गया में एग्री वोल्टेइक प्लांट से किसानों को दोहरा फायदा, सिंचाई हुई आसान और चालू हुई आटा-धान मिल बिहार 49 मिनट पहले 2
गया जिले के नवादा गांव में लगे 20 किलोवाट के एग्री वोल्टेइक सोलर प्लांट से किसान एक ही खेत में फसल भी उगा रहे हैं और सौर ऊर्जा से कमाई भी कर रहे हैं। इससे सिंचाई सुगम हुई है और खेती की लागत घटी है।

खेती और बिजली उत्पादन को एक साथ करने वाली एग्री वोल्टेइक तकनीक अब किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है। इस तकनीक में किसी भी खेत में सोलर प्लांट लगाकर बिजली के साथ-साथ फसल भी उगाई जा सकती है। सोलर पैनल इस ढंग से लगाए जाते हैं कि नीचे लगी फसलों को जरूरी धूप मिलती रहे और वे प्राकृतिक रूप से पनप सकें।

नवादा गांव में लगा प्लांट

बिहार के गया जिले के शेरघाटी प्रखंड स्थित नवादा गांव में भी एग्री वोल्टेइक सोलर प्लांट स्थापित किया गया है, जिसका लाभ यहां के किसान उठा रहे हैं। गांव में मौजूद टीसीआई-प्राण एग्री वोल्टेइक साइट पर 20 किलोवाट की सौर ऊर्जा प्रणाली से बिजली पैदा की जा रही है। इस बिजली का इस्तेमाल अनाज चक्की चलाने और खेतों की सूक्ष्म सिंचाई के लिए किया जा रहा है।

सिंचाई आसान, लागत में कमी

खेतों में ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई प्रणाली का उपयोग किया जा रहा है, जिससे फसल के लिए आवश्यक पानी की मात्रा में काफी कमी आई है। इससे न सिर्फ पानी की बचत हो रही है, बल्कि खेती की लागत भी घट रही है। साथ ही किसान अनाज चक्की की सेवाओं के बदले शुल्क लेकर अतिरिक्त आमदनी भी कर रहे हैं।

छह किसानों को मिल रहा लाभ

इस परियोजना के तहत नवादा गांव के 6 किसानों को सीधा फायदा पहुंच रहा है और लगभग 12 बीघा जमीन पर इसके सहारे खेती की जा रही है। किसान विनोद कुमार सिंह ने बताया कि एग्री वोल्टेइक साइट शुरू होने के बाद खेती की लागत घट गई है। ड्रिप और स्प्रिंकलर से खेतों की पटवन हो रही है, वहीं सौर ऊर्जा से बनी बिजली से आटा चक्की भी चलाई जा रही है, जिससे अतिरिक्त आय हो रही है।

परियोजना का उद्देश्य

नवादा की एग्री वोल्टेइक साइट टीसीआई की जीरो-हंगर, जीरो-कार्बन खाद्य प्रणाली परियोजना का हिस्सा है। इसका मकसद कृषि से निकलने वाले ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को घटाना, कृषि उत्पादकता बढ़ाना और बिहार के किसानों की आजीविका को बेहतर बनाना है। इस परियोजना पर कुल 54 लाख रुपये खर्च हुए हैं, जिसमें किसानों का भी अंशदान शामिल है। प्लांट लगने के बाद किसानों को इसका लाभ साफ नजर आ रहा है।

एक योजना, कई फायदे

विनोद कुमार सिंह के अनुसार, कई साल पहले यहां पानी की गंभीर समस्या थी, लेकिन एग्री वोल्टेइक प्लांट लगने के बाद यह कमी दूर हो गई। 20 किलोवाट के इस प्लांट से ड्रिप और स्प्रिंकलर के जरिए खेतों की सिंचाई की जा रही है। इसके अलावा उत्पादित बिजली से आटा चक्की और धान मिल भी चलाई जा रही है।

इतना ही नहीं, सोलर पैनल के नीचे छांव में उगने वाली फसलें जैसे हल्दी, ओल और अदरक की खेती से भी किसानों को अच्छी आमदनी हो रही है।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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