वजन घटाने की दवाएं डायबिटीज पर कैसे लगाती हैं लगाम? डॉक्टर ने बताया दोनों का सीधा रिश्ता जीवनशैली एक घंटा पहले 2
वजन कम करने वाली कुछ दवाएं भूख घटाकर और इंसुलिन रेजिस्टेंस कम करके ब्लड शुगर को भी काबू में रखती हैं। हालांकि डॉक्टर का कहना है कि हर डायबिटीज मरीज के लिए ये दवाएं सुरक्षित नहीं होतीं।

आजकल वजन घटाने वाली दवाओं का चलन तेजी से बढ़ रहा है। बड़ी संख्या में लोग इनका सहारा ले रहे हैं और इससे उन्हें डायबिटीज पर काबू पाने में भी मदद मिल रही है। दिलचस्प बात यह है कि इनमें से कई दवाएं असल में डायबिटीज को नियंत्रित करने के लिए ही तैयार की गई थीं, जिन्हें अब वेट लॉस की दवा के तौर पर जाना जा रहा है। दरअसल वजन और ब्लड शुगर के बीच गहरा संबंध है, और यही वजह है कि ये दवाएं दोहरे तरीके से असर दिखाती हैं — एक ओर वजन घटाती हैं तो दूसरी ओर शुगर लेवल पर भी नियंत्रण रखती हैं।

मोटापे और टाइप 2 डायबिटीज का सीधा कनेक्शन

विशेषज्ञों के अनुसार मोटापा और टाइप 2 डायबिटीज एक-दूसरे से सीधे जुड़े हुए हैं। जब शरीर का वजन बढ़ता है, तो इंसुलिन ठीक से काम नहीं कर पाता और इसके चलते ब्लड शुगर का स्तर ऊपर चढ़ने लगता है। यही कारण है कि डायबिटीज को संभालने के लिए वजन घटाना बेहद अहम माना जाता है।

दवाएं किस तरह करती हैं काम

विशेषज्ञ बताते हैं कि वजन घटाने वाली दवाएं शरीर में पहुंचकर भूख को कम कर देती हैं। इसका नतीजा यह होता है कि व्यक्ति की कैलोरी की खपत घट जाती है और वजन कम करने में आसानी होती है। जब वजन घटता है, तो शरीर में इंसुलिन रेजिस्टेंस भी कम होने लगता है, जिससे ब्लड शुगर लेवल नियंत्रण में आता है। दूसरे शब्दों में, जैसे ही शरीर का वजन घटता है, इंसुलिन सेंसिटिविटी बेहतर हो जाती है और शुगर लेवल काबू में आने लगता है। इसी वजह से इन दवाओं का इस्तेमाल टाइप 2 डायबिटीज के इलाज में किया जाता है।

क्या हर डायबिटीज मरीज के लिए सुरक्षित है यह दवा?

विशेषज्ञों का साफ कहना है कि डायबिटीज से जूझ रहे हर मरीज को वजन घटाने की दवा लेने की सलाह नहीं दी जाती। हर व्यक्ति की मेडिकल स्थिति अलग होती है। उम्र, वजन, मेडिकल हिस्ट्री, दूसरी बीमारियां और मौजूदा दवाओं को ध्यान में रखकर ही यह तय किया जाता है कि किसे यह दवा देनी है। केवल वजन कम करने या शुगर नियंत्रित करने के मकसद से बिना डॉक्टर की सलाह के कोई भी दवा नहीं लेनी चाहिए।

वजन और डायबिटीज के बीच भले ही सीधा रिश्ता हो, लेकिन इसका यह अर्थ नहीं है कि वजन घटाने वाली हर दवा सभी लोगों के लिए उपयुक्त है। अगर आप वजन और ब्लड शुगर दोनों को नियंत्रण में रखना चाहते हैं, तो सबसे पहले डॉक्टर से परामर्श करना जरूरी है। सही मार्गदर्शन के साथ ही सुरक्षित इलाज संभव हो पाता है।

सिर्फ दवा काफी नहीं, लाइफस्टाइल भी जरूरी

विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि डायबिटीज को नियंत्रित रखने के लिए केवल दवा पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद और तनाव प्रबंधन भी उतने ही आवश्यक हैं। स्वस्थ जीवनशैली अपनाने से दवाओं का असर और बेहतर हो सकता है तथा लंबे समय तक डायबिटीज पर लगाम रखी जा सकती है। डायबिटीज एक ऐसी बीमारी है जिसमें मरीजों को जीवनशैली, खानपान और शारीरिक गतिविधि जैसे पहलुओं पर भी पूरा ध्यान देना चाहिए।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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