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एक घंटा पहले
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रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा विदेशी खजाना
भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) द्वारा जारी नवीनतम आंकड़ों के मुताबिक, देश के विदेशी मुद्रा भंडार में शानदार बढ़ोतरी दर्ज की गई है। सात अगस्त 2026 को समाप्त हुए सप्ताह में भारत का कुल विदेशी मुद्रा भंडार 14.136 अरब डॉलर की जबरदस्त वृद्धि के साथ 707.002 अरब डॉलर के आंकड़े पर पहुंच गया है। यदि इस राशि को भारतीय मुद्रा में परिवर्तित करें, तो इसमें लगभग 1.20 लाख करोड़ रुपये की ऐतिहासिक बढ़ोतरी देखने को मिली है। विदेशी मुद्रा भंडार किसी भी राष्ट्र की आर्थिक स्थिरता का मुख्य आधार होता है और इसका बढ़ना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की बढ़ती मजबूती को दर्शाता है। यह भंडार आयात संबंधी भुगतानों, विदेशी ऋणों के निपटान और आपातकालीन स्थितियों में देश की जरूरतों को पूरा करने के लिए एक सुरक्षा कवच के रूप में कार्य करता है।
फॉरेन करेंसी एसेट और सोने में भारी बढ़त
रिजर्व के विभिन्न घटकों पर नजर डालें तो सबसे बड़ा हिस्सा फॉरेन करेंसी एसेट (FCA) का है। इसमें 9.946 अरब डॉलर का उछाल आया है, जिससे यह बढ़कर 574.625 अरब डॉलर हो गया है। साथ ही, देश के गोल्ड रिजर्व यानी स्वर्ण भंडार में भी निवेश का रुझान दिखा है। इसमें 3.995 अरब डॉलर की वृद्धि के साथ यह 108.738 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। इसके अलावा, स्पेशल ड्रॉइंग राइट्स (SDR) में 79 मिलियन डॉलर की मामूली बढ़ोतरी देखी गई, जो अब 18.745 अरब डॉलर पर है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के पास मौजूद भारत की रिजर्व पोजिशन में भी सुधार हुआ है, जो 116 मिलियन डॉलर बढ़कर 4.894 अरब डॉलर दर्ज की गई है।
वित्तीय स्थिति और रुपये की सुरक्षा
लंबी अवधि के आंकड़ों का विश्लेषण करें तो मार्च 2026 के अंत से लेकर अब तक भारत का विदेशी मुद्रा भंडार कुल 15.894 अरब डॉलर बढ़ा है। पिछले एक साल के आंकड़ों को देखें तो इसमें 13.384 अरब डॉलर का इजाफा हुआ है, जो भारतीय अर्थव्यवस्था की बाहरी मजबूती को प्रमाणित करता है। विदेशी मुद्रा भंडार में यह बढ़ोतरी वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के दौर में भारत के लिए एक बड़ा सुरक्षा तंत्र है। पर्याप्त रिजर्व होने की स्थिति में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया विदेशी मुद्रा बाजार में समय-समय पर हस्तक्षेप कर सकता है। इससे रुपये के मूल्य में अचानक आने वाली बड़ी गिरावट को नियंत्रित करने में मदद मिलती है, जिससे देश का मुद्रा बाजार अधिक स्थिर बना रहता है।
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