फ्रांस में भड़की हिंसा: महंगाई के खिलाफ सड़कों पर उतरे लाखों लोग, राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने की शांति की अपील विश्व एक घंटा पहले 6
फ्रांस में पिछले दो सप्ताह से जारी जन-आंदोलन अब हिंसक हो गया है। बढ़ती महंगाई और आर्थिक संकट के खिलाफ लाखों लोग सरकार का विरोध कर रहे हैं, जबकि राष्ट्रपति ने लोगों से एकता बनाए रखने की गुहार लगाई है।

फ्रांस में सड़कों पर संग्राम

फ्रांस की राजधानी पेरिस समेत पूरे देश में इन दिनों सरकार विरोधी प्रदर्शनों ने हिंसक रूप धारण कर लिया है। पिछले दो हफ्तों से लगातार जारी इन विरोध प्रदर्शनों की शुरुआत छात्रों की मांगों से हुई थी, जो अब देखते ही देखते पूरे देश में एक बड़े जन-आंदोलन में बदल गई है। स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि पेरिस की सड़कों पर दंगारोधी पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच आमना-सामना हो रहा है, जिससे हालात काफी तनावपूर्ण बने हुए हैं।

हिंसा और आगजनी का बढ़ता दौर

देशभर में हालात बेकाबू होते जा रहे हैं। पेरिस के अलावा लियोन, क्लेरमोंट-फेरां और स्ट्रासबर्ग जैसे बड़े शहरों में स्थिति बहुत खराब है। प्रदर्शनकारी पुलिस के साथ भिड़ रहे हैं, दुकानों में लूटपाट की जा रही है और जगह-जगह आगजनी की घटनाएं सामने आई हैं। शनिवार को इन शहरों में पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए बड़ी संख्या में आंसू गैस के गोले छोड़े। इसके अलावा नीस और नांतेस जैसे शहरों में प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए प्रशासन ने वॉटर कैनन का सहारा लिया। प्रशासन ने पेरिस में प्रदर्शन के दायरे को दक्षिण-पूर्वी हिस्से तक सीमित करने का प्रयास किया था, जहां मार्च पोर्त द इटली से शुरू होकर पोर्त द विन्सेन्स तक गया। हालांकि, प्लास द ला नासियों की ओर बढ़ने की कोशिश करने वाले प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने सख्ती से रोक दिया।

राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों का रुख

लगातार बढ़ते हिंसक प्रदर्शनों के बीच फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने नागरिकों से शांति बनाए रखने की पुरजोर अपील की है। उन्होंने लोगों को आगाह किया कि वे समाज को बांटने वाली ताकतों के बहकावे में न आएं। मैक्रों ने कहा कि वे इस आंदोलन को अब खत्म कर दें। अपने बयान में उन्होंने स्वीकार किया कि पिछले कुछ वर्षों में समाज के भीतर तनाव पनप रहा था, जिसे समय रहते काबू नहीं किया गया। उन्होंने चेतावनी दी कि हालिया घटनाओं ने गणतंत्र की नींव को हिलाकर रख दिया है और विभिन्न धर्मों के प्रति गलत दृष्टिकोण पैदा हुए हैं। राष्ट्रपति ने जोर देकर कहा कि सबसे महत्वपूर्ण यह है कि समाज के एक हिस्से को दूसरे के खिलाफ खड़ा करने की साजिश का हिस्सा न बनें। उनका मानना है कि फ्रांस का गणतंत्र हमेशा एकता और आपसी भाईचारे के आधार पर ही मजबूत रह सकता है।

प्रदर्शन की मुख्य वजहें

इस बड़े पैमाने पर हो रहे विरोध के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का मुख्य गुस्सा देश में बेतहाशा बढ़ती महंगाई को लेकर है। इसके साथ ही, शिक्षा के क्षेत्र में फंड की भारी कमी और लोगों के दैनिक जीवन-यापन के खर्चों में हुई अप्रत्याशित बढ़ोतरी ने आम जनता का धैर्य तोड़ दिया है। लाखों लोग सड़कों पर उतरकर सरकार की नीतियों का कड़ा विरोध कर रहे हैं और पीछे हटने के लिए कतई तैयार नहीं दिख रहे हैं।

साहिल चौहान पाबना के वर्ल्ड अफेयर्स रिपोर्टर हैं, जो अंतरराष्ट्रीय खबरें और वैश्विक मामले कवर करते हैं। विदेश नीति, कूटनीति और दुनिया भर के घटनाक्रमों पर उनकी अच्छी पकड़ है। वे जटिल वैश्विक मुद्दों को भारतीय नजरिए से समझाते हैं।

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