हरियाणा
एक घंटा पहले
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विचारों
गुरुग्राम को देश की कॉर्पोरेट राजधानी कहा जाता है। हर साल हजारों युवा अच्छी नौकरी, ऊंची सैलरी और बेहतर जिंदगी का सपना लेकर इस शहर का रुख करते हैं। लेकिन चमचमाते कॉर्पोरेट टावरों और आलीशान सोसायटियों के पीछे किराएदारों की एक ऐसी हकीकत भी छिपी है, जो किसी भी नौकरीपेशा के मन में डर पैदा कर सकती है।
ऐसा ही एक मामला सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म रेडिट पर सामने आया, जहां तीन वर्किंग प्रोफेशनल्स ने आरोप लगाया कि वक्त पर किराया देने के बाद भी उन्हें देर रात फ्लैट खाली करने पर मजबूर कर दिया गया। इस पूरे झमेले में उनका करीब 70 हजार रुपये का नुकसान हो गया।
कैसे शुरू हुआ पूरा मामला
पोस्ट के मुताबिक, तीनों युवक इसी साल जनवरी में गुरुग्राम के डीएलएफ इलाके के पास एक फ्लैट में रहने आए थे। उन्होंने 50 हजार रुपये सिक्योरिटी के तौर पर जमा कराए और हर महीने 20 हजार रुपये किराया एक ऐसे शख्स को देते रहे, जो खुद को मकान का मैनेजर या देखरेख करने वाला बताता था। कई महीनों तक सब कुछ सामान्य ढंग से चलता रहा।
परेशानी तब खड़ी हुई जब असली मकान मालिक ने संपर्क कर बताया कि उसके पास किराए की रकम पहुंची ही नहीं। आरोप है कि किराया वसूलने वाला व्यक्ति पैसे अपने पास रखता रहा और मकान मालिक तक एक भी रुपया नहीं पहुंचाया। इसके बाद मकान मालिक और किराएदारों के बीच विवाद बढ़ता चला गया।
पुलिस तक पहुंची बात
हालात इतने बिगड़ गए कि मामला पुलिस तक जा पहुंचा। हालांकि पुलिस ने इसे सिविल विवाद बताते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाने की सलाह दी। आखिरकार तीनों किराएदारों को फ्लैट खाली करना पड़ा।
सबसे बड़ी मुश्किल तब सामने आई जब मकान मालिक ने सिक्योरिटी की रकम लौटाने से इनकार कर दिया। उसने शर्त रखी कि अगर तीनों उसी फ्लैट में रहना चाहते हैं तो उन्हें नई सिक्योरिटी जमा करनी होगी और बकाया किराया भी चुकाना होगा। तीनों युवकों का दावा है कि सिक्योरिटी और एक महीने के किराए को मिलाकर उनका करीब 70 हजार रुपये का नुकसान हुआ।
किराएदारों की जुबानी उनकी आपबीती
पोस्ट में युवकों ने अपनी पीड़ा बयां करते हुए लिखा, ‘मकान मालिक ने हमें रात में ही फ्लैट से निकाल दिया। एक ही रात में ₹70,000 का नुकसान हो गया। अब हम क्या करें? हम तीन लोग इस साल जनवरी में DLF, गुड़गांव के पास एक फ्लैट में रहने आए थे। हम नौकरीपेशा लोग हैं और हमने यह फ्लैट एक ऐसे व्यक्ति के जरिए लिया था जिसने खुद को प्रॉपर्टी का मैनेजर बताया था। हमने ₹50,000 का सिक्योरिटी डिपॉजिट और लगभग ₹20,000 का मासिक किराया दिया था।’
‘कई महीनों तक सब कुछ ठीक चलता रहा। हम उस व्यक्ति को नियमित रूप से किराया देते रहे जिसने हमें यह जगह किराए पर दी थी। फिर, लगभग एक हफ्ते पहले, असली मकान मालिक अचानक रात में आया और हमसे घर खाली करने को कहा। उसके अनुसार, जिस व्यक्ति को हम किराया दे रहे थे, उसने उसे किराया नहीं दिया था और अन्य बकाया राशि का भी भुगतान नहीं किया था। हम पूरी तरह से हैरान रह गए, क्योंकि हमारी नजर में हमने सब कुछ समय पर चुकाया था। हालात इतने गंभीर हो गए कि हमें पुलिस को बुलाना पड़ा। हमें घर खाली करने के लिए सिर्फ एक हफ्ते का समय दिया गया।’
सिक्योरिटी लौटाने से इनकार
तीनों ने आगे लिखा, ‘अब सबसे बुरी बात आती है। मकान मालिक का कहना है कि वह हमारा सिक्योरिटी डिपॉजिट वापस नहीं करेगा और अगर हम वहीं रहना चाहते हैं तो हमें नई सिक्योरिटी राशि, ज्यादा किराया और बकाया राशि भी देनी होगी। जिस व्यक्ति ने हमारे पैसे लिए थे, वह कुछ भी वापस करने से इनकार कर रहा है और खुलेआम कहता है कि सिविल केस करो। जो चाहो वो करो।’
‘आज हम फ्लैट खाली कर रहे हैं। असल में हमने लगभग ₹70,000 (₹50,000 सिक्योरिटी + ₹20,000 किराया जो पहले ही दे चुके थे) खो दिए हैं और हमें तुरंत रहने के लिए दूसरी जगह ढूंढनी पड़ रही है। कोई सलाह मिले तो अच्छा होगा। सच कहूं तो हम बहुत थक चुके हैं और इस समय पूरी तरह से बेबस महसूस कर रहे हैं। मैंने यह पोस्ट अपने एक करीबी दोस्त की तरफ से किया है। वह आज घर छोड़कर कुछ समय के लिए एक दोस्त के यहां रहने जा रहा है।’
लाखों किराएदारों की चिंता
गुरुग्राम के इन तीन वर्किंग प्रोफेशनल्स के साथ हुई यह घटना सिर्फ एक किराए के विवाद की कहानी नहीं है, बल्कि उन लाखों नौकरीपेशा युवाओं की चिंता का प्रतीक भी है, जो हर साल गुरुग्राम, नोएडा, बेंगलुरु और पुणे जैसे शहरों में काम की तलाश में पहुंचते हैं। किराए के मकान, भारी-भरकम सिक्योरिटी, ब्रोकरों की मनमानी और कानूनी पेचीदगियों के बीच कई बार आम किराएदार ही सबसे कमजोर कड़ी बन जाता है और उसे ही इन तमाम मुश्किलों का बोझ उठाना पड़ता है।
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