मानसून में क्यों बिगड़ जाता है पेट का सिस्टम? डॉक्टर से जानिए 5 प्रमुख कारण जीवनशैली 2 महीने पहले 92
बरसात के मौसम में गैस, दस्त और फूड पॉइजनिंग जैसी समस्याएं आम हो जाती हैं। आइए जानते हैं कि नमी और बढ़ते संक्रमण के बीच पेट को कैसे स्वस्थ रखा जाए।

मानसून और पेट की समस्याएं

बरसात का मौसम अपने साथ कई खुशियां तो लाता है, लेकिन साथ ही बीमारियों का खतरा भी बढ़ा देता है। इस दौरान गैस्ट्रो संबंधी समस्याएं जैसे गैस, बदहजमी, दस्त और फूड पॉइजनिंग के मामलों में भारी उछाल देखा जाता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि मानसून में वातावरण में मौजूद नमी बैक्टीरिया और वायरस के पनपने के लिए अनुकूल माहौल तैयार कर देती है, जिसका सीधा असर हमारे पाचन तंत्र पर पड़ता है।

पेट खराब होने के 5 मुख्य कारण

  • पानी का दूषित होना: बारिश के कारण कई बार पीने के पानी में सीवर या बाहरी गंदगी मिल जाती है। ऐसे दूषित पानी का सेवन करने से शरीर में पैरासाइट और हानिकारक बैक्टीरिया प्रवेश कर जाते हैं, जिससे उल्टी और दस्त जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
  • स्ट्रीट फूड का प्रभाव: बरसात में बाहर का तला-भुना और खुला भोजन खाने की इच्छा बढ़ जाती है। सड़क किनारे मिलने वाली चाट या पकौड़ों में बैक्टीरिया तेजी से पनपते हैं, जो फूड पॉइजनिंग का बड़ा कारण बनते हैं।
  • पाचन तंत्र में संवेदनशीलता: मानसून के दौरान हमारा पाचन तंत्र अधिक संवेदनशील हो जाता है। ऐसे में भारी और मसालेदार भोजन पचने में कठिनाई पैदा करता है, जिससे गैस और पेट फूलने की शिकायत बढ़ जाती है।
  • नमी और संक्रमण: हवा में अधिक नमी होने के कारण खाना बहुत जल्दी खराब होने लगता है। अगर भोजन को सही ढंग से स्टोर न किया जाए, तो उसमें फंगस और बैक्टीरिया का विकास तेज हो जाता है।
  • कमजोर इम्यूनिटी: बच्चे, बुजुर्ग और कम रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले लोग मानसून में सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं। उनके लिए संक्रमण का खतरा सामान्य लोगों की तुलना में अधिक होता है।

विशेषज्ञों की सलाह

सर गंगाराम हॉस्पिटल के गैस्ट्रो विभाग के चेयरमैन डॉ. अनिल अरोड़ा के अनुसार, मानसून में सावधानी ही बचाव है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस मौसम में हमेशा साफ और सुरक्षित पानी का ही उपयोग करना चाहिए। बाहर कटे हुए फलों और खुले में रखे भोजन से पूरी तरह परहेज करना बेहतर है।

सावधानी बरतें

अपनी सेहत को सुरक्षित रखने के लिए खाने को हमेशा ताजा और अच्छी तरह पकाकर ही खाएं। इसके अलावा, खाने से पहले हाथों की सफाई का विशेष ध्यान रखें। यदि आपको लगातार पेट दर्द, दस्त, बुखार या शरीर में पानी की कमी महसूस हो, तो इसे हल्के में न लें और तुरंत डॉक्टर से सलाह लें। समय रहते इलाज शुरू करना गंभीर जटिलताओं से बचने का सबसे अच्छा तरीका है।

डॉ. आलोक मिश्रा पाबना के स्वास्थ्य संवाददाता हैं और चिकित्सा, बीमारियों तथा वेलनेस से जुड़ी खबरों को प्रामाणिक तरीके से पाठकों तक पहुंचाते हैं। नई रिसर्च, इलाज और रोकथाम पर वे विशेषज्ञों के हवाले से सटीक जानकारी देते हैं। उनका जोर भरोसेमंद और जिम्मेदार स्वास्थ्य पत्रकारिता पर है।

आपकी प्रतिक्रिया?

Comments

https://pabna.in/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!

फेसबुक वार्तालाप