फायदे की खबर
2 घंटे पहले
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बैंकों में अपनी जमा-पूंजी रखने वाले करोड़ों लोगों के लिए एक अच्छी खबर सामने आई है। केंद्र सरकार जमाकर्ताओं की रकम को और अधिक सुरक्षित बनाने की दिशा में कदम उठाने की तैयारी में है। मिली जानकारी के अनुसार सरकार बैंक डिपॉजिट इंश्योरेंस की मौजूदा ₹5 लाख की सीमा को बढ़ाकर ₹7.5 लाख करने पर गंभीरता से विचार कर रही है। वित्त मंत्रालय इस आशय का प्रस्ताव प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) को भेज चुका है और निकट भविष्य में इस पर अंतिम मुहर लग सकती है। प्रस्ताव को मंजूरी मिलने की स्थिति में ग्राहकों को पहले की तुलना में कहीं अधिक सुरक्षा हासिल होगी।
जमा बीमा आखिर है क्या?
देश में बैंक जमा की सुरक्षा का दायित्व रिजर्व बैंक की पूर्ण स्वामित्व वाली संस्था डिपॉजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन (DICGC) के पास है। यदि किसी बैंक का लाइसेंस रद्द हो जाए या वह बंद हो जाए, तो जमाकर्ताओं को एक तय सीमा तक उनकी रकम लौटाने की जिम्मेदारी इसी संस्था की होती है। वर्तमान नियमों के तहत किसी एक बैंक में रखे बचत खाते, चालू खाते, फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) और रिकरिंग डिपॉजिट (RD) सहित कुल राशि पर अधिकतम ₹5 लाख का बीमा कवर मिलता है, जिसमें मूलधन और ब्याज दोनों शामिल रहते हैं।
2020 के बाद पहली बार बढ़ सकती है यह सीमा
इससे पहले फरवरी 2020 में सरकार ने जमा बीमा की सीमा ₹1 लाख से बढ़ाकर ₹5 लाख कर दी थी। उस दौर में कई सहकारी बैंकों और यस बैंक जैसे मामलों के सामने आने के बाद जमाकर्ताओं की सुरक्षा को लेकर चिंता गहरा गई थी। अब एक बार फिर सरकार इस सीमा को ₹7.5 लाख तक ले जाने पर विचार कर रही है।
यह बदलाव क्यों जरूरी माना जा रहा है?
सरकार और नियामक मानते हैं कि वित्तीय व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने के लिए छोटे और मध्यम वर्ग के जमाकर्ताओं का भरोसा कायम रखना बेहद अहम है। बीते कुछ वर्षों में कई सहकारी बैंकों पर कार्रवाई हुई, जिसके चलते DICGC को ग्राहकों के दावों का भुगतान करना पड़ा। यदि बीमा सीमा बढ़ती है तो किसी बैंक के डूबने की स्थिति में ग्राहकों को ₹2.5 लाख तक की अतिरिक्त सुरक्षा मिल सकेगी। इसका सबसे अधिक लाभ वरिष्ठ नागरिकों, एफडी निवेशकों और मध्यम वर्गीय परिवारों को मिलेगा।
जोखिम के अनुसार तय होगा प्रीमियम
अब सभी बैंकों से जमा बीमा के लिए एक समान शुल्क नहीं वसूला जाएगा। जिन बैंकों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और जो अपने जोखिम का बेहतर प्रबंधन करेंगे, उन्हें कम प्रीमियम चुकाना होगा। इसके विपरीत, कमजोर वित्तीय हालत या अधिक जोखिम वाले बैंकों से ऊंचा प्रीमियम लिया जाएगा। इस व्यवस्था से बैंकों को अपनी वित्तीय सेहत सुधारने और ग्राहकों के पैसे की सुरक्षा पर अधिक ध्यान देने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा।
DICGC के पास कितना कोष मौजूद है?
31 मार्च 2026 तक DICGC के जमा बीमा कोष का आकार 2.61 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो चुका है। वित्त वर्ष 2025-26 में संस्था ने 1,988 करोड़ रुपये के दावों का निपटारा किया। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि जमाकर्ताओं के हितों की रक्षा के लिए संस्था के पास पर्याप्त वित्तीय संसाधन उपलब्ध हैं।
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