टाटा के साथ ₹1577 करोड़ की बड़ी डील, इंडियन आर्मी को मिलेंगे घातक लोइटर मुनिशन भारत एक घंटा पहले 2
रक्षा मंत्रालय ने भारतीय सेना की मारक क्षमता को मजबूत करने के लिए टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स और निबे प्राइवेट लिमिटेड के साथ ₹1577 करोड़ के कॉन्ट्रैक्ट पर हस्ताक्षर किए हैं। यह 'मेक इन इंडिया' के तहत एक बड़ा कदम है जो दुश्मन के ठिकानों को तबाह करने में सक्षम है।

सेना की ताकत में इजाफा

भारतीय सेना की आर्टिलरी यानी तोपखाने की ताकत को अभूतपूर्व स्तर पर ले जाने के लिए रक्षा मंत्रालय ने एक बेहद महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। शुक्रवार 14 अगस्त को नई दिल्ली में रक्षा मंत्रालय ने ₹1577 करोड़ के एक बड़े अनुबंध को अंतिम रूप दिया है। इस डील के तहत टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड और निबे प्राइवेट लिमिटेड को भारतीय सेना के लिए आधुनिक लोइटर मुनिशन सिस्टम और उससे संबंधित एक्सेसरीज की आपूर्ति करने का जिम्मा सौंपा गया है। इस करार के दौरान रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह मौजूद थे। यह खरीद प्रक्रिया फास्ट ट्रैक मोड के तहत पूरी की जा रही है और इसे ‘बाय इंडियन’ श्रेणी के अंतर्गत रखा गया है। यह समझौता न केवल जमीनी स्तर पर सेना की युद्धक क्षमता को कई गुना बढ़ाएगा, बल्कि आत्मनिर्भर भारत पहल को भी एक नई गति प्रदान करेगा।

क्या है लोइटर मुनिशन और इसकी खासियत

लोइटर मुनिशन को एक प्रकार का स्मार्ट आत्मघाती ड्रोन माना जाता है जो युद्ध के मैदान में पूरी तरह से गेम चेंजर साबित हो सकता है। इसकी सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह किसी भी संभावित लक्ष्य के ऊपर काफी समय तक मंडरा सकता है। जब तक दुश्मन की सही और सटीक लोकेशन की पुष्टि नहीं हो जाती, तब तक यह आसमान में ही तैनात रहता है। जैसे ही लक्ष्य की सटीक पहचान होती है, यह तुरंत उस पर हमला कर उसे पूरी तरह से नष्ट कर देता है। भारतीय सेना की आर्टिलरी रेजिमेंट को इन आधुनिक हथियारों के मिलने से उनकी मारक शक्ति में जबरदस्त उछाल आएगा। देश की निजी कंपनियों को इस प्रकार के महत्वपूर्ण अनुबंध मिलना रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी निर्माण को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर है, जिससे सेना की विदेशी उपकरणों पर निर्भरता कम होगी।

रक्षा आधुनिकीकरण का व्यापक रोडमैप

भारतीय सेना के आधुनिकीकरण की यह प्रक्रिया केवल ड्रोन तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसके दायरे में कई अन्य अत्याधुनिक हथियार भी शामिल हैं। रक्षा मंत्रालय ने हाल ही में डिफेंस की स्टैंडिंग कमेटी के सामने छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमानों की तैयारी और योजना के बारे में विस्तार से जानकारी दी है। भारत वैश्विक स्तर पर फ्रांस के ‘फ्यूचर कॉम्बैट एयर सिस्टम’ प्रोजेक्ट में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करने की दिशा में सक्रिय है। इसके साथ ही, भारत अपने स्वयं के एडवांस मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट के विकास पर भी पूरी तेजी से काम कर रहा है। इन प्रयासों का सीधा लाभ भारतीय वायु सेना को मिलेगा और उनकी हवाई ताकत में अभूतपूर्व वृद्धि होगी।

मिसाइल शक्ति का विस्तार

हवाई हमलों के साथ-साथ भारत अपनी मिसाइल शक्ति को भी लगातार नई ऊंचाइयों पर ले जा रहा है। हाल ही में 6 अगस्त को भारत ने मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल अग्नि-4 का सफल परीक्षण करके अपनी सामरिक क्षमता का प्रदर्शन किया। ओडिशा के चांदीपुर में स्ट्रैटेजिक फोर्स कमांड की कड़ी देखरेख में यह परीक्षण संपन्न हुआ। मिसाइल तकनीक में यह उपलब्धि भारत की सुरक्षा रणनीति का एक प्रमुख स्तंभ है। अग्नि-4 के अलावा, भारत ने हाल के समय में शॉर्ट रेंज मिसाइल अग्नि-1 और लॉन्ग रेंज एयर डिफेंस सिस्टम ‘कुशा’ के भी सफल परीक्षण किए हैं। ये सभी कदम सामूहिक रूप से भारत को एक ऐसी रक्षा शक्ति बना रहे हैं जो किसी भी बाहरी खतरे का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए पूरी तरह से तैयार है। ये सभी आधुनिक हथियार आने वाले वर्षों में भारतीय सेना को वैश्विक मानकों के समकक्ष खड़ा करेंगे।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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