मनोरंजन
13 घंटे पहले
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विचारों
सुपरहीरो की पुरानी छवि पर सवाल
हॉलीवुड और बॉलीवुड की फिल्मों ने मिलकर हमारे जेहन में 'सुपरहीरो' की एक तय तस्वीर बना दी है। इस तस्वीर में एक कसरती बदन वाला नौजवान होता है, जिसके पास चमकदार केप, भारी-भरकम वीएफएक्स, हवा में उड़ती गाड़ियां और सिक्स-पैक एब्स होते हैं और जो दुनिया को बचाता नजर आता है। लेकिन सवाल यह है कि क्या वही अकेला असली सुपरहीरो है?
एक अलग किस्म का नायक
क्या कोई ऐसा भी हो सकता है, जो किसी जादुई ताकत के बिना भी किसी मासूम के चेहरे पर मुस्कान बिखेर दे और ऐसा कुछ कर गुजरे, जिससे लोगों की जिंदगी ही बदल जाए? यही सवाल इस फिल्म की बुनियाद है, जो परदे पर नायक की एक नई परिभाषा गढ़ने की कोशिश करती है।
मनीष सैनी की कोशिश
डायरेक्टर मनीष सैनी की फिल्म 'द ग्रेट ग्रैंड सुपरहीरो' इसी पुरानी सोच को तोड़ती है। यह फिल्म सुपरहीरो का एक अनोखा, शांत और जमीन से जुड़ा हुआ रूप सामने रखती है, जो दिखावे और चकाचौंध से दूर रहकर भी असर छोड़ता है।
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