बच्चों के सामने दरिंदगी करने वाले दो दोषियों की फांसी बरकरार, लाहौर हाई कोर्ट का बड़ा फैसला विश्व 3 महीने पहले 46
पाकिस्तान की लाहौर हाई कोर्ट ने 2020 के मोटरवे गैंगरेप मामले में दो दोषियों की फांसी की सजा बरकरार रखी है। फ्रांसीसी मूल की महिला के साथ उसके तीन बच्चों के सामने सामूहिक दुष्कर्म किया गया था।

पाकिस्तान के सबसे चर्चित गैंगरेप मामलों में से एक में लाहौर हाई कोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने फ्रांसीसी मूल की एक महिला के साथ उसके तीन बच्चों के सामने सामूहिक दुष्कर्म करने वाले दो दोषियों को सुनाई गई फांसी की सजा को बरकरार रखा है। बुधवार को कोर्ट ने आबिद अली और शफकत अली की अपील को खारिज कर दिया। दोनों दोषियों ने 2021 में एंटी टेररिज्म कोर्ट की ओर से सुनाई गई फांसी की सजा को चुनौती दी थी।

एक अदालती अधिकारी के हवाले से आई रिपोर्ट के मुताबिक, लाहौर हाई कोर्ट ने दोनों की अपील ठुकराते हुए निचली अदालत के फैसले पर मुहर लगा दी है।

क्या था पूरा मामला

9 सितंबर 2020 की रात फ्रांस की नागरिक और पाकिस्तानी मूल की एक महिला अपने तीन बच्चों के साथ सियालकोट-लाहौर मोटरवे पर सफर कर रही थी। रास्ते में उनकी कार का ईंधन खत्म हो गया, जिसके बाद वह अपने बच्चों के साथ सड़क किनारे मदद की प्रतीक्षा करने लगी।

जांच के अनुसार, सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए महिला ने कार के दरवाजे और खिड़कियां बंद कर रखी थीं। इसी बीच दो हमलावर वहां पहुंचे और उन्होंने कार के शीशे तोड़ डाले। आरोपियों ने महिला को बाहर खींचा और बंदूक की नोक पर उसके तीन बच्चों के सामने सामूहिक दुष्कर्म को अंजाम दिया। वारदात के बाद आरोपी परिवार से नकदी और जेवरात लूटकर फरार हो गए।

पूरे देश में फूटा था गुस्सा

यह घटना सामने आने के बाद पाकिस्तान में जबरदस्त आक्रोश देखने को मिला था। जगह-जगह सड़कों पर प्रदर्शन हुए और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर सरकार तथा पुलिस की भूमिका पर सवाल खड़े हुए।

विवाद उस समय और गहरा गया, जब उस दौर के लाहौर पुलिस प्रमुख उमर शेख ने महिला के देर रात सफर करने को लेकर ही सवाल उठा दिए। उन्होंने कहा था कि महिला को कोई दूसरा रास्ता चुनना चाहिए था। उनके इस बयान की न सिर्फ पाकिस्तान में, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी कड़ी आलोचना हुई थी।

आतंकवाद की धाराओं में चला मुकदमा

घटना के बाद गुजरपुरा पुलिस ने 9 सितंबर 2020 को मामला दर्ज किया था। आरोपियों के खिलाफ अपहरण, गैंगरेप, डकैती और आतंकवाद से जुड़ी धाराओं के तहत मुकदमा चलाया गया। 2021 में एंटी टेररिज्म कोर्ट ने दोनों को दोषी करार देते हुए फांसी की सजा सुनाई थी, और अब लाहौर हाई कोर्ट ने भी उस फैसले पर अपनी मुहर लगा दी है।

साहिल चौहान पाबना के वर्ल्ड अफेयर्स रिपोर्टर हैं, जो अंतरराष्ट्रीय खबरें और वैश्विक मामले कवर करते हैं। विदेश नीति, कूटनीति और दुनिया भर के घटनाक्रमों पर उनकी अच्छी पकड़ है। वे जटिल वैश्विक मुद्दों को भारतीय नजरिए से समझाते हैं।

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