जीवनशैली
45 मिनट पहले
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विचारों
आज के दौर में देर रात तक जागना बहुत से लोगों की रोजमर्रा की दिनचर्या में शामिल हो चुका है। किसी को काम के चलते देर तक जागना पड़ता है, तो किसी को रात का शांत और सुकून भरा माहौल भाता है। हालांकि मनोविज्ञान कहता है कि इस आदत के पीछे कोई एक वजह नहीं होती। यह व्यक्ति की आदतों, उसकी सोच और उसकी जीवनशैली से भी जुड़ी हो सकती है।
रात का शांत माहौल बढ़ाता है फोकस
मनोवैज्ञानिक मानते हैं कि बहुत से लोगों को रात का समय इसलिए पसंद आता है क्योंकि उस वक्त चारों ओर शांति होती है। फोन कॉल, शोरगुल और दूसरी रुकावटें काफी कम हो जाती हैं। ऐसे लोग रात के समय खुद को अधिक एकाग्र महसूस करते हैं और अपनी पसंद का काम आराम से पूरा कर पाते हैं।
कुछ लोगों के लिए रचनात्मकता का समय
कई शोधों में यह सामने आया है कि कुछ लोगों का दिमाग शाम या रात के वक्त ज्यादा सक्रिय रहता है। ऐसे लोग रात में लिखना, पढ़ना, डिजाइनिंग करना या किसी नए विचार पर काम करना पसंद करते हैं। यही कारण है कि कई लेखक, कलाकार और रचनात्मक पेशे से जुड़े लोग देर रात तक जागना अधिक पसंद करते हैं।
खुद के साथ समय बिताने की चाहत
मनोविज्ञान के अनुसार कुछ लोग दिनभर की भागदौड़ के बाद रात में अपने लिए वक्त निकालना चाहते हैं। इस दौरान वे फिल्म देखते हैं, किताब पढ़ते हैं या सोशल मीडिया पर समय गुजारते हैं। कई विशेषज्ञ इसे "मी टाइम" से भी जोड़कर देखते हैं, जब व्यक्ति सिर्फ अपने साथ समय बिताना चाहता है।
तनाव और चिंता भी हो सकती है कारण
हर बार देर रात तक जागना किसी अच्छी आदत की निशानी नहीं होता। कई बार तनाव, चिंता या जरूरत से ज्यादा सोचने की प्रवृत्ति भी लोगों को देर तक जगाए रखती है। ऐसे लोग बिस्तर पर लेटने के बाद भी देर तक सोचते रहते हैं, जिसका सीधा असर उनकी नींद पर पड़ता है।
हर शरीर की अपनी बॉडी क्लॉक
हर व्यक्ति की बॉडी क्लॉक एक-दूसरे से अलग होती है। कुछ लोग सुबह जल्दी उठकर अपना सबसे बेहतर काम करते हैं, जबकि कुछ लोग रात के समय खुद को ज्यादा सक्रिय महसूस करते हैं। मनोविज्ञान और स्लीप साइंस में ऐसे लोगों को अक्सर "नाइट आउल" कहा जाता है। यह कोई बीमारी नहीं, बल्कि शरीर की स्वाभाविक प्रवृत्ति का हिस्सा हो सकती है।
संतुलन बनाए रखना है जरूरी
देर रात तक जागना हमेशा गलत नहीं माना जाता, लेकिन अगर इसकी वजह से नींद पूरी न हो रही हो, थकान बनी रहती हो या रोजमर्रा के काम प्रभावित हो रहे हों, तो इस आदत पर ध्यान देना बेहद जरूरी हो जाता है। बेहतर मानसिक और शारीरिक सेहत के लिए पर्याप्त नींद लेना उतना ही अहम है, जितना सही खानपान और नियमित व्यायाम।
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