ट्रंप से बातचीत की अटकलों के बीच अचानक चीन पहुंचे किम जोंग उन, दक्षिण कोरिया की बढ़ी चिंता विश्व एक घंटा पहले 5
उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन ने चीन की सीमा से सटे डांडोंग शहर का अचानक दौरा किया है, जिसे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ आगामी वार्ता से जोड़कर देखा जा रहा है।

चीन पहुंचे उत्तर कोरियाई नेता

उत्तर कोरिया के शीर्ष नेता किम जोंग उन ने करीब एक साल के लंबे अंतराल के बाद चीन की यात्रा की है। यह दौरा ऐसे समय में हुआ है जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किम जोंग उन और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच संभावित मुलाकात को लेकर कयासों का दौर जारी था। अचानक हुई इस यात्रा ने विशेष रूप से दक्षिण कोरिया की बेचैनी बढ़ा दी है। दक्षिण कोरियाई मीडिया और आधिकारिक सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार, किम जोंग उन ने चीन के बॉर्डर के नजदीक स्थित डांडोंग शहर में कदम रखा।

न्यू यालू रिवर ब्रिज का उपयोग

अपनी इस यात्रा के लिए किम जोंग उन ने न्यू यालू रिवर ब्रिज का इस्तेमाल किया। इस पुल का निर्माण कार्य वर्ष 2014 में पूरा हो गया था, लेकिन सड़क मार्ग और सीमा शुल्क संबंधी बुनियादी ढांचे के अभाव में इसे लंबे समय तक जनता के लिए नहीं खोला जा सका था। अंततः, 15 अक्टूबर को इसे आधिकारिक तौर पर आवाजाही के लिए खोल दिया गया और अब इसी पुल के जरिए किम जोंग उन का चीन में प्रवेश चर्चा का विषय बना हुआ है। हालांकि, अभी तक दक्षिण कोरिया की सरकार ने किम की इस यात्रा की आधिकारिक तौर पर पुष्टि नहीं की है।

आर्थिक और कूटनीतिक संबंधों पर जोर

चीन, उत्तर कोरिया के लिए सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है। प्योंगयांग अपनी आर्थिक जरूरतों और वैश्विक कूटनीतिक समर्थन के लिए काफी हद तक बीजिंग पर आश्रित रहता है। माना जा रहा है कि किम जोंग उन की यह यात्रा दोनों पड़ोसी देशों के बीच आर्थिक सहयोग को और अधिक मजबूती प्रदान करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। कोरिया जूंगआंग डेली की रिपोर्ट के मुताबिक, डांडोंग पहुंचने पर चीन के प्रधानमंत्री ली छ्यांग ने किम जोंग उन का स्वागत किया।

ट्रंप के साथ वार्ता से पहले बीजिंग का समर्थन

विशेषज्ञों का मानना है कि इस दौरे के पीछे कई रणनीतिक कारण हो सकते हैं। एक ओर जहां किम जोंग उन चीन के साथ हुए पूर्व समझौतों को तेजी से लागू करने की मांग कर सकते हैं, वहीं दूसरी ओर डोनाल्ड ट्रंप के साथ होने वाली संभावित बैठक से ठीक पहले चीन का कूटनीतिक समर्थन हासिल करना भी उनका मुख्य उद्देश्य हो सकता है। बीजिंग के साथ अपनी स्थिति स्पष्ट करके किम अंतरराष्ट्रीय मंच पर खुद को और अधिक मजबूत साबित करने की कोशिश में हैं।

साहिल चौहान पाबना के वर्ल्ड अफेयर्स रिपोर्टर हैं, जो अंतरराष्ट्रीय खबरें और वैश्विक मामले कवर करते हैं। विदेश नीति, कूटनीति और दुनिया भर के घटनाक्रमों पर उनकी अच्छी पकड़ है। वे जटिल वैश्विक मुद्दों को भारतीय नजरिए से समझाते हैं।

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