मोबाइल टूटने के डर से घर छोड़ भागा 6 साल का मासूम, ट्रॉली में सोता मिला; 200 जवानों ने 8 घंटे में यूं ढूंढा मध्य प्रदेश एक घंटा पहले 2
ग्वालियर के रुद्रपुरा गांव में मां का मोबाइल टूट जाने पर डांट के डर से 6 साल का बच्चा घर से निकलकर एक ट्रॉली में जा सोया। करीब 8 घंटे बाद पुलिस ने उसे सुरक्षित खोज निकाला और परिवार को सौंप दिया।

मध्य प्रदेश के ग्वालियर स्थित पुरानी छावनी थाना क्षेत्र के रुद्रपुरा गांव में एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया, जहां महज 6 साल का एक बच्चा मोबाइल टूट जाने के डर से घर छोड़कर निकल गया। हालांकि करीब 8 घंटे बाद वह सकुशल मिल गया और पुलिस ने उसे परिवार के हवाले कर दिया।

आखिर कैसे शुरू हुआ पूरा घटनाक्रम

मिली जानकारी के मुताबिक, बच्चा अपनी मां का मोबाइल लेकर रील देख रहा था। इसी बीच फोन उसके हाथ से फिसलकर नीचे गिर गया और टूट गया। मां की डांट के डर से घबराए बच्चे ने टूटे हुए मोबाइल को घर में रखी बाल्टी के पीछे छिपा दिया और किसी को बताए बिना चुपचाप घर से बाहर निकल गया। इसके बाद वह गांव में खड़ी एक ट्रॉली के भीतर जाकर सो गया।

घर न लौटने पर परिवार ने दी पुलिस को सूचना

शाम करीब 7:30 बजे जब बच्चा घर वापस नहीं आया तो परिजनों की चिंता बढ़ गई। माता-पिता ने पहले आसपास के इलाकों और रिश्तेदारों के घरों में उसकी तलाश की, मगर कहीं पता न चलने पर पुलिस को सूचित किया गया। खबर मिलते ही पुलिस ने बिना देर किए सर्च ऑपरेशन छेड़ दिया।

200 जवानों ने रातभर चलाया तलाशी अभियान

थाना प्रभारी डॉ. संतोष यादव के अनुसार, करीब 200 पुलिस जवानों ने पूरी रात तलाशी अभियान चलाया। इस दौरान पुलिस ने आसपास के तकरीबन 15 गांवों को खंगाला और रेलवे स्टेशन समेत कई जगहों के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी खंगाली।

आधा किलोमीटर दूर ट्रॉली में मिला बच्चा

करीब 8 घंटे की लगातार खोजबीन के बाद बच्चा घर से लगभग आधा किलोमीटर दूर एक ट्रॉली के भीतर गहरी नींद में सोता हुआ मिला। पुलिस ने उसे सुरक्षित परिवार को सौंप दिया, जिसके बाद परिजनों ने राहत की सांस ली।

विशेषज्ञ की राय

इस घटना के बाद साइकोलॉजिकल काउंसलर डॉ. याशी जैन ने कहा कि छोटे बच्चों में भावनात्मक समझ पूरी तरह विकसित नहीं हुई होती। ऐसे में डर या तनाव की स्थिति में वे कोई गलत कदम उठा सकते हैं।

उन्होंने सलाह दी कि माता-पिता बच्चों को डांटने के बजाय प्यार से समझाएं और उनकी बात ध्यान से सुनें। इससे बच्चे खुद को सुरक्षित महसूस करते हैं और इस तरह की घटनाओं से बचा जा सकता है।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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