गया के ओम कुमार ने पूरा किया इंजीनियर बनने का सपना, मजदूर पिता की मेहनत लाई रंग बिहार 48 मिनट पहले 3
गया के मानपुर पंपूपर निवासी ओम कुमार ने जेईई एडवांस परीक्षा में सफलता पाते हुए ओबीसी वर्ग में 10668वीं रैंक हासिल की है। मजदूर परिवार से आने वाले ओम ने आर्थिक तंगी के बीच सेल्फ स्टडी और संस्था के मार्गदर्शन से यह मुकाम पाया।

बिहार के गया जिले के एक खपरैल मकान में पल रहा इंजीनियर बनने का सपना अब साकार होता दिख रहा है। मानपुर पंपूपर के रहने वाले ओम कुमार ने जेईई एडवांस परीक्षा में कामयाबी हासिल की है और ओबीसी वर्ग में उन्हें 10668वीं रैंक मिली है। एक गरीब और मजदूर परिवार में जन्मे ओम की इस उपलब्धि से पूरे परिवार में खुशी की लहर है।

संघर्ष भरा रहा सफलता का सफर

ओम के लिए यह कामयाबी आसान नहीं थी। उनके पिता सुनील कुमार मजदूरी करते हैं और मानपुर के पटवा टोली में सूत करघा पर रोजाना 12 से 14 घंटे काम करते हैं, जिसके बदले उन्हें 300-400 रुपये मिलते हैं। रेलवे लाइन के किनारे बने एक खपरैल घर में करीब 25 लोग एक साथ रहते हैं। घर में पढ़ाई के लिए जगह तक नहीं थी, फिर भी ओम के भीतर इंजीनियर बनने की चाह जीवित रही।

आर्थिक तंगी को बनाया अपनी ताकत

ओम चाहते थे कि वे भी दिल्ली और कोटा जैसे शहरों में रहकर इंजीनियरिंग की तैयारी करें, लेकिन घर की आर्थिक हालत को देखते हुए उन्होंने पटवा टोली में चल रही वृक्ष बी द चेंज संस्था में रहकर पढ़ाई की। इस संस्था में बच्चों को निशुल्क इंजीनियरिंग की तैयारी कराई जाती है। ओम यहां रोजाना दिन में 8 से 10 घंटे पढ़ाई किया करते थे। सेल्फ स्टडी और संस्था के मार्गदर्शन में ही उन्हें यह सफलता मिली।

बचपन से पढ़ाई में होशियार रहे ओम ने दसवीं और इंटरमीडिएट की शिक्षा मानपुर स्थित पॉलिटेक्निक स्कूल और ग्रीन फील्ड स्कूल से पूरी की। मैट्रिक करने के बाद से ही उनके मन में इंजीनियर बनने का सपना घर कर गया था। उन्होंने घर की आर्थिक कमजोरी को बाधा नहीं, बल्कि अपनी ताकत बनाया और सेल्फ स्टडी के बल पर यह मुकाम हासिल किया।

पहले ही प्रयास में मिली कामयाबी

ओम कुमार को उनके पहले ही प्रयास में सफलता मिली है। हालांकि बेहतर आईआईटी कॉलेज मिलने की संभावना कम है, इसलिए वे जेईई मेंस की रैंक के आधार पर देश के किसी अच्छे एनआईटी कॉलेज में दाखिला लेने पर विचार कर रहे हैं। उन्होंने अपनी इस उपलब्धि का श्रेय अपने परिवार के साथ-साथ वृक्ष बी द चेंज संस्था से जुड़े मार्गदर्शक चंद्रकात पाटेश्वरी, रंजीत कुमार और संस्था से जुड़े अन्य लोगों को दिया है।

पिता की मजदूरी पर टिकी थी उम्मीदें

ओम के पिता सुनील कुमार पटवा टोली में सूत काटने का काम करते हैं। दिनभर मजदूरी करने पर उन्हें 300-400 रुपये की कमाई होती है। अगर किसी दिन बिजली कटी रह जाए तो उस दिन उन्हें मजदूरी भी नहीं मिलती।

पटवा टोली से 10 बच्चों ने पास की एडवांस परीक्षा

उल्लेखनीय है कि मानपुर के पटवा टोली को 'विलेज ऑफ आईआईटियन' के नाम से जाना जाता है। यहां संचालित वृक्ष बी द चेंज संस्था से इस बार 31 बच्चों ने जेईई मेंस क्लियर किया था, जिनमें से 10 बच्चों को एडवांस परीक्षा में सफलता हासिल हुई है।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

आपकी प्रतिक्रिया?


आपको यह भी पसंद आ सकता हैं

Comments

https://pabna.in/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!