गर्मी में पाचन तंत्र बिगाड़ रहा है आपका स्वास्थ्य? पूर्णिया के आयुर्वेदाचार्य से जानें पेट को ठंडा और दुरुस्त रखने के खास तरीके जीवनशैली एक महीने पहले 79
गर्मी के मौसम में पेट की खराबी, जलन और गैस की समस्या आम हो जाती है। पूर्णिया जिला औषधालय केंद्र के आयुर्वेदाचार्य डॉ. नंद कुमार मंडल ने पेट को ठंडा रखने और बीमारियों से सुरक्षित रहने के लिए कुछ बेहद असरदार आयुर्वेदिक उपाय साझा किए हैं।

जैसे ही गर्मी का मौसम दस्तक देता है, वैसे ही लोगों के स्वास्थ्य में कई तरह के बदलाव देखने को मिलते हैं। इस मौसम में सबसे ज्यादा असर हमारे पाचन तंत्र पर पड़ता है। गर्मी बढ़ते ही पेट से जुड़ी परेशानियां तेजी से बढ़ने लगती हैं। बिहार के पूर्णिया जिले में भी इन दिनों ऐसी समस्याओं से ग्रसित मरीजों की संख्या में काफी इजाफा देखा जा रहा है। चिकित्सकों का मानना है कि थोड़ी सी सावधानी और सही खान-पान अपनाकर हम इन सभी समस्याओं से आसानी से बच सकते हैं।

बदलती जीवनशैली और खान-पान का सेहत पर असर

आज की इस तेज रफ्तार और भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग अपने काम को तो पूरा समय दे रहे हैं, लेकिन सेहत के प्रति काफी लापरवाह हो गए हैं। समय की कमी होने के कारण अधिकतर लोग घर का बना पौष्टिक खाना खाने के बजाय बाजार के तैयार और डिब्बाबंद भोजन पर निर्भर हो चुके हैं। इसके अलावा, रोजाना के भोजन में अत्यधिक तेल, तीखे मसाले और तली-भुनी चीजों का इस्तेमाल भी उनकी दिनचर्या का हिस्सा बन गया है। यही मुख्य वजह है कि लोगों को पेट से जुड़ी समस्याओं का लगातार सामना करना पड़ रहा है, और गर्मी के महीनों में यह परेशानी और भी ज्यादा गंभीर हो जाती है।

पेट से ही शुरू होती हैं ज्यादातर बीमारियां

पूर्णिया जिला औषधालय केंद्र में कार्यरत प्रसिद्ध आयुर्वेदाचार्य डॉ. नंद कुमार मंडल ने इस विषय पर विस्तार से जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि गर्मी के मौसम में हमारे शरीर और पेट की स्वाभाविक तासीर यानी गर्माहट बढ़ जाती है। ऐसे नाजुक समय में जब लोग अत्यधिक तेल, मसाले, तीखी मिर्च और बाहर का खाना खाते हैं, तो पेट का संतुलन पूरी तरह बिगड़ जाता है। इसके परिणामस्वरूप लोगों को पेट दर्द, सीने में जलन, खट्टी डकारें, गैस और अपच जैसी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।

डॉ. मंडल ने चेतावनी देते हुए कहा कि हमारे शरीर में होने वाली अधिकांश बीमारियों की शुरुआत असल में पेट से ही होती है। यदि हमारा पाचन तंत्र सही तरीके से काम नहीं करेगा, तो शरीर को भोजन से मिलने वाले जरूरी पोषक तत्व नहीं मिल पाएंगे। इसके बाद हमारा शरीर धीरे-धीरे अन्य घातक बीमारियों की चपेट में आने लगता है। इसलिए, किसी भी अन्य अंग के मुकाबले पेट को पूरी तरह स्वस्थ रखना सबसे ज्यादा जरूरी है।

आयुर्वेद के अनुसार पेट को कैसे रखें ठंडा?

गर्मी के इस तपते मौसम में पेट को ठंडा और स्वस्थ कैसे रखा जाए, इस पर आयुर्वेदाचार्य डॉ. नंद कुमार मंडल ने बेहद सरल और प्रभावशाली आयुर्वेदिक उपाय बताए हैं। उन्होंने सलाह दी है कि इस मौसम में लोगों को नियमित रूप से ठंडी तासीर वाली प्राकृतिक चीजों का सेवन करना चाहिए। इससे न केवल शरीर को अंदरूनी ठंडक मिलती है, बल्कि पेट की कार्यप्रणाली भी दुरुस्त रहती है।

उनके अनुसार, यदि कोई व्यक्ति अपनी दिनचर्या में निम्नलिखित चीजों को शामिल करता है, तो पेट की तासीर हमेशा संतुलित बनी रहेगी:

  • गिलोय का रस: गिलोय का नियमित सेवन पेट की गर्मी को शांत करता है और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता के साथ-साथ पाचन शक्ति को भी मजबूत बनाता है।
  • एलोवेरा का रस: सुबह खाली पेट एलोवेरा का रस पीने से पेट की जलन और एसिडिटी से तुरंत राहत मिलती है और पेट साफ रहता है।
  • पुदीने का रस और चटनी: पुदीना अपनी ठंडी तासीर के लिए जाना जाता है। भोजन में पुदीने की चटनी या इसके रस का उपयोग करने से पाचन क्रिया तेज होती है और जी मिचलाने की समस्या दूर होती है।
  • नारियल पानी: यह शरीर को हाइड्रेटेड रखने के साथ-साथ पेट को ठंडक प्रदान करता है और शरीर के पीएच स्तर को संतुलित रखता है।
  • दही और मट्ठा: दही में मौजूद अच्छे बैक्टीरिया पेट के स्वास्थ्य के लिए वरदान हैं। भोजन के साथ दही या छाछ का सेवन करने से अपच की समस्या कभी नहीं होती।

डॉ. मंडल का कहना है कि ये सभी प्राकृतिक और पारंपरिक चीजें हमारे पाचन तंत्र को अंदर से मजबूती देती हैं। इनके नियमित इस्तेमाल से पेट में गैस, एसिडिटी, जलन और अपच का खतरा बहुत हद तक कम हो जाता है, साथ ही शरीर को जरूरी पोषक तत्व भी आसानी से मिल जाते हैं।

गैस और एसिडिटी से राहत पाने के आसान घरेलू उपाय

इसके अलावा, डॉ. नंद कुमार मंडल ने आम जनता को कुछ बेहद सरल घरेलू उपाय अपनाने की भी सलाह दी है। उन्होंने कहा कि गर्मी के दिनों में शरीर में पानी की कमी नहीं होने देनी चाहिए, इसलिए जितना हो सके उतना अधिक पानी पिएं। हमेशा ताजा, सुपाच्य और हल्का भोजन ही ग्रहण करें। अधिक तले-भुने, मैदे से बने और अत्यधिक मसालेदार व्यंजनों से पूरी तरह दूरी बनाकर रखें। इन छोटे-छोटे और आसान उपायों को अपने जीवन में लागू करके लोग न केवल गर्मी की बीमारियों से बच सकते हैं, बल्कि लंबे समय तक खुद को ऊर्जावान, स्वस्थ और पूरी तरह फिट बनाए रख सकते हैं।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

आपकी प्रतिक्रिया?

Comments

https://pabna.in/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!

फेसबुक वार्तालाप