असफलता के दौर में मुंशी प्रेमचंद के ये विचार भरेंगे आपमें नया आत्मविश्वास जीवनशैली एक महीने पहले 68
महान साहित्यकार मुंशी प्रेमचंद के अनमोल विचार आज भी जीवन के कठिन संघर्षों में दिशा दिखाने का काम करते हैं। यदि आप हार से निराश महसूस कर रहे हैं, तो उनके ये विचार आपको पुनः उठ खड़े होने की प्रेरणा देंगे।

जीवन और संघर्ष की अद्भुत समझ

मुंशी प्रेमचंद केवल एक कालजयी उपन्यासकार और कहानीकार के रूप में नहीं, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और संघर्षों के सच्चे पारखी के तौर पर भी जाने जाते हैं। उनकी लेखनी में आम इंसान की पीड़ा, हताशा और उस बेबसी से जूझने का अदम्य साहस स्पष्ट रूप से झलकता है। जब भी जीवन में घोर निराशा का अनुभव हो या आपको लगे कि जीत आपसे दूर होती जा रही है, तब प्रेमचंद के शब्द एक मार्गदर्शक की भूमिका निभाते हैं। उनका मानना था कि हार का मतलब अंत नहीं है, बल्कि यह एक नई शुरुआत की दिशा में उठाया गया कदम है। प्रेमचंद के अनुसार, जीवन एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है, जिसमें धैर्य और आत्मविश्वास बनाए रखना ही सफलता की कुंजी है।

प्रेरणा देने वाले अनमोल विचार

यहाँ प्रेमचंद के कुछ ऐसे विचार दिए गए हैं जो आपके कठिन समय में नई ऊर्जा का संचार कर सकते हैं:

  • जिस तरह सूखी लकड़ी बहुत जल्द आग पकड़ लेती है, उसी प्रकार भूख से पीड़ित व्यक्ति छोटी-छोटी बातों पर अपना आपा खो देता है।
  • वह प्रेम जिसका एकमात्र लक्ष्य केवल मिलन हो, उसे प्रेम नहीं बल्कि वासना कहा जाता है।
  • वृद्धावस्था में अतीत की सुखद यादें, वर्तमान का दुख और भविष्य की चिंता ही एकमात्र मनोरंजक विषय रह जाते हैं।
  • यदि हमें दोनों समय का भोजन आसानी से मिल जाए, तो हम हर समय ईश्वर की आराधना में लीन रह सकते हैं।
  • जीत मिलने पर व्यक्ति अपने छल-कपट का बखान कर सकता है, क्योंकि जीत में सब कुछ जायज माना जाता है, लेकिन हार के अपमान को तो चुपचाप पी जाना ही बेहतर होता है।
  • मित्रता का जो वृक्ष इतना पुराना हो, वह यदि सत्य का एक मामूली झोंका भी न झेल सके, तो समझ लेना चाहिए कि उसकी नींव बालू जैसी कच्ची जमीन पर थी।
  • जिन वृक्षों की जड़ें जमीन में गहराई तक होती हैं, उन्हें बार-बार सींचने की कोई आवश्यकता नहीं पड़ती।
  • मासिक वेतन का रूप पूर्णमासी के उस चांद के समान है, जो केवल एक दिन चमकता है और फिर धीरे-धीरे लुप्त हो जाता है।
  • मन से उदास रहने वाले व्यक्ति के लिए तो स्वर्ग भी नीरस और उदास ही है।
  • एक स्त्री भले ही दुर्व्यवहार या मारपीट सह ले, लेकिन वह अपने मायके के प्रति की गई निंदा को कभी सहन नहीं कर सकती।
  • जीवन असल में एक लंबे पश्चाताप के अलावा और कुछ नहीं है।
  • लज्जा ने हमेशा से ही वीरों को परास्त करने का कार्य किया है।
  • जो कार्य हमसे स्वयं से नहीं हो सका, उसी के प्रति होने वाले दुख का दूसरा नाम मोह है।
  • दुनिया की न्याय और नीति व्यवस्था तो लक्ष्मी के हाथों के खिलौने के समान है, जिन्हें वे अपनी मर्जी के अनुसार नचाती हैं।
डॉ. आलोक मिश्रा पाबना के स्वास्थ्य संवाददाता हैं और चिकित्सा, बीमारियों तथा वेलनेस से जुड़ी खबरों को प्रामाणिक तरीके से पाठकों तक पहुंचाते हैं। नई रिसर्च, इलाज और रोकथाम पर वे विशेषज्ञों के हवाले से सटीक जानकारी देते हैं। उनका जोर भरोसेमंद और जिम्मेदार स्वास्थ्य पत्रकारिता पर है।

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