बिहार में गंगा का रौद्र रूप: बेगूसराय में जमींदारी बांध बहा, भागलपुर में भी तटबंध टूटने से बढ़ा बाढ़ का खतरा बिहार 3 घंटे पहले 3
बिहार में गंगा और उसकी सहायक नदियों का जलस्तर बढ़ने से भारी तबाही मची है, बेगूसराय में पेड़ गिरने से जमींदारी बांध का बड़ा हिस्सा टूट गया है जबकि भागलपुर में भी तटबंध बहने से लोग दहशत में हैं।

बिहार में मानसूनी बारिश के बाद गंगा नदी और उसकी सहायक नदियों का रौद्र रूप देखने को मिल रहा है। राजधानी पटना समेत राज्य के कई हिस्से जलमग्न हो रहे हैं, जिससे बाढ़ का खतरा लगातार गहराता जा रहा है। इसी बीच बेगूसराय और भागलपुर जिलों से बड़ी खबरें सामने आ रही हैं, जहां भारी दबाव के कारण बांध और तटबंध टूट गए हैं। बांध टूटने की इन घटनाओं के बाद प्रभावित इलाकों में अफरा-तफरी का माहौल है और स्थानीय प्रशासन राहत एवं बचाव कार्यों में जुट गया है। दोनों ही स्थानों पर जल संसाधन और बाढ़ नियंत्रण विभाग की टीमें पानी के बहाव को नियंत्रित करने और टूटे हुए हिस्सों की मरम्मत के काम में युद्धस्तर पर लगी हुई हैं।

बेगूसराय में तबाही: ताड़ का पेड़ गिरने से टूटा 30 मीटर का जमींदारी बांध

बेगूसराय जिले में गंगा नदी के बढ़ते जलस्तर ने तबाही मचानी शुरू कर दी है। बछवारा प्रखंड के अंतर्गत आने वाले बेगमसराय और झमतिया गांव के बीच बना हुआ रिंग बांध, जिसे जमींदारी बांध भी कहा जाता है, अचानक टूट गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, रविवार और सोमवार की दरमियानी रात करीब तीन से चार बजे के बीच तेज बहाव के कारण बांध का लगभग 30 मीटर का हिस्सा बह गया। बांध के टूटने से आसपास के गांवों में हड़कंप मच गया और सैकड़ों एकड़ भूमि पर लगी फसलें जलमग्न हो गईं।

इस घटना के पीछे एक बेहद चौंकाने वाली वजह सामने आई है। दरअसल, रविवार की रात करीब 12 बजे तक जल संसाधन विभाग की टीम ने इस बांध का निरीक्षण किया था और तब तक स्थिति नियंत्रण में थी। लेकिन सुबह होने से पहले ही, बांध के किनारे लगा एक विशाल ताड़ का पेड़ पानी के तेज बहाव और मिट्टी के कटाव के कारण उखड़कर गिर गया। इस पेड़ की जड़ें जमींदारी बांध के काफी अंदर तक धंसी हुई थीं, जिसके कारण जब पेड़ गिरा तो वह अपने साथ बांध के एक बड़े हिस्से को भी बहा ले गया। देखते ही देखते करीब 30 मीटर का हिस्सा पूरी तरह जमींदोज हो गया।

बांध टूटने की खबर मिलते ही ग्रामीणों ने अपनी सूझबूझ का परिचय दिया। उन्होंने प्रशासन के पहुंचने से पहले ही खुद के स्तर पर पेड़-पौधों को काटकर पानी के बहाव को रोकने और उसकी गति को धीमा करने का प्रयास किया। इसके बाद प्रशासन और बाढ़ नियंत्रण विभाग के अधिकारी दल-बल के साथ मौके पर पहुंचे और मरम्मत का कार्य आरंभ किया। इस हादसे के बाद रानी गांव पर बाढ़ का गंभीर खतरा मंडराने लगा है, और निचले इलाकों में स्थित कई घरों के भीतर बाढ़ का पानी प्रवेश चुका है। इसके अतिरिक्त, गुप्ता लख्मीनिया बांध पर भी पानी का दबाव अत्यधिक बढ़ गया है। ग्रामीणों की मांग है कि इस जमींदारी बांध को तत्काल दुरुस्त किया जाए ताकि गुप्ता लख्मीनिया बांध की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

भागलपुर में भी हाहाकार: काजीकोरैया राघोपुर मार्जिनल तटबंध में आई दरार

दूसरी तरफ, भागलपुर जिले से भी ऐसी ही डराने वाली खबर सामने आई है। जिले के राघोपुर क्षेत्र में गंगा नदी के उफान के सामने सुरक्षात्मक तटबंध टिक नहीं सका। अधिकारियों से मिली जानकारी के मुताबिक, खरीक अंचल के अंतर्गत आने वाले काजीकोरैया राघोपुर मार्जिनल तटबंध में रविवार की देर रात तकरीबन ढाई बजे (2:30 बजे) अचानक कटाव शुरू हो गया। गंगा के बढ़ते जलस्तर और पानी के प्रचंड दबाव के कारण तटबंध का एक हिस्सा टूटकर बह गया, जिससे पूरे इलाके में दहशत का माहौल बन गया है।

इस संकटपूर्ण स्थिति पर जिला प्रशासन पूरी तरह नजर बनाए हुए है। भागलपुर की जिलाधिकारी अलंकृता पांडेय व्यक्तिगत रूप से इस पूरी स्थिति की निगरानी और समीक्षा कर रही हैं। घटना की गंभीरता को देखते हुए आपदा प्रबंधन के अपर समाहर्ता, नवगछिया के अनुमंडल पदाधिकारी, बाढ़ नियंत्रण विभाग के वरिष्ठ अधिकारी तथा तमाम अभियंता वार्ड संख्या 12 में स्थित शंकरपुर टोला के पास घटनास्थल पर खुद मौजूद हैं और राहत कार्यों का संचालन करवा रहे हैं।

प्रशासनिक कार्रवाई और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम

भागलपुर जिला प्रशासन द्वारा जारी एक आधिकारिक वक्तव्य में कहा गया है कि तटबंध में हुए कटाव के कारण पानी तेजी से नवगछिया की तरफ बढ़ रहा है। पानी के इस बहाव को रोकने और स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए बाढ़ नियंत्रण विभाग की तकनीकी टीम युद्धस्तर पर सुरक्षात्मक और सुदृढ़ीकरण कार्यों में जुटी हुई है। जल प्रवाह को मोड़ने, रोकने और भविष्य में होने वाले कटाव को रोकने के लिए सभी आवश्यक मशीनें, बालू की बोरियां और अन्य निर्माण सामग्रियां मौके पर पहुंचा दी गई हैं।

विशेष रूप से उल्लेखनीय है कि जहां यह कटाव हुआ है, वह स्थान बिहार के ऊर्जा मंत्री बुलो मंडल के पैतृक गांव से मात्र 500 मीटर की दूरी पर है। ऐसे में प्रशासन इस संवेदनशील क्षेत्र को सुरक्षित करने के लिए अतिरिक्त मुस्तैदी दिखा रहा है। प्रशासन ने क्षेत्र के सभी नागरिकों से यह विशेष अपील की है कि वे किसी भी प्रकार की घबराहट में न आएं और न ही सोशल मीडिया या अन्य माध्यमों पर फैलने वाली भ्रामक अफवाहों पर ध्यान दें। अधिकारियों ने आश्वस्त किया है कि तटबंध की सुरक्षा और स्थानीय आबादी के जान-माल की रक्षा के लिए हर संभव और आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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