पश्चिम बंगाल
एक घंटा पहले
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नोतुन पल्ली में हुई सनसनीखेज वारदात
पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर में एक विचलित कर देने वाली घटना सामने आई है। शहर के नोतुन पल्ली क्षेत्र में रात के सन्नाटे के बीच तृणमूल कांग्रेस के कई समर्थकों के घरों को निशाना बनाया गया। अज्ञात हमलावरों ने इन घरों पर जमकर ईंट-पत्थर बरसाए और तोड़फोड़ की, जिससे पूरे इलाके में दहशत का माहौल बन गया है। इस पूरी घटना की फुटेज पास ही लगे एक सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई है, जिसके आधार पर अब जांच की जा रही है।
लाल कार सवार बदमाशों ने मचाया उत्पात
प्राप्त जानकारी के अनुसार, शुक्रवार की देर रात एक लाल रंग की गाड़ी नोतुन पल्ली के पास आकर रुकी। इसमें तीन संदिग्ध युवक सवार थे। चश्मदीदों और स्थानीय निवासियों का कहना है कि ये युवक अचानक गाड़ी से बाहर निकले और तृणमूल कार्यकर्ताओं के घरों की ओर ईंट-पत्थर फेंकना शुरू कर दिया। हमले के दौरान उन्होंने जमकर अपशब्दों का प्रयोग भी किया, जिससे रात के समय सो रहे स्थानीय लोगों की नींद उड़ गई।
घटना को लेकर स्थानीय निवासी और टीएमसी कार्यकर्ता संजय रॉय ने अपना दर्द साझा करते हुए कहा कि, ये हमलावर कुछ समय पहले ही पार्टी में आए थे। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे इस बात से अनभिज्ञ हैं कि ये लोग उनसे इतनी रंजिश क्यों पाले हुए हैं। उन्होंने कहा, क्या हम पर सिर्फ इसलिए हमला हो रहा है क्योंकि हम तृणमूल कांग्रेस के साथ हैं। इस संबंध में हमने संबंधित थाने में अपनी लिखित शिकायत दर्ज करा दी है।
बीजेपी का पलटवार- यह तृणमूल की अंदरूनी लड़ाई
इस घटना के सामने आने के बाद इलाके में राजनीति तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी ने इन आरोपों को सिरे से नकार दिया है। बीजेपी के जिला प्रवक्ता सुमंत मंडल ने कहा कि उनकी पार्टी इस तरह की हिंसात्मक राजनीति का कतई समर्थन नहीं करती है। उन्होंने इस पूरे मामले को तृणमूल कांग्रेस की गुटबाजी और अंदरूनी कला का नतीजा बताया है।
सुमंत मंडल ने आगे कहा कि तृणमूल कांग्रेस के सदस्य आपस में ही झगड़ रहे हैं और अब एक-दूसरे को नीचा दिखाने के लिए इस तरह की हरकतें कर रहे हैं। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि बीजेपी का इस मामले से कोई लेना-देना नहीं है। हालांकि, उन्होंने पुलिस से मांग की है कि दुर्गापुर की शांति भंग करने वाले इन उपद्रवियों पर सख्त से सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। फिलहाल स्थानीय पुलिस सीसीटीवी फुटेज को खंगाल रही है ताकि हमलावरों की पहचान की जा सके और उनके खिलाफ कानूनी प्रक्रिया शुरू हो सके।
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