर्णय अमल में आता है तो भारतीय निर्यातकों के लिए अमेरिकी बाजार में व्यापार करना खर्चीला हो सकता है, और इसका असर देश के कई उद्योगों पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

अमेरिका का कहना है कि अनेक देशों ने उन उत्पादों के आयात पर असरदार रोक नहीं लगाई, जो कथित रूप से जबरन कराई गई मजदूरी के सहारे तैयार होते हैं। USTR के अनुसार इस वजह से अमेरिकी कंपनियों और कामगारों को वैश्विक मंच पर असमान प्रतिस्पर्धा झेलनी पड़ती है। इसी आधार पर अमेरिका ने 60 देशों की पड़ताल शुरू की थी, जिसके बाद भारत समेत 54 देशों को अतिरिक्त टैरिफ के दायरे में लाने की सिफारिश की गई।

भारत ने आरोपों को नकारा

भारत ने अमेरिकी आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। भारतीय पक्ष का मानना है कि इस प्रकार के मसलों का हल द्विपक्षीय व्यापार वार्ताओं के माध्यम से निकाला जाना चाहिए। भारत ने अमेरिका से जांच की प्रक्रिया को बंद करने की मांग भी रखी है। गौरतलब है कि दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते को लेकर बातचीत अभी चल रही है, इसलिए अंतिम निर्णय से पहले कई दौर की चर्चाएं संभव हैं।

किन देशों पर असर संभव

इस सूची में भारत के साथ-साथ चीन, जापान, ब्राजील, ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन और सऊदी अरब जैसे प्रमुख देश भी शामिल हैं। अमेरिका का तर्क है कि इन देशों ने जबरन मजदूरी से बने सामान के आयात को रोकने के लिए पर्याप्त उपाय नहीं किए। ध्यान देने वाली बात है कि अमेरिका भारत का सबसे बड़ा निर्यात बाजार माना जाता है। अगर 12.5% अतिरिक्त टैरिफ लागू होता है तो टेक्सटाइल, इंजीनियरिंग गुड्स, कैमिकल्स समेत कई क्षेत्रों के उत्पाद अमेरिकी बाजार में महंगे हो सकते हैं। इससे भारतीय कंपनियों के लिए वहां कारोबार करना कठिन हो सकता है और उनके निर्यात पर भी असर पड़ सकता है।

आगे की राह

USTR ने इस प्रस्ताव को लेकर सुझाव आमंत्रित किए हैं और जुलाई में इस मामले पर सुनवाई भी होगी। ऐसे में अंतिम फैसला आने तक भारतीय उद्योग जगत और निर्यातक अमेरिका के अगले कदम पर नजरें टिकाए हुए हैं। अगर दोनों देशों के बीच बातचीत सफल रहती है तो इस संभावित शुल्क बढ़ोतरी को टाला भी जा सकता है।

राजीव खन्ना पाबना के व्यापार संवाददाता हैं और कंपनियों, बाजार तथा अर्थव्यवस्था की खबरों को सरल भाषा में समझाते हैं। कारोबार जगत के बड़े फैसलों, नीतिगत बदलावों और उनके आम आदमी पर असर को वे गहराई से कवर करते हैं। उनका मकसद जटिल आर्थिक खबरों को हर पाठक के लिए आसान बनाना है।

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