खेती में पानी की समस्या का पक्का समाधान, किसानों के लिए वरदान बना हाइड्रोजेल मध्य प्रदेश एक घंटा पहले 2
बदलते मानसून और घटते जल स्तर के बीच हाइड्रोजेल तकनीक किसानों को सूखे से निपटने में मदद कर रही है। यह मिट्टी में लंबे समय तक नमी बरकरार रखकर फसलों को पानी की कमी से बचाता है।

खेती के लिए नई उम्मीद

अनियमित मानसून और हर साल बदलती बारिश की स्थिति के कारण खेती करना एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। ऐसे दौर में जब पानी की कमी किसानों की चिंता का मुख्य कारण बनी हुई है, जल संरक्षण की नई तकनीकें खेती को सुरक्षित करने में बड़ी भूमिका निभा रही हैं। इन्हीं तकनीकों में हाइड्रोजेल का नाम प्रमुखता से उभरकर सामने आया है। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के मल्हार क्षेत्र के निवासी और प्रगतिशील जैविक किसान जदूनंदन प्रसाद वर्मा ने किसानों को हाइड्रोजेल के इस्तेमाल का सुझाव दिया है। उनका स्पष्ट मानना है कि यह तकनीक मिट्टी की जल धारण क्षमता को बढ़ाने में बेहद कारगर है, जिससे फसलें बिना पर्याप्त बारिश के भी बेहतर तरीके से पनप सकती हैं।

क्या है हाइड्रोजेल और यह कैसे काम करता है?

जदूनंदन प्रसाद वर्मा के अनुसार, हाइड्रोजेल असल में जेली जैसे छोटे-छोटे दानों के रूप में आता है। जब इसे खेत की मिट्टी में मिलाया जाता है, तो यह जादुई तरीके से अपना काम शुरू कर देता है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह अपने वजन से कई सौ गुना अधिक पानी को सोखकर उसे अपने भीतर समाहित कर सकता है। जब पौधों को पानी की आवश्यकता होती है, तो यह हाइड्रोजेल धीरे-धीरे नमी को मिट्टी में छोड़ता रहता है, जिससे जड़ों तक पानी का संचार बना रहता है। हालांकि, अलग-अलग ब्रांड और उत्पाद की क्षमता में थोड़ा बहुत अंतर हो सकता है, लेकिन इसका मुख्य उद्देश्य सिंचाई की आवृत्ति को कम करना और फसलों को सूखे से बचाना है।

बारिश के पानी का बेहतर प्रबंधन

अक्सर देखा गया है कि बारिश के मौसम में बहुत सा पानी जमीन की गहराई में चला जाता है या बहकर बेकार हो जाता है। किसान वर्मा बताते हैं कि हाइड्रोजेल मिट्टी के आसपास एक सुरक्षा कवच की तरह काम करता है, जो बारिश के पानी को संचित कर लेता है। जब लंबे समय तक बारिश नहीं होती और चिलचिलाती धूप के कारण मिट्टी सूखने लगती है, तब यही संचित नमी फसल को मरने से बचाती है। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि बाजार में ऐसे भी हाइड्रोजेल उपलब्ध हैं जो प्राकृतिक और जैविक स्रोतों से तैयार किए जाते हैं, जैसे कि फलों के छिलकों से बने उत्पाद। ऐसे जैविक हाइड्रोजेल मिट्टी की उर्वरता को नुकसान पहुंचाए बिना नमी बनाए रखने में बहुत सहायक होते हैं।

धान की खेती में विशेष उपयोग

धान जैसी अधिक पानी की मांग वाली फसलों के लिए यह तकनीक एक वरदान साबित हो सकती है। किसान जदूनंदन प्रसाद वर्मा ने धान की बुवाई करने वाले किसानों को विशेष रूप से इसके उपयोग की सलाह दी है। इसके प्रयोग का तरीका भी काफी सरल है। किसानों को इसे जैविक खाद या बहुत बारीक मिट्टी के साथ अच्छी तरह मिला लेना चाहिए। मिश्रण तैयार होने के बाद इसे पूरे खेत में समान रूप से बिखेर दिया जाता है। एक बार मिट्टी में ठीक से मिल जाने पर, यह लंबे समय तक प्रभावी रहता है और फसल को प्रतिकूल परिस्थितियों में भी मजबूती प्रदान करता है।

सावधानी और विशेषज्ञों की सलाह

इतने फायदे होने के बावजूद, किसानों को हाइड्रोजेल का इस्तेमाल करते समय कुछ बातों का ध्यान रखना बहुत जरूरी है। हर मिट्टी की प्रकृति और फसल की जरूरत अलग होती है। उत्पाद के साथ दिए गए निर्देशों को पढ़ना अनिवार्य है, क्योंकि इसकी मात्रा और उपयोग की विधि हर स्थिति में बदल सकती है। गलत मात्रा या गलत तरीके से प्रयोग करने पर परिणाम उम्मीद के मुताबिक नहीं मिल सकते हैं। इसलिए, किसी भी उत्पाद को बड़े स्तर पर उपयोग करने से पहले स्थानीय कृषि विशेषज्ञों या कृषि विभाग के अधिकारियों से सलाह लेना हमेशा उचित रहता है। यह सही कदम आपको बेहतर पैदावार और लागत में कमी दिलाने में मदद कर सकता है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

आपकी प्रतिक्रिया?


आपको यह भी पसंद आ सकता हैं

Comments

https://pabna.in/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!