नीरज बवाना को हाई कोर्ट से दो दिन की पैरोल, गर्भवती पत्नी से मिल सकेगा गैंगस्टर दिल्ली 14 घंटे पहले 2
दिल्ली हाई कोर्ट ने कुख्यात गैंगस्टर नीरज बवाना को अस्पताल में भर्ती अपनी गर्भवती पत्नी से मिलने के लिए दो दिन की पैरोल दी है, हालांकि इस दौरान वह पुलिस हिरासत में ही रहेगा।

नई दिल्ली: राजधानी के बदनाम गैंगस्टर नीरज बवाना से जुड़ी एक अहम जानकारी सामने आई है। दिल्ली हाई कोर्ट ने उसे पैरोल दे दी है। यह राहत उसे अस्पताल में भर्ती अपनी गर्भवती पत्नी से मिलने के लिए दी गई है। पैरोल की कुल अवधि 2 दिन की होगी।

क्या है पूरा मामला

2015 के जेल वैन हत्याकांड के आरोपी नीरज सहरावत उर्फ नीरज बवाना को अदालत ने 2 दिन की पैरोल मंजूर की है, लेकिन इस दौरान भी वह हिरासत में ही रहेगा। यह छूट उसे इसलिए दी गई है क्योंकि उसकी गर्भवती पत्नी इस समय अस्पताल में भर्ती हैं और हाई रिस्क प्रेग्नेंसी का इलाज करवा रही हैं।

न्यायमूर्ति सौरभ बनर्जी ने सोमवार को आदेश पारित करते हुए कहा कि नीरज बवाना 5 और 6 जून, 2026 को अपनी पत्नी से मिल सकेगा, पर इस दौरान उसे कड़ी पुलिस हिरासत में रखा जाएगा। अपने आदेश में न्यायमूर्ति बनर्जी ने कहा, "मेडिकल रिकॉर्ड में आवेदक की पत्नी का स्वास्थ्य गंभीर हालत में है, इसकी पुष्टि पुलिस की ओर से भी की गई है। ऐसे में मानवीय दृष्टिकोण को ध्यान में रखते हुए न्यायालय, आवेदक को 5 जून और 6 जून, 2026 को दो दिनों की अवधि के लिए हिरासत पर पैरोल देना उचित समझता है।"

चूंकि यह मामला हाई रिस्क वाले विचाराधीन कैदी नीरज बवाना से जुड़ा है, इसलिए हाई कोर्ट ने संबंधित जेल अधीक्षक को पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम करने के निर्देश दिए हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार, 5 और 6 जून को वह सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक अस्पताल में अपनी बीमार पत्नी से मुलाकात कर सकेगा।

90 दिन की अंतरिम जमानत मांगी थी

नीरज बवाना ने हाई कोर्ट में याचिका दाखिल कर 90 दिन की अंतरिम जमानत की मांग की थी। याचिका में उसने दलील दी थी कि उसकी पत्नी को शारीरिक और भावनात्मक सहारा देने के लिए जमानत मिलना बेहद जरूरी है।

नीरज की पत्नी की हालत

नीरज बवाना की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता एन हरिहरन और सिद्धार्थ यादव ने अदालत को बताया कि उसकी पत्नी हाई रिस्क वाली ट्राइकोरियोनिक ट्राइम्निओटिक ट्रिपलेट प्रेग्नेंसी का इलाज करवा रही हैं। यह कोई सामान्य गर्भावस्था नहीं है और इसमें यह आवश्यक है कि पति नीरज अपनी पत्नी के साथ मौजूद रहकर उसे शारीरिक एवं भावनात्मक सहारा दे। वकीलों का तर्क था कि पत्नी की हालत ठीक न होने के कारण उसे अंतरिम जमानत दी जानी चाहिए।

दूसरी ओर, इस मामले में अतिरिक्त लोक अभियोजक (APP) का कहना था कि आवेदक की पत्नी के मेडिकल दस्तावेजों का सत्यापन हो चुका है, लेकिन आवेदक यानी नीरज का कुख्यात गिरोह चलाने का इतिहास रहा है और वह एक कुख्यात अपराधी है। उस पर 20 से ज्यादा मामले दर्ज हैं। ऐसे में वह हाई रिस्क वाला कैदी है और आशंका है कि जमानत पर रिहा होने की स्थिति में वह कानून की उचित प्रक्रिया से बचने के लिए हरसंभव प्रयास कर सकता है।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

आपकी प्रतिक्रिया?


आपको यह भी पसंद आ सकता हैं

Comments

https://pabna.in/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!